बड़वानी~ सुलह एवं समझौते के आधार पर प्रकरणो का निराकरण करवाने का सशक्त माध्यम है नेशनल लोक अदालत-जिला एवं सत्र न्यायाधीश~~

बड़वानी /न्यायालय में चलने वाले प्रकरणो का सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकरण करने का एक सशक्त माध्यम है लोक अदालत। लोक अदालत में प्रकरणो का निराकरण होने से दोनो पक्षो के मध्य आपसी सद्भाव व भाईचारा बना रहता हैै तथा वे कानून की लंबी प्रक्रिया से छूट कर त्वरित न्याय पाकर अपना जीवन सौहाद्रपूर्ण तरीके से जी सकते है।
शनिवार को नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए उक्त विचार जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रामेश्वर कोठे द्वारा व्यक्त किये गये। इस अवसर पर कलेक्टर श्री अमित तोमर, पुलिस अधीक्षक श्री विजय खत्री, विशेष न्यायाधीश श्री दिनेशचन्द्र थपलियाल, प्रथम अपर जिला न्यायाधीश श्री समीर कुलश्रेष्ठ, द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश श्री आशुतोष अग्रवाल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री हेमंत जोशी, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 सुश्री रश्मि मण्डलोई, बार एसोसियेशन के अध्यक्ष श्री पुरूषोत्तम मुकाती सहित बड़ी संख्या में अभिभाषक, पक्षकार उपस्थित थे।
सुलह एवं समझौते के आधार पर 11 दम्पत्ति हुए एक
शनिवार को जिला न्यायालय बड़वानी में आयोजित नेशनल लोक अदालत में बड़वानी परिवार परामर्श केन्द्र के 10 प्रकरण एवं पेरालीगल वालेंटियर द्वारा प्रस्तुत 1 प्रकरण में सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकरण कराया गया। इसके तहत जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रामेश्वर कोठे के समक्ष जोड़ा़े ने आपसी मन-मुटाव को दूर कर न्यायाधीशो की उपस्थित में पुनः एक दूसरे को माला पहनाकर नये सिरे से जीवन जीने का प्रण भी किया। बिछड़े दम्पतियों को एक करवाने में परिवार परामर्श केन्द्र बड़वानी में एएसआई श्रीमती रेखा यादव, आरक्षक श्रीमती आशा डुडवे एवं काउंसलर श्रीमती अनिता चोयल एवं पेरालिंगल वालेंटियर श्री सरदारसिंह बघेल का सराहनीय योगदान रहा ।
दिव्यांग परिवार अब साथ मिलकर जियेंगे अपना जीवन
नेशनल लोक अदालत में आपसी सामंजस्य न होने के कारण अलग हुए दिव्यांग दम्पत्ति को पुनः मिलाने में सफलता प्राप्त की है। इस प्रकरण के पलसूद निवासी श्रीमती ललिता ने परिवार परामर्श केन्द्र बड़वानी में आवेदन दिया था की इन्दौर निवासी उनका पति कालू बंजारा एवं उसका परिवार आये दिन विवाद करता था । इसके कारण वे अपने दिव्यांग बच्चे के साथ पिता के घर रहने को मजबूर थी । पति और पत्नि की काउंसलिंग परिवार परामर्श केन्द्र बड़वानी के पदाधिकारियो द्वारा की गई।  जिस पर से दिव्यांग दम्पति ने अपने दिव्यांग बच्चे के साथ लोक अदालत में उपस्थित होकर न्यायाधीशो के सामने प्रण किया कि वे अब कभी आपसी मन मुटाव नही करेंगे । साथ ही दम्पति ने एक दूसरे को हार पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर अपने गिले सिकवे दूर किये । इस पर जिला सत्र न्यायाधीश ने दम्पति को समझौता रूपी एक मीठे नीम का पौधा भेंट किया । इस पर दम्पति ने मिले पौधे को अपने खुशहाल जीवन का प्रतीक मानकर बड़ा करने का आश्वासन उपस्थितो को दिया । 
एक समझौते से पुनः बसे दो परिवार
लोक अदालत ने एक समझौते के माध्यम से दो परिवार को पुनः बसाने में कामयाबी प्राप्त की है। परिवार परामर्श केन्द्र बड़वानी में श्रीमती आलीबाई ने प्रकरण दर्ज कर बताया था कि उनकी शादी पानवा निवासी जीवा मेगवाल से हुई थी। आये दिन आपसी विवाद के चलते वे अपने 8 माह के बच्चो के साथ अपने पिता के पास सजवानी में रह रही थी । इस आपसी विवाद के चलते उनके भाई गंगाराम की पत्नि बबलीबाई भी अपने पति को छोड़कर अपने मायके चली गई थी । क्योंकि बबलीबाई उनके पति की बहन थी जिसके कारण उनकी शादी अदला-बदली के तहत हुई थी । इस विवाद के चलते उनका पति उनसे 8 माह के बच्चे को छीनकर ले गया था । इस प्रकरण में न्यायाधीशों के समझाने पर दोनो परिवारो ने अपने मनमुटाव को दूर करते हुये पुनः अपना घर बसाने की सहमति  प्रदान की । जिस पर से इन दोनो दम्पतियो को भी न्यायाधीशो ने एक-एक मीठे नीम का पौधा देकर अपने समझौते को स्थाई बनाने की प्रेरणा प्रदान की ।

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