सरदारपुर~ 3 करोड़ के घोटाले मे लिप्त भ्रष्ट नगर परिषद को ईमानदार विधायक से परहेज~~

कलेक्टर के आदेश के बावजूद भ्रष्ट कर्मचारी पर दर्ज नही हुई एफआईआर~~

सीएम, मंत्री और विधायक के फोटो स्वागत बैनर मे नही होना बना जनचर्चा~~

सरदारपुर (शैलेन्द्र पँवार)


यूँ तो हमने राजनीती कि बीशात पर गुटबाजी को लेकर एक-दुसरो पर भीतरघात के कई किस्से सुने है लेकिन सरदारपुर नगर परिषद का एक ऐसा ही किस्सा दबी आवाज मे जनचर्चा का विषय बना हुआ है! किस्सा ये है कि नगर परिषद सरदारपुर अध्यक्ष पद हेतु वर्तमान क्षैत्रिय विधायक प्रताप ग्रेवाल के छोटे भाई ब्रजेश ग्रेवाल काँग्रेस से अपनी दावेदारी का पक्का मन बना चुके थे लेकिन क्षैत्रिय काँग्रेस कार्यकर्ताओं कि पहली पसंद महेश भाबर को देखते हुए खूद प्रताप ग्रेवाल महेश भाबर को कांग्रेस से अध्यक्ष पद कि दावेदारी हेतु मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर अढ़ चुके थे! इतना ही नही बल्कि सरदारपुर एवं राजगढ़ दोनों नगर परिषद सीटों पर कांग्रेस की जीत के लिये स्वयं का विधायक टिकीट दाँव पर लगा डाला था! ये वो किस्सा है जिसे सरदारपुर- राजगढ़ कि जनता लगभग भलीभाँति जानती ही है!
        इधर उक्त किस्से के जानते वाली क्षैत्रिय जनता एवं कांग्रेसी नगर परिषद सरदारपुर अध्यक्ष महेश भाबर के लिये दबी ज़ुबा से "ऐहसान फरामोश" जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे है! क्योंकि पहले गणतंत्र दिवस और अब पंचकोशी पदयात्रा मे नगर परिषद सरदारपुर द्वारा लगाये गये स्वागत बैनर मे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री कमलनाथ, नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह एवं क्षैत्रिय विधायक प्रताप ग्रेवाल के फोटो ही नही लगाये गये! हम आपको बता दे कि प्रताप ग्रेवाल कि लाबी मे ही रहकर महेश भाबर अपना राजनैतिक वजूद बना पाये थे लेकिन पहले ब्रजेश ग्रेवाल का पत्ता काट शायद अब प्रताप ग्रेवाल को कही ना कही चूनौती देने जैसा प्रतित हो रहा है, ऐसी और भी कई जनचर्चाएँ बनी हुई है! राजनीति किसी के बाप कि जागीर नही होती! यहाँ जनसमर्थन छीना नही जा सकता वरन जनता के प्रति समर्पण भाव से ही जनता कि दिलों पर राज किया जा सकता है! टिकीट तो संजय बघेल भी वेलसिग को चीत करके ले आये थे लेकिन जनसमर्थन के बगैर औन्धे मुँह गीरना पड़ा! गाँव कि कहावत है कि "बलदीयाँ गाड़ी ना निचे कुतरो चाले तो वुँ सोचे के गाड़ी मुँज चलऊँ" खैर ये तो कहावत है, यहाँ तो मामता है कि अपनी ही पार्टी से कांग्रेस के वरीष्ठ नेताओं को उचित सम्मान ना मिल पाने का! 

         जो सख्श भाजपाराज मे विपक्ष कि भूमिका ईमानदारी से निभाता रहा वो है प्रताप ग्रेवाल, जो किसानों कि आवाज उठाता रहा वो है प्रताप ग्रेवाल, जो क्षैत्र कि परेशान जनता के लिये सरकार से भीड़ता रहा वो है प्रताप ग्रेवाल, जो फसल, फसल बीमा, बीजली, पानी, अस्पताल और सड़क जैसी जनता कि मूलभूत सुविधाओं के लिये लड़ता रहा वो है प्रताप ग्रेवाल, अरे ज्यादा दुर कहां जाते हो खूद अपने भाई और कांग्रेस कमेटी से तुम्हें कांग्रेस से अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाने के लिये लड़ गया वो है प्रताप ग्रेवाल! अरे जो विपक्ष मे रहकर जो कर गुजरा था तनीक ये तो बता दो भ्रष्ट नगर परिषद के अध्यक्ष महोदय कि तुमने अध्यक्ष कि कुर्सी पर बैठने से लेकर आज तक सरदारपुर कि जनता को क्या क्या सौगाते दे डाली! हम बताते है भाजपा के कार्यकाल मे बनाई गई आदर्श सड़क जिन अनियमितताओ और भ्रष्टाचार का हवाला देकर आप ही ने जो आपत्तियाँ जताई थी आज उनसे भी ज्यादा भ्रष्टाचार व अनियमितता तुम्हारी आदर्श सड़क मे स्पष्ट दिखाई दे रही है जनाब! विद्युत सामग्री का भ्रष्टाचार करने वाले जितेन्द्र गोखले पर कलेक्टर के आदेश के बावजूद आज तीन माह  बीतने को आये है लेकिन एक एफआईआर तक नही करवाई गई,  इससे यह तो स्पष्ट है कि या तो आप अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह है या आप भ्रष्ट नगर परिषद के भ्रष्ट कर्मचारी को अपने नीजी लाभ के लिये संरक्षण दे रहे है!
        इस पुरे मामले को लेकर जब नगर पंचायत अध्यक्ष महेश भाबर से चर्चा कि गई तो उन्होंने बताया कि भुल से मुख्यमंत्री कमलनाथ, नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह और क्षैत्रिय विधायक प्रताप ग्रेवाल के फोटो नही लग पाये है और भविष्य मे इन बातों का विशेष ध्यान रखा जायेगा!
         लेकिन श्री भाबर कि बातों को सुन सोचने पर विवश होने पड़ा कि नगर का प्रथम नागरिक अर्थात अध्यक्ष कि कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार व्यक्ति ऐसी भुल भला कैसे कर सकते है और यदी अध्यक्ष महोदय कि स्मरण शक्ति इतनी कमजोर है तो नगर कि जनता को कितने और कैसे विकास कार्यों कि सौगात दे पायेगे!


Post A Comment:

0 comments: