झाबुआ~ झाबुआ/अलीराजपुर एग्जिट पोल-होगी भाजपा की जीत 3 या चार सीटों,कांग्रेस की 1 या 2 सीटों पर,निर्देलिय की शायद 1 सीट पर और झाबुआ या थांदला में किसी 1 सीट पर जमानत भी जप्त.......

सत्ता का केंद्र बिंदु होगा झाबुआ/अलीराजपुर~~

कॉंग्रेस से मज़बूत स्थिति में भाजपा~~

झाबुआ। संजय जैन~~

राजस्थान में 7 दिसम्बर को मतदान प्रक्रिया पुरी होने के साथ ही जहां टीवी चैनलो द्वारा राजस्थान, मप्र, एवं छत्तीसगढ राज्य में कौन सरकार बना रहा है....? को लेकर एक्जिट पोल की शुरूआत हो चुकी है। 15 सालों से सत्ता संभाल रही भाजपा को झाबुआ/अलीराजपुर से ज़ोरदार समर्थन मिलने के संकेत मिल रहे हैं। आचार संहिता लगने से पहलें आमसभा में भारी भीड़ जुटाने वाली भाजपा चुनाव के दौरान अपने कार्यकर्ताओं के साथ एक जूट नजऱ आयी।बात झाबुआ/अलीराजपुर की पांचो विधानसभा सीटों की करें तो यहाँ भाजपा का एक तरफ़ा अधिकतर क़ब्ज़ा नजर आ रहा हैं , इस बार जिस तरह से भाजपा ने कुशल और समझदार रणनीति से चुनाव प्रबंधन किया है वो हीं भाजपा की जीत का आधार स्तंभ बनेंगा। 

......कांग्रेस की सरबार बनने का कर रहे दावा-सटोरियों का गणित

वही सट्टा बाजार भी तीनो राज्यो को लेकर अपना मत व्यक्त कर रहा है। सट्टा बाजार के अनुसार इन तीनो राज्यो में कांग्रेस सरकार बनाने की ओर अग्रसर होती हुई दिखाई दे रही है। सटोरियो के अनुसार राजस्थान में भाजपा 60 सीट, कांग्रेस 120 एवं अन्य 20 सीटे ला रही है। जिसमें कांग्रेस की सरकार बनने की प्रबल संभावना सटोरिये व्यक्त कर रहे है। छत्तीसगढ की हालात बराबरी की बताई जा रही है। भाजपा एवं कांग्रेस को 43-43 सीटें सट्टा बाजार आना बता रहा है। 4 सीटे अन्यो के खाते में जा रही है। सबसे दिलचस्प मुकाबला मप्र का बताया जा रहा है जहां भारतीय जनता पार्टी को मात्र 100 सीटें वही कांग्रेस को 120 सीट तथा निर्दलीय को 10 सीटे का अनुमान सट्टा बाजार लगा रहा है। 

....सटोरियों का गणित- झाबुआ विधानसभा के संदर्भ 

झाबुआ विधानसभा के संदर्भ में बात करे तो 9 प्रत्याशियों में मुख्य रूप से टक्कर भाजपा के गुमानसिंह डामोर कांग्रेस के डॉ. विकं्रात भूरिया एवं निर्दलीय जेवियर मेडा के बीच बताई जा रही है। जिसमें डॉ विक्र्रांत का भाव 1 रूपया गुमानसिंह डामोर का भाव 1.50 रूपये तथा जेवियर मेडा का भाव 3 रूपये बताया जा रहा है। यदि सटौरियो की गणित को सही माना जाये तो कांग्रेस के विक्रांत भूरिया पहली ही बार में यहां के विधायक बनने जा रहे है। ऐसे में सट्टा बाजार जो पिछले दिनों उपर नंीचे हो रहा था वह अब इस भाव पर स्थिर हो गया है। 

                                 ................देखिए क्या रहाँ चुनावी गणित.....?.............

                                     ...Ó  झाबुआÓ..

यह जिले की सबसे महत्वपूर्ण सीट हैं क्योंकि यहाँ से जो भी जीता वो अपनी पार्टी व कांग्रेस बागी उम्मीदवार भी लोकसभा प्रत्याशी हो सकता है ! यह चर्चा हैं। झाबुआ से कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री सांसद कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ.विक्रांत भूरिया यहाँ से मैदान में हैं,जबकि भाजपा ने एक नए प्रयोग के तहत दावेदार पूर्व विधायक शांतिलाल बिलवाल का टिकिट काट कर संसदीय क्षेत्र मे लोकसभा उम्मीदवार को तलाशने हेतु एक नया प्रयोग कर इंजीनियर जीएस डामोर को मैदान में उतारा हैं। मुक़ाबला कांग्रेस,भाजपा और कांग्रेस बागी निर्दलीय जेवियर मेडा के बीच हुआ है। निर्दलिय ने चुनावी बिसात में दोनो दलों को चकमा देते हुएँ अपनी साख बना ली है। अब यहाँ परिणाम कुछ चौंकाने वाले भी हो सकते हैं। यहाँ जमानत जप्त वाली स्थिति भी बन सकती है।

                                                    ...ÓथांदलाÓ....

भाजपा ने यहाँ फिर एक बार परिवर्तित वर्तमान विधायक कलसिंह भाभर पर भरोसा कर टिकिट दिया है और कांग्रेस ने पूर्व विधायक वीरसिंह भूरिया को अपना प्रत्याशी बनाया। यहाँ पर भी भाजपा बागी निर्दलीय प्रत्याशी दिलीप कटारा ने समीकरण बिगाडऩे का प्रयास किया है। थांदला में कांग्रेस मज़बूत दिखाईं दे रहीं हैं,क्योंकि भाजपा यहाँ शहरी क्षेत्र में अपने ही लोगो की बग़ावत को रोक नहीं पाईं है।।यहाँ भी जमानत जप्त वाली स्थिति  बन सकती है।

                                               .....Ó पेटलावद Ó.....

दो मज़बूत उम्मीदवार चुनाव मैदान में आमने सामने हैं। दोनो के पास चुनावी बिसात और जीत का तगड़ा अनुभव हैं। यहाँ टक्कर सबसे रौचक हैं। लेकिन यहाँ जयस उम्मीदवार यदि 5 से 7 हजार से अधिक वोट लाता है तो कांग्रेस के वालसिंह मेडा के लिये नुकसानदायक और भाजपा की वर्तमान विधायक निर्मला भूरिया के लिए निर्णायक साबित होगा। यहाँ पर हार-जीत का अंतर पांचो विधानसभा में सबसे कम होने के आसार है।

                                                 ....Óजोबट Ó....

कांग्रेस का टिकिट बदलना यहाँ भाजपा को सीधा लाभ दें गया । साथ ही यहाँ भी झाबुआ सीट की तरह ही बागी कांग्रेसी उम्मीदवार विशाल रावत ने रही कसी कसर पूरी कर दी है। इस नुक़सान को भरने के लिए कांग्रेस की रणनीति का कितना असर हुआ है...? यह तो परिणाम आने पर साफ़  हो जाएगा। भाजपा ने वर्तमान विधायक माधोसिंह डावर को मैदान में उतारा हैं। जोबट सीट भाजपा के खाते में जाती दिख रहीं हैं।

                                             ....Ó अलीराजपुर Ó.....

यहाँ से भाजपा के वर्तमान विधायक नागरसिंह चौहन मैदान में हैं,वहीं कांग्रेस से मुकेश पटेल को मैदान में उतारा हैं। भाजपा ने चुनाव अपनी कुशल शैली अनुसार लड़ा है बड़ी चतुराई के साथ अपनी जमावट मजबूत की है।भाजपा को कुछ अंदरूनी विरोध का ख़ामियाज़ा उठाना शायद पड़ सकता हैं । अलीराजपुर सीट भी भाजपा के खाते में जाती दिख रहीं हैं।

....11 दिसंबर को ही टक्कर में चक्कर साफ़  होगा

Óअंत में अब परिणाम किसके पक्ष में आते हैं.........?  ये तो माना जाता है कि टीवी चैनलो के एक्जिट पोल से ज्यादा सट्टा बाजार के जीत हार के ऑकडे करीब करीब सही ही साबित होते रहे है। ऐसे में यदि इन तीनो राज्यो में कांग्रेस पार्टी निर्दलीयो को तोड तुडाकर भी अपनी सरकार बना ले तो अतिशयोक्ति नही होगी। फिर भी कहा नही जा सकता है कि सटौरियो ने किस आधार पर उक्त अनुमान निकाले है। 11 दिसम्बर को मतगणना होने पर दोपहर 12 बजे तक स्थिति साफ  हो जायेगी की भाजपा के खेमो मे बैण्ड बाजे बज रहे है अथवा कांग्रेसी हल्को में आतिशबाजी करके 15 साल के वनवास खत्म होने का जश्म मनाया जा रहा है । 11 दिसंबर को ही टक्कर में चक्कर साफ़  होगा। 

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