धार~ स्कूल वाहन को टैंकर ने मारी टक्कर
एक छात्र की मौत चालक का इलाज जारी~~

( चेकिंग करने वाले सहायक उपनिरीक्षक की लापरवाही से हुआ हादसा )

धार (कपिल तिवारी)


सुरक्षा सप्ताह के चलते जंहा धार शहर में यातायात विभाग के पुलिसकर्मी अपनी सेवाएं देकर जनता को जागरूक करने में लगे हुए थे वंही दूसरी ओर अपनी अवैध कामाई करने के लिए यातायात विभाग में कार्यरत एक सहायक उपनिरीक्षक ने स्वयं स्वार्थ के कारण धार शहर के मुख्य हाइवे पर अपनी अवैध गतिविधि की दुकान लगा कर मासूमो की  जिंदगी से खिलवाड़ करने में  कोई कसर नही छोड़ी ।
बिना किसी वरिष्ठ अधिकारियो के आदेश के बावजूद चालानी कार्यवाही के लिए शहर में सहायक उपनिरीक्षक कैलाश पंसोरिया साहब मुख्यतया धार शहर को छोड़  हाइवे पर चेकिंग के नाम पर कार्यवाही करते नजर  आते है।


ट्रक,आयशर के कागजो के नाम पर अवैध रूप से उगाई करते आसानी से कई बार देखा जा चुका है।
सूत्रों के अनुसार आज सबेरे उक्त निरीक्षक के द्वारा अपने अधीनस्थ दो अन्य सहकर्मियों के सांथ वाहन चेकिंग चलाने लगे उक्त निरीक्षक के द्वारा वाहनों की चेकिंग जब चलाई जा रही थी।
चेकिंग के दौरान एक टेंकर ने चालानी कार्यवाही से बचने के लिए टेंकर को दूसरी लाइन पर डालकर निकालने की कोशिश की जिस कारण सामने से आते स्कूल वाहन से टकरा गया।
  टैंकर क्रमांक GJ/06/AX/2465 ने स्कूल वाहन क्रमांक MP/68/T/0194 को टक्कर मार दी अचानक हुए इस घटनाक्रम में उक्त स्कूली वाहन के चालक ओर बच्चे  दुर्घटना के शिकार हो गए।
उक्त घटनाक्रम से पूरा माहौल बिगाड़ दिया ताबड़तोड़ वंहा मौजूद लोगों द्वारा दुर्घटनाग्रस्त बच्चो को उपचार के लिए अलग अलग अस्पताल ले जाया गया जिसमे से चालक औऱ एक अन्य बालक को इंदौर रेफर किया गया जंहा सूत्रों द्वारा जानकारी अनुसार एक स्कूली छात्र की मौत हो गई वंही चालक का इलाज जारी है।


(सुरक्षा सप्ताह में जिम्मेदार अधिकारियों की मेहनत पर पानी फेर गए कैलाश पनसोरिया)

शहर की यातायात व्यवस्था राम वेसे तो रामभरोसे ही है कंही भी बेपरवाह खड़े वाहन यातायात व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते आसानी से देखे जा  सकते है कुछ समय से यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी इस कोशिश में लगे थे ताकि अव्यवस्थित यातायात  जो वर्षो से सड़को पर रेंग रहा था व्यवस्थित हो सके।
इसके लिए कुछ दिनों पहले ही शहर के मुख्य मार्ग त्रिमूर्ती नगर चौराहे पर ट्राफिक सिग्नल लगा कर जागरूक किया जाने लगा कुछ हद तक यातायात में नियमो के पालन के लिए कटिबद्ध यातायात प्रभारी की मेहनत रंग लाने लगी अचानक हुए इस हादसे ने उन सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों की मेहनत पर पानी फेर दिया जो रात-दिन मेहनत कर नियमो के तहत जिम्मेदारी का अहसास करवाने के लिए मेहनत कर रहे थे।


( हादसे के बाद अब घिरेंगे गरीब और कमजोर वाहन मालिक )

अधिकांश हादसों में देखा गया है कि जैसे ही कोई ऐसा हादसा होता है तो आनन फानन में छोटे और मेहनतकश  छोटे वाहन मालिकों पर प्रसाशन शिकंजा कसने लग जाता है जबकि उक्त हादसे के लिए वास्तविक कारणों का कन्हि कोई उल्लेख नही होता है बल्कि तुरंत ऐसे निर्णय इसलिये लिए जाते है ताकि जनता जो ऐसे मुद्दों पर उग्र ना हो जाये ताकि तुरंत लिए गए ऐसे निर्णय आग पर पानी डालने का काम करे।

लेकिन ऐसे मामलों में पानी डालने से अच्छा है कि इन हादसों से सबक लिया जाए कुछ जिम्मेदारी तय की जाए नाकी की सिर्फ खानापूर्ति कर पल्ला झाड़ लिया जाए

बड़े स्कूलों में लगभग बसों का का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन उक्त बसों का मासिक किराया बहुत ज्यादा होता है इसलिए परिजन अपने बच्चो को छोटे वाहन से भेजते है जिसका मासिक किराया भी कम होता है जो परिजनों आसानी से दे सकते है और इस बहाने जो मालिक बस नही खरीद सकते है वो छोटे वाहनों से अपना आजीविका चलाते है उनके सांथ ही परिजनों का खर्च भी कम हो जाता है।


( जिला अधिकारियों का स्कूल बसों के किराए पर कोई अंकुश नही)

  हादसे में कई बच्चो को चोट आई जैसे ही खबर शहर में फैली जिनके बच्चे स्कूल गए थे बदहवास होकर अस्पताल दौड़ने लगे लेकिन क्या जिम्मेदार अधिकारियो का ऐसे स्कूल जिनका मासिक बस  किराया बहुत है उन पर कोई कंट्रोल नही है जो परिजन हजारों रुपय सिर्फ अपने बच्चो के उज्ज्वल भविष्य के लिए खर्च करते है उस पर प्रायवेट स्कूल वाले कमीशनखोरी के चक्कर मे अपनी मर्जी से किराया लगाते है जिस पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कभी कोई जिम्मेदारी नही दिखाई।
प्रायवेट स्कूलों में परिजनों से मनमाफिक किराया वसूला जाता है कभी जिम्मेदार अधिकारियों ने जानने की कोशिश नही की, ना ही कभी बढ़ती स्कूल फीस पर कोई शिकंजा कसा है बस सहकारी कार्यलयों की कुर्सी तोड़ कर आराम फरमाना इनकी आदतों में शुमार हो गया है वंही परिजनों की मजबूरी है कि वो अपने बच्चो के उज्वल भविष्य के लिए प्रायवेट स्कूलों की मनमर्जी पर कोई शिकवा शिकायत नही करते तभी ऐसे इस प्रकार के हादसों का जन्म होता है


( शिक्षा अधिकारी को सभी स्कूलों को जारी करना चाहिए आदेश )

जिले के अधिकांश प्रायवेट स्कूलों में बड़ी बसें,छोटे स्कूली वाहनों को भरमार है अनेक स्कूलों में स्वयं कि बसें या छोटे वाहन है जिनसे बच्चो को लाने ले जाने का काम किया जाता है।
सभी स्कूलों को एक आदेश  जारी किया जाना चाहिए कि जिले में मौजूद सभी स्कूल अपने वाहनों के सभी दस्तावेज,चालक के दस्तावेज एवं स्कूल के द्वारा जारी किया गया अनुबंधित पत्र जो वाहन के लिए जारी हो प्रस्तुत करे
ताकि वाहनों के चालको के सांथ वाहन के फिटनेस की जांच हो सके क्यो की परिवहन विभाग तो सिर्फ खानापूर्ति कर  पल्ले झाड़ लेता है

(जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस की नही जनता की भी बराबरी की है)


उक्त मामले में देखा जाए तो चारों तरफ एकमात्र चर्चा है कि प्रशासन की नाकामी की वजह से यह हादसा हुआ लेकिन प्रशासन की जिम्मेदारी से बढ़कर एक जिम्मेदारी स्वयं जनता की भी होती है ताकि ऐसी दुर्घटना होने पर अपनी जिम्मेदारी समझ काम करे और नियमो के तहत काम करे

उक्त घटना के बाद  जनता सड़क पर आ गई और सड़क जाम कर दि गई काफी कोशिश और समझाने के बाद जाम खोला गया जब तक काफी बड़ी मात्रा में जाम लग चुका था।

उक्त घटना के बाद तत्काल यातायात विभाग के उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया गया
वहीं उनके साथ शामिल सहकर्मी को जांच करने के बाद कार्रवाई करने की बात कही लेकिन यहां देखा जाता है कि वास्तविकता में किसी अधिकारी के साथ रहने वाले कर्मचारी उनके दबाव में उनके साथ रहते हैं अगर कर्मचारी अधिकारी की भी ना सुने तो भी कार्यवाही होगी और अगर सुने तो ऐसी घटना के बाद भी कार्यवाही होगी तो ऐसे निचले कर्मचारी क्या करे।
गाज तो हमेशा ही छोटे कर्मचारियों पर ही गिरती है वही बड़े अधिकारी बच निकलते है।

( मासूम कन्हैया पटेल  की मौत की जिम्मेदार कौन)

उक्त दुर्घटना मैं घायल छात्र और चालक जो गंभीर रूप से घायल हुए थे प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें इंदौर रेफर किया गया था जिन जिसमें से इलाज के दौरान कन्हैया पिता मेहरबान पटेल की मौत हो गई।
यातायात अमला जो जगह जगह जगह पर चेकिंग के दौरान दो पहिया वाहन को हेलमेट लाइसेंस के नाम पर अघोषित रूप से डर आता रहता है या सड़क सुरक्षा सप्ताह के नाम पर यातायात विभाग के साथ शहर के कई थाने में मौजूद पुलिसकर्मी अपराधियो को छोड़ सिर्फ हेलमेट ओर लाइसेंस के नाम से चालानी कार्यवाही करती है।


किसे जिम्मेदार माना जाए कन्हैया की मौत का स्कूल प्रशासन या वाहन चालक या वह सहायक उपनिरीक्षक जो बिना किसी आदेश के स्वयं स्वार्थ के लिए बिना संसाधन की व्यवस्था करें चालन की कार्रवाई करने निकल गए और यह हादसा हो गया क्या उक्त यातायात उपनिरीक्षक की लापरवाही से या यूं कहें कि मनमर्जी से का की जाने वाली कार्रवाई से यह मौत हो गई तो क्या उक्त मौत का जिम्मेदार कैलाश होगा या नहीं ये तो वक्त की तलहटी में छुप गया लेकिन आज उस मासूम की जिंदगी चली गई मात्र अपने स्वार्थ के लिए कार्यवाही करने वाले गायब हो गए लेकिन क्या उक्त मासूम मृतक के परिवार पर सहायक उपनिरीक्षक कैलाश की लापरवाही भारी पड़ गई।
उस मासूम को बचपन से लेकर आज इतना बड़ा किया लाख कोशिश ओर परेशानी के जब बच्चा बड़ा होता है तब ऐसी होने वाली मौत पर घर वालो की हालत केसी होती है ये कौन समझेगा ,कोई नही बता सकता है सिर्फ कुछ दिनों तक दुर्घटना को लेकर आवाज उठेगी फिर वही दस्तूर शुरू हो जाएगा फिर किसी परिवार के चिराग की मौत पर दहलेगा शहर फिर वही कार्यवाही का दौर होगा।
हमे कार्यवाही के नाम पर सिर्फ निलंबन नही बल्कि इस भृष्ट तंत्र में शामिल लोगों पर प्रकरण दर्ज करना चाहिए ताकि ऐसी गलतियां दोबारा ना हो।

(बेपरवाह परिजनों है सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं के जिम्मेदार)

अधिकांश शहर में होने वाली दुर्घटना के जिम्मेदार शहर में मौजूद वो परिवार है जो अपने नाबालिक बच्चो को दोपहिया वाहन  देकर खुश होते है कि हमारा बच्चा गाड़ी चलाते है बल्कि दोपहिया वाहन देकर अपनी जिम्मेदारी से मुह मोड़ लेते है और ऐसी दुर्घटनाओं पर सीध इल्जाम प्रसाशन पर ढोलते है विगत कुछ समय से यातायात प्रभारी द्वारा लगातार नाबालिगो के वाहन पकड़ कर उनके परिजनों को बुलाकर समझाया जाता रहा है ताकि परिजनों को भी पता चले की उनकी अनदेखी से कोई दुर्घटना ना हो जाये लेकिन लाख प्रयास के बाद भी परिजनों के कानों पर जूं नही रेंगती और कुछ देर बाद ही सड़को पर नाबालिक वाहनों को तेज गति से चलाते दिखाई देने लगते है।
उक्त दुर्घटना के तुरंत बाद ही हमारे प्रतिनिधि ने स्कूलों के बाहर कुछ ऐसे दृश्यों को कैमरे में कैद किया है जिसमे नाबलिको के द्वारा एक दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी बैठा कर सफर करते देखा गया बल्कि कुछ परिजनों को खुद अपने बच्चो को स्कूल से लेजाते हुए देखा गया।

हम कहना चाहते है हर उस परिजन को जिनके बच्चे जिद करते है दोपहिया वाहनों की तो उनकी जिद पूरी ना करे क्यो की आपकी एक लापरवाही आपके बच्चे का जीवन खत्म कर सकती है वंही उन नाबालिग चालको की गलती से किसी अन्य को नुकसान हो जाये।
क्यो आप सतर्क रहेंगे तभी आप सुरक्षित रहेंगे


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