*बुरहानपुर~ अबोध मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने वाले आरोपी को  मृत्यु दण्ड की सज़ा एवं 24000 रूपये का जुर्माना*~~

बुरहानपुर (मेहलक़ा अंसारी) 


अबोध मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर देने के मामले में विशेष सत्र न्यायालय बुरहानपुर के विशेष न्यायाधीश (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012)  द्वारा आरोपी विजय उर्फ पिंटिया (35 साल )पिता माणिकराव प्रजापति, निवासी ग्राम मोहद, जिला बुरहानपुर को आज मृत्युदण्ड की सज़ा एवं 14000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया है । 
प्रकरण की विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए जिला अभियोजन अधिकारी/ विशेष लोक अभियोजक श्री कैलाशनाथ गौतम ने बताया कि 15-08-2018 को थाना शाहपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि मेरी लडकी जिसकी उम्र 3.5 वर्ष है वह नहीं दिख रही है। मैंने तथा मेरी मां ने साथ में आस-पास तलाश किया नहीं मिली। मंदिर मस्जिद पर माईक से आवाज़ भी लगवाई कोई पता नहीं चला। मुझे शंका है कि मेरी लडकी को कोई अज्ञात बदमाश बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया है। जिस पर थाना शाहपुर के अपराध 435/18 धारा 363 भादवि का प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया गया। दिनांक 18.08.2018 को सूचनाकर्ता ने पुलिस को सूचना दी कि दिनांक 15.08.2018 को 11.00 बजे मेरी पोती निवासी ग्राम मोहद को घर के सामने से कोई अज्ञात आरोपी अपहरण कर ले गया था, जिसकी लाश आज दिनांक 18.08.2018 के 09.30 बजे सुबह मोहद-बंभाडा रोड पर मोहद से करीब 1 से 1.5 किमी दूर चिंदया नाले के किनारे पर पड़ी मिली है। लाश में सड़न पड़ गई है एवं कीड़े पड़ गए हैं एवं लडकी का दाहिना हाथ नहीं है शव देखकर एवं शरीर में कमर व हाथ में बंधे काले धागे, चूड़ी , कान की एक बाली देखकर पहचाना। मेरी पोती का शव संदिग्ध अवस्था में पडा है। संदेह के आधार पर पुलिस द्वारा विजय उर्फ पिंटिया को गिरफ्तार कर जांच में लिया गया। प्रकरण में विवेचना थाना प्रभारी श्री गिरवर सिंह द्वारा की गयी। विवेचना पश्चात पुलिस विवेचक ने आरोपी के विरूद्ध 363, 376 (2)(आई)(एन) भादवि, एवं धारा 3/4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत चालान माननीय न्यायालय में पेश किया।
प्रकरण में सफलता पूर्वक पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी/ विशेष लोक अभियोजक श्री कैलाशनाथ गौतम द्वारा की गई। विचारण पश्चात माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को भादवि की धारा 363 में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, भादवि की धारा 366 में 10 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड ,भादवि की 376(2)(एम) में आजीवन कारावास एवं 2000 अर्थदण्ड, और धारा 5(1)(के)(एम)(आर) सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में आजीवन सश्रम कारावास एवं 2000 रूपये का अर्थदण्ड, भादवि की धारा 376(क)(ख) (दण्ड विधि संशोधन अध्यादेश 2018) के अपराध में धारा 42 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधान के अंतर्गत गुरूत्तरदण्ड मृत्युदण्ड एवं 2000 रूपये अर्थदण्ड साथ ही भादवि की धारा 302  के अपराध में भी मृत्युदण्ड और 2000 रूपये के अर्थदण्ड और भादवि की धारा के अपराध में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 रूपये के अर्थदण्ड से दंडित किया । समस्त सज़ाऐं एवं दण्ड एक साथ भुगताए जाने और आरोपी की मृत्यु हो जाये तब तक फांसी के फंदे पर लटकाए जाने  का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया।


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