झाबुआ~ सबकी किमत लगने लगी बाजारों में,ठंड के दिनों में चुनावी चर्चाओं से गर्माया माहौल.....अब इंतजार 11 दिसम्बर का ~~

? क्या जीएस डामोर का मिला होगा अपनो का समर्थन~~

? क्या झाबुआ की गद्दी पर बैठेगा झाबुआ की राजनीति के चाणक्य संासद कांतिलाल भूरिया का डॉक्टर पुत्र~~

? क्या गांवो के दिलो के साथ पहुच नगर तक पहुच पायेगा कांग्रेस के बागी मेडा का हल~~

कश्मकश के मुकाबले के बीच में झुल रही विधानसभा चुनाव की बाजी ~~

झाबुआ (संजय जैन )


विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके है अब इंतजार है तो सिर्फ 11 दिसम्बर की उस सुबह का उस ईवीएम मशीन के खुलने का जिसमें सभी के भाग्य का फैसला बंद है। लेकिन क्या भाजपा के द्वारा नये चहरे जीएस डामोर को लेकर भाजपा के भीतर कार्य कर रहे खुद कार्यकर्ताओ ने उनके साथ दिया है ....? अब ये तो वक्त ही बतायेगा। जीएस डामोर अपनी ही पार्टी के जिम्मेदारो द्वारा किए गये भितरघात को पार कर पायेगे,यह एक बडा विषय सामने खडा है। लेकिन अन्य कार्यकत्र्ताओ की माने तो जीएस डामोर के समर्थक वाकई में जो साथ रहे है ,उनके द्वारा यह पुरा पुरा अनुमान लगाया जा रहा है कि वे निश्चित ही विजय प्राप्त करेंगे। इस चुनाव में दो ओर उम्मीदवारो ने अपनी किस्मत को अजमाया है जिसमें कांग्रेस पार्टी से डॉक्टर विक्रांत भूरिया और दूसरी ओर कांग्रेस बागी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जेवियर मेडा। देखना यह है कि क्या जीएस डामोर कोर वोट को पार कर पाते है या नही यदि ऐसा हुआ तो उनकी जीत कांग्रेस बागी निर्दलीय प्रत्याशी जेवियर मेडा के अच्छे प्रदर्शन पर टिकी हुई है। ओर यदि वे कोर वोट नही पार कर सके तो वे तीसरे स्थान पर भी लुढककर आ सकते है। राजनितिक विशेषज्ञो के अनुसार इस बार के विधानसभा चुनाव में बाजी बडी कश्मकश के मुकाबले के बीच में झुल रही है। 


***माहौल को गरमा दिया राजनीतिकचर्चाओं ने 

विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूर्ण होने के पश्चात सारे कार्य छोड़ कर डाले गए मतों केबाद अब लोगों में प्रत्याशियों की जीत हार को लेकर शर्ते लगने लगी है। मतगणना तक इसी तरह मंथन का दौर चलेगा। घर-परिवार, दोस्तों से लेकर चौराहों तक केवल राजनीतिकचर्चाओं का जोर जारी है। नई-पुरानी घटनाओं से लेकर ताजी-तरीन घटनाओं से लोग जीत-हार पर चर्चाएं कर रहे है। ठंड केदिनों में राजनीतिकचर्चाओं ने माहौल को गरमा दिया है। 

***शर्ते और सट्टा चलने की खबरें भी चर्चा का विषय बन चुकी है


मतदान के दूसरे दिन से ही लोगों के जहन में चुनाव छा गया था। भले ही मतगणना 11 दिसंबर को है,लेकिन फिलहाल लोग राजनीतिक चर्चाओं में मगन है। दोनों ही पार्टियों केनेता एवं निर्दलीय नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे है। इसके साथ ही मतदान के दिन से आज तकभी घरों से लेकर दफ्तरों तकऔर बाजार से लेकर मंदिरों तक,हर जगह कौन जितेगा और कौन हारेगा, लीड कितने हजार की होगी, किसकी जमानत जप्त होगी....? जिले में कितनी सीटें कौन सी पार्टी की झोली में जाएगी...? प्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी..? जैसे विषयों में चर्चाओं का दौर जारी है। मतदान का अधिक प्रतिशत किस पार्टी के पक्ष में जाएगा...? इसे लेकर भी चर्चा चल रही है। जीत हार को लेकर शर्ते और सट्टा चलने की खबरें भी चर्चा का विषय बन चुकी है।


****अब इंतजार है.....11 दिसम्बर का 

भाजपा कार्यकत्र्ताओ की अगर बात कहे तो उनके द्वारा जो जीएस डामारे को लेकर भीतरघात किया गया है वो एक मायने में सही साबित होते नजर आ रहा है। जिसे साफ  तौर पर नकारा नही जा सकता है। यह सभी जानते है कि कुछ समय पुर्व में जीएस डामोर का टीकट पेटलावद विधानसभा के लिये उजागर हो रहा था। लेकिन किसी कारणवश निर्मला भूरिया को देना फायनल हुआ। इसके बाद पार्टी हाईकमान के निर्देशानुसार जीएस डामोर को झाबुआ सीट के लिये टीकट दिया गया। जहां पर पूर्व से ही विधायक रह चुके शांतिलाल बिलवाल द्वारा भी अपने खुद के लिये भी टीकट की मांग की थी। ज्ञातव्य है कि कही ना कही भाजपा पार्टी के बीच कार्यकत्र्ताओ की किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी फिर चाहे वह विक्रांत का काम तो कही जेवियर मेडा का खुलकर काम करना दिखाई नही दिया,लेकिन हुआ है। खैर अब सिर्फ  विचारो में इन बातो का गौर किया जा सकता है क्योकि मतदाताओ ने अपने हिस्से का फैसला ईवीएम मशीन मे बंद कर दिया है। जिसका पिटरा 11 दिसम्बर को सुबह खोला जायेगो। अब देखना यह है कि क्या जीएस डामारे को उनके शुभचिंतको का साथ मिला है या फिर हाथ के पंजे ने दम भरा है या फिर किसान हल जोतता किसानो के दिल तक पहुचा है.....?


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