*अंजड़/ पिपरी ~ पतित सरिता किनारे उठी भागवतभक्ति की लहर*~~

*कलश यात्रा के साथ भागवत कथा  शुभारंभ*~~

भागवत व्यवहारिक,गृहस्थ्य जीवन का ग्रंथ है~~

अंजड़:  समिस्थ  पवित्र माँ नर्मदाजी के किनारे बसे गावँ पिपरी(बोरलाय) में समस्त ग्रामीण भक्तों द्वारा मांगलिक भवन में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण की  भक्ति की लहर कलश व पोथी यात्रा के साथ प्रारंभ हो गई है ,जहां कथा वाचिका साध्वीश्रीअखिलेश्वरी मां ने कथा का शुभारंभ किया।


साध्वीजी ने बताया कि श्रीभागवत व्यवहारिक
व गृहस्थ्य जीवन का ग्रंथ है। इसमें  सामान्य जीवन में आने वाली सारी महत्वपूर्ण उपयोगी बातों को  कथाओं के माध्यम से  समझाया गया है। दीदी मां ने कहा कि श्री वेद व्यास के पुत्र शुकदेव को इस कथा श्रेष्ठ कथाकार माना गया है। वे इस कथा का संपूर्ण अध्यात्मिक  व सांसारिक महत्व जानते थे। उन्होंने ही इसे साधारण मानव के बीच में प्रचारित किया।
दीदी मां ने बताया कि श्रीभागवत पवित्र पुण्य धार्मिक ग्रंथ ही नही बल्कि ये सृष्टि के आरंभ से कलियुग तक की कथा है। जिसे ध्यान मग्न होकर सुनने व ह्रदय में उतारने से ही समझा जा सकता है।भागवतश्रीमद् भागवत सभी  के कल्याण के लिए सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न प्रमुख 24 अवतारों का वर्णन है, किंतु श्री कृष्ण जी का जीवन चरित्र इसमें  मुख्य माना जाता है। दीदी मां ने श्रीमद्भागवत की रचना किस प्रकार हुई  का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कथा प्रचलित है कि महाभारत जैसे महाग्रंथ की रचना के बाद भी वेद व्यास संतुष्ट और प्रसन्न नहीं थे, उनके मन में एक खिन्नता का भाव था। तब श्री नारद ने वेद व्यास को प्रेरणा दी कि वे एक ऐसे ग्रंथ ही रचना करें जिसके केंद्र में भगवान विष्णु हों। इस तरह महर्षि वेद व्यास ने ब्रह्मर्षि नारद की प्रेरणा से
इस ग्रंथ की रचना की। साध्वी जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत के 12 स्कंध हैं तथा 18 हजार श्लोक हैं। ।इसमें सृष्टि की रचना से लेकर कलियुग यानी सृष्टि के विनाश तक की कहानी है।


दीदी मां ने श्री भागवत जी व पुण्य भारत का महत्व बताते हुए कहा कि पवित्र ग्रंथ भागवत व्यवहारिक,गृहस्थ्य जीवन का ग्रंथ है। इसे  केवल धर्म सम्बंधित ही ग्रंथ ना समझ कर सभी के कल्याण का मार्ग है ये सोच कर धारण करे ,ये हमारे लिए एक ऐसा मार्गदर्शन है जिसको अपनाकर या धारण करके हम सत्मार्ग पर चल सकते है। श्रीभागवत जी के साथअन्य ग्रंथो में भी समानता,सद्भाव शांति निर्मलता का ही संदेश दिया गया है।साध्वीश्री ने बताया कि इस राष्ट्र की पुण्य धरा पर भगवान श्रीराम व कृष्ण ने अवतार लेकर  समरसता का संदेश दिया।अर्थात हमारे पूर्वजों ने भी राष्ट्र की एकता को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।इसलिए प्राचीन काल से ही भारत में विविधता में एकता देखी जाती रही है। विभिन्न धर्मों, जातियों और पंथों के लोग देश में एक साथ रहते हैं। हमारा राष्ट्र अखण्ड है । यहां पर सभी धर्मों के  सम्मान का मतलब  देश में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने का एक तरीका है।
कथा का समय 6 से 12 फरवरी तक मांगलिक भवन में प्रातः 11 से 3 बजे तक रहेगा अतः भक्तो से अनुरोध है कि वो इस भक्ति सरिता में अवश्य लाभ ले।

अनमोलसमाचार
लक्ष्मण राणावत


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