*मनावर~ अगामी लोकसभा चुनावों में बढ़चढ़कर भाग ले युवा शक्ति_जयस"*~~

निलेश जैन मनावर~~


जब तक आदिवासी समाज राजनीतिक रूप से ताकतवर नही बनेगा तब तक कभी भी हम अपने संवैधानिक अधिकार चाहे वह पांचवी अनुसूचि हो पैसा कानून हो या वनाधिकार कानून हो उन्हें हासिल नही कर सकते है । आज हमारे समाज मे राजनीतिक जागरूकता की कमी के कारण हजारो सालो से जंगलो में रहने वाले हमारे हजारो लाखो आदिवासी भाइयों  को उन्हें अपनी ही जमीन पर स्थाई पट्टे नही दिए गए है जबकि हजारो सालो से जंगलो में रहने वाले आदिवासियों को सुरक्षा और संरक्षण देने के लिए संविधान में पांचवी और छटवीं अनुसूचि बनाई गई हैं । डॉ . हिरालाल अलावा राष्ट्रीय जयस संरक्षक ने कहा कि वनाधिकार कानून बनाये गए लेकिन सारे कानून आज सिर्फ किताबो में ही लिखे रह रहे है उन कानूनों और प्रावधानो का धरताल पर आज तक इम्प्लीमेंटेशन नहीं हो पा रहा है
आज आदिवासी इलाको में आदिवासियों से जबरन उनकी ज़मीन छीनकर  कई मल्टीनेशनल कंपनियों काम कर रही है लेकिन उन कंपनियों में स्थानीय आदिवासियों को रोजगार देने की बजाय अन्य राज्यो से मजबूर लेकर उन्हें नोकरी दी जा रही है जबकि अपनी ही ज़मीन से विस्थापित आदिवासी आज कटोरा लेकर भीख मांगने की स्तथि में दर दर भटक रहे है ।आज देश मे बड़े बड़े बांध परियोजनाओं के कारण सबसे जायदा आदिवासी वर्ग विस्थापित हुआ है लेकिन उन्ही विस्थापितों को पर्याप्त पुर्नवास और रजोगार देने की बजाय दूसरे बड़े बड़े आमिर ठेकेदारों को मछली पालन और अन्य व्यवसाय के लिए ठेके दे दिए गए है जबकि विस्थापित आदिवासियों के  रोजगार और पुनर्वास के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नही किया गया है  और यह स्तथि सिर्फ  मध्यप्रदेस तक सीमित नही हैं यह स्तथि छत्तीसगढ़,झारखंड,उड़ीसा,महाराष्ट्र गुजरात जैसे सभी आदिवासी बाहुल्य राज्यो में एक जैसी है आज देश के आदिवासी इलाकों में नक्सलवाद के नाम पर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासी बच्चो, महिलाओं,युवाओ और बूड़ो को बंदूक की गोलियों से भून दिया जा रहा है जिसके कई उदाहरण झारखंड और छत्तीसगढ़ के जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के साथ हुवे बर्बरतापूर्ण अत्याचारो से मिल सकते है जबकि संविधान की पांचवी और छटवीं अनुसूचित क्षेत्रो में उन विशेष क्षेत्रो को आरक्षित क्षेत्र घोषित कर उन्हें विशेष सुरक्षा और संरक्षण दिया जाना चाहिए था लेकिन आज देश के आदिवासियों को सुरक्षा और संरक्षण देने की बजाय बंदूक की गोलियां दी जा रही है इसलिए देश के समस्त आदिवासी युवाओ से और साथ मे आखिर पंक्ति में खड़े सभी वर्गों से जयस विशेष रूप से अनुरोध करता है कि अपने अधिकारों के लिए अपने जल,जंगल और ज़मीन के लिए ,अपने अस्तित्व और अस्मिता के लिए हमे एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए साथ मे हमे राजनीतिक रूप से ताकतवर होने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए इसलिए देश के समस्त युवाओ से विशेष अनुरोध है आगामी लोककसभा चुनावों में बढ़चढ़कर हिस्सा ले और देश के आखिर पंक्ति में खड़े वर्ग की आवाज को बुलन्दी के साथ लोकसभा में पहुचाने के लिए बढ़ चढ़कर लोकसभा चुनावो में भाग लेना चाहिए ।


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