देपालपुर~ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कब बदलेंगे हाल~~

कब सुधरेगा मैदान~~

कब आएंगे डॉक्टर ~~

कब होगा अटैचमेंट खत्म ~~

देपालपुर(विमल फौजी) 


60 गांव के मरीजों का इलाज करने वाला एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों डॉक्टर व स्टाफ के लिए के लिए तरस रहा है ।एकमात्र डॉक्टर जो कि महिला ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर है वह अस्पताल में मरीजों के देखने के बजाय  जिला मीटिंग व दौरे में ही व्यस्त रहती है जिसका फायदा यहां पर मौजूदा स्टाफ उठाता है ।वहीं यहां के सरकारी अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर के बजाय आयुष व आयुर्वेदिक चिकित्सक एलोपैथिक इलाज कर रहे हैं ।वहीं डॉक्टर असाटी तथा डॉ विनोद ताम्रकर गौतमपुरा व धन्नड़ से हफ्ते में दो दो दिन ओपीडी देखने के लिए आते हैं। रात्रि में तो यहां का सरकारी अस्पताल एक आया व एक स्टाफ नर्स के भरोसे रह जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने की वजह से यहां काफी स्टाफ की जरूरत है। एक भी वार्ड बाय नही है जबकि यहां पर पोस्टेड कई कर्मचारी व डॉक्टर तनख्वाह यहां से लेते है लेकिन नोकरी और कही करते है। यहां के करीब 10 कर्मचारी अन्य जगहों पर  रहकर शहरों में ड्यूटी कर रहे है।
भाजपा शासनकाल में नही ली सूद -यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालात भाजपा शासन काल मे बद से बदतर होती जा रही थी।कोई ध्यान देने वाले ही नही थे। जनप्रतिनिधि को शिकायत करने के बाद भी उन्होंने भी इस अस्पताल की ओर ध्यान नहीं दिया जनप्रतिनिधि तो ठीक अधिकारियों ने भी यहां के अस्पताल की ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा।

घण्टो इंतजार -आज भी यहां के अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि मरीजों को डॉक्टरों के चक्कर में घंटों इंतजार करना पड़ता है हफ्ते में 2 दिन होने वाली सोनोग्राफी के लिए भी महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है। वही यहां पर मरीजों को बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है । महिलाओ को नीचे बैठना पड़ता है व पर्ची बनवाने के लिए भी कतार लगाना पड़ती है।

एक्सरे मशीन नही हुवा मुहर्त- वहीं यहां पर एक्स रे टेक्नीशियन तो है लेकिन एक्सरे मशीन जो नहीं आई थी वह आज भी यहां पर धूल खा रही है । मशीन चालू होगी या नही किसी के पास जवाब नही।
दवाइयों का इस्तेमाल नही-शासन की ओर से तो यहां पर्याप्त मात्रा में दवाइयां आती है।  मरीजों के लिए भर्ती करने के लिए भी पर्याप्त दवाई है ।ग्लूकोज की  बाटले यहां पर्याप्त है लेकिन उसका मात्र एक हिस्सा भी खत्म नही होता है  और वे एक्सपायर हो जाती है। क्योंकि जब यहां डॉक्टर नही है तो मरीजो को कौन भर्ती करेगा साथ ही भर्ती से संबंधित कई दवाइयां आती है लेकिन यहा उपयोग ही नहीं पाता । दवाई इंचार्ज व स्टोर कीपर से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि दवाई व ग्लोकोज की बॉटल पर्याप्त मात्रा में है लेकिन 1 साल में मात्र 200 ग्लूकोस की बॉटल भी खत्म नही हो पाती है । डॉक्टर नही होने के चलते कई दवाइयां तो एक्सपायर हो जाती है उनका उपयोग ही नहीं हो पाता।
बाहरी हालात- अस्पताल के बाहर की हालात तो ऐसी है कि यहां बाहर से आने वालों को महसूस ही नही होगा कि यहां अस्पताल है।क्योंकि अस्पताल के बाहर परिसर में बाहरी वाहनों का पार्किंग तथा उबड़ खाबड़ रास्ता। बारिश में पानी भरने के चलते यहां के रहवासियों ने बेटमा रोड बनने के लिए डामर की खुदाई की उससे भराव किया है। यहाँ पेवर ब्लाक लगाने के लिए हर साल लोकनिर्माण विभाग चार बार आकर नपती कर चला जाता है लेकिन ब्लाक नही लगे व 5 साल के प्रतिनिधि भी चले गए।
उम्मिद की किरणें- कांग्रेस के शासनकाल में स्वास्थ्य मंत्री इंदौर जिले के होने से तथा स्वास्थ्य शिक्षा के नाम पर चुनाव जीत कर आने वाले विधायक विशाल पटेल से उम्मीद है कि वह अब इस अस्पताल की दिशा व दशा सुधारने का प्रयास करेंगे। जब पत्रिका प्रतिनिधि से विधायक से बात की तो उन्होंने बताया कि पहली प्राथमिकता जो यहां से बाहर अटेच है काम बाहर करते है वेतन यहां लेते है तथा स्टाफ में यहां गिनती होती है उनका अटेचमेंट खत्म करवायेगे। चार डॉक्टरों को लाने के प्रयास चल रहे है साथ ही यहां के अस्पताल के बाहर की दशा पहले सुधारने तथा एक्सरे मशीन को शीघ्र ही चालू करवाने की बात की है।
अटेचमेंट-
1-डॉ सुनीता भटनागर इंदौर  जो कि कई वर्षों से इंदौर अटेच रही अब विगत समय तबादला करवा लिया।
2-डॉक्टर पीयूष दुबे पीजी करने के लिए इंदौर अटैच,
3-श्रीमती रितु वर्मा एएनएम उपस्वास्थ्य केंद्र कटकोदा से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हातोद अटेच।
4- श्रीमती माया वर्मा स्टाफ नर्स बेटमा से बाणगंगा इंदौर ।
5-श्रीमती मोनिका राठौड़ सीएचसी देपालपुर से सीएचसी बेटमा।
6-श्रीमती मधु इंगले लैब टेक्नीशियन सविंदा प्रसूति गृह नंदानगर  इंदौर 10 वर्षो से अटेच। जबकि अभी लेब टेक्नीशियन की जरूरत है।
7-आर के सोनकर सगणक मुख्य चिकित्सक स्वास्थ्य अधिकारी इंदौर के यहाँ अटेच।
8- कु-रानू मकवाना फार्मेसिस्ट सीएचसी पलासिया पार से सीएचसी बाणगंगा इंदौर अटेच ।
9 -संदीप गौड़ वार्ड ब्वॉय शासकीय टीबी हॉस्पिटल इंदौर अटैच।
10- जितेंद्र शिंदे वार्ड ब्वॉय देपालपुर से सीएचसी धन्नड़,अटेच तथा वार्ड ब्वॉय जगदीश प्रजापत तथा सुरेश चंद खत्री निलंबित चल रहे है।
इनका कहना- में अपने स्तर पर पूरा प्रयास करती हूं।डॉक्टर के लिए भी पत्र लिखा लेकिन कोई आता ही नही। वही स्टाफ की काफी कमी है।
डॉक्टर चन्द्रकला पंचोली ब्लाक मेडिकल ऑफिसर।
शीघ्र ही यहाँ स्टाफ व डॉक्टर होंगे। बाहरी मैदान भी सही होगा।सबसे पहले अटेचमेंट खत्म करवाने के लिए लिस्ट ले ली है।जिस पर कार्यवाही शुरू कर दी है।
विशाल पटेल विधायक देपालपुर।


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