देपालपुर~ महिला दिवस स्टोरीएक महिला कई कार्य~~

जो देखता है व सुनता है तो कह उठता मदर टेरेसा जैसा करती काम~~

विमल फौजी देपालपुर~~


देपालपुर- बेटी भी है बहन भी है मां भी है समाज सेविका भी है और एक कुशल राजनीतिज्ञ भी आखिर एक साथ इतना सब कुछ होना किस के बस में है और उसका एक ही उदाहरण है और वह है एक महिला जी हां एक ऐसी महिला जो हर रूप में हर स्वरूप में परिपूर्ण है विश्व महिला दिवस पर हम बात कर रहे हैं एक ऐसी महिला की जिसने ना सिर्फ परिवार को बल्कि समूचे समाज को अपना परिवार माना और इतना ही नहीं उनके इस कार्य मे परिवार से जानवर तक अछूते नहीं है जिसका जीता जागता उदाहरण देखने को मिलता है देपालपुर के नजदीक बेटमा नगर में रहने वाली मिसेस सुनैना बियानी में। जो कि एक अच्छी बेटी बहन और पत्नी के साथ मां तो है ही लेकिन यह महिला सिर्फ अपने बच्चों की ही मां नहीं बल्कि बेजुबान बेबस आवारा जानवरों की भी मां के रूप में नजर आती है इतना ही नहीं कुछ लोग तो इन्हें इनकी इस सेवा को देख कर मदर टेरेसा भी कहते हैं पिछले कई सालों से क्षेत्र में सेवा का संकल्प लेकर मिसेस बियानी ने समाज सेवा का एक अलख जगा रखा है वह सिर्फ इंसान मात्र नहीं बल्कि हर जीव के लिए एक सेविका के रूप में सदैव तत्पर रहती है चाहे वह बेजुबान कुत्ते ही क्यों ना हो अगर उन्हें खबर मिलती है या राह पर कहीं कोई पीड़ित लाचार पशु या कुत्ते दिखाई देते हैं तो वे अपनी गाड़ी में बैठा कर उन्हें अपने बच्चे के समान तो कर घर ले आती है और फिर उसके छोटे से लेकर बड़े तक पूरा उपचार का दौर शुरु कर देती है चाहे उसके लिए उन्हें उनके निज निवास से कोसों दूर वेटनरी दवा खानों में क्यों न जाना पड़े चाहे उसके लिए मोटी रकम क्यों ना खर्च करना पड़े फिर भी वे बिना किसी सोच के बस एक ही लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ती है सेवा सेवा और सिर्फ सेवा और उसी को लेकर भी जूट जाती है। विगत दिनों देपालपुर सामाजिक कार्यक्रम में आई सुनैना बियानी से हमारे प्रतिनिधि ने सीधी चर्चा की तो उन्होंने विस्तार से पूरी बात बताई।


धर्म की बहन -प्रतिवर्ष निभाती है बहनों का फर्ज  छोटे से नगर की यह बहू ना सिर्फ अपने भाइयों की बहन है बल्कि समूचे क्षेत्र के युवा और पुरुषों की बहन की तरह नजर आती है क्योंकि वह प्रतिवर्ष राखी पर अपना फर्ज निभाना नहीं भूलती और चाहे जेल हो या निजी कार्यक्रम रक्षाबंधन का कार्यक्रम आयोजित कर अपने महिला ग्रुप को लेकर हाथों में मिठाई के डिब्बे लेकर रक्षा बंधन की डोर लेकर निकल पड़ती है और जेल के सभी कैदियों को भाई मानकर उन्हें राखी बांधी है इतना ही नहीं उनके लिए एक से बढ़कर एक मिठाई ले जाती है मिठाई खिलाकर उनका यह प्रेम देखने लायक ही होता है क्योंकि उनका यह प्रेम एक सगे भाई और बहन की तरह नजर आता है जब वे कैदियों को राखी बांधती है तो कैदियों की भी आंखों से आंसू छलक ने लगते हैं और वह रक्षा सूत्र बंधाते हुए यह वादा करते हैं कि मैं दोबारा कोई गलत काम नहीं करूंगा और आप जैसी बहनों के लिए सदैव जनता की सेवा कार्य करूंगा

धार्मिक आयोजनों में भी आगे - महिला अपने भीतर सभी रूपों को समाहित करती है इसका जीता जागता उदाहरण  मिसेस सुनैना बियानी में नजर आता है क्योंकि वह सामाजिक कार्य तो करती ही है साथ ही क्षेत्र में कोई भी धार्मिक आयोजन हो उसमें पीछे नहीं हटती बल्कि अपने साथियों के साथ उस कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है चाहे फिर उसमें आर्थिक सहयोग की बात हो या जन सहयोग की वह अपनी टीम के साथ मैदान में उतर जाती है और कई आयोजन भी करती है ।
राधा अष्टमी पर प्रदेश की पहली भव्य शोभायात्रा स्वयं अपने खर्चे पर नगर में निकालती है जिसमें अपार जनसमूह देखने को मिलता है साथ ही एक से बढ़कर एक रंगारंग झांकियां भी देखने को मिलती है

देश प्रेम का जज्बा -दीपावली पर भारत का नक्शा बनाकर दीपोत्सव का आयोजन करती है
चाहे बात धर्म की हो या समाज की वहीं मिसेस बियानी राष्ट्रहित में भी पीछे नहीं हटती और दीपावली पर हर कोई रोशनी करता है दीपोत्सव मनाता है लेकिन मिसेस बियानी आम जनता के साथ मिलकर इस पर्व को राष्ट्र पर्व के रूप में मनाती है और भारत का नक्शा बनाकर एक दिया देश के नाम का नारा लेकर दीपोत्सव मनाती है।

महिलाओ की टीम-वूमंस क्लब के माध्यम से करती है समाज सेवा वे एक कुशल समाज सेविका के रूप में जानी जाती है उनका एक वुमन क्लब भी है जिसमें उनके साथ कई महिलाएं सदस्य हैं जिसके माध्यम से वे क्षेत्र में कई समाज सेवा के कार्य करती है साथ ही स्वरोजगार को लेकर केरियर काउंसलिंग का आयोजन भी समय-समय पर कराती है ताकि क्षेत्र के युवक युवती केरियर काउंसलिंग में अपना केरियर चुनकर स्व रोजगार प्राप्त कर सकें इसके साथ साथ कला और संस्कृति के कार्यक्रमों का भी आयोजन करती है जिसमें क्षेत्र के छोटे-छोटे बच्चों में छुपी हुई कलाओं को मंच मिल सके चाहे गीत संगीत की बात हो या   खेल कि उन्हें मिसेस बियानी मंच प्रदान करती है।

नफरत को प्यार में बदला - बियानी के पति करते थे नफरत लेकिन अब उनके कार्यों से हुआ लगाव । बियानी के पति तरुण बियानी उनके पशु प्रेम से पहले काफी नफरत करते थे उनकी सोच थी कि जिन पशु या कुत्तों को वह घर लाती है और जिस तरह उनका लालन-पालन करती है उन्हें उस से चिढ़ आती थी क्योकि घर मे गन्दगी होती थी लेकिन जब उन्होंने उनके इस पशु प्रेम को देखा और जब जब उन्हें ठीक होते देखा तो उनमें भी नए विचारों का आगमन हुआ और उनमें भी पशु प्रेम जागने लगा और अब वे अपनी पत्नी के इन कार्यों से बेहद खुश हैं और वह भी अपना पूरा सहयोग उनके इस कार्य में देते हैं इतना ही नहीं अपनी पत्नी से प्रभावित  होकर अब वह भी समाज सेवा के कार्य में जुट गए हैं और कई मंचों के माध्यम से क्षेत्र की जनता के लिए समाज सेवा करते हैं

-जब इलाज के लिए लाए गए किसी कुत्ते के बच्चे या पशु की मां की मौत हो जाती है तो उसे मिसेस बियानी अपने बच्चों के सामान बोतल से दूध पिलाती है जिसका ममतामई नजारा बेहद देखने लायक होता है इतना ही नहीं जब किसी पशु या कुत्ते की मौत नजदीक होती है तो उसे देख कर मिसेस बियानी उसके पास बैठ कर उसे भक्ति गीत सुनाती है ताकि अंतिम दौर में भक्ति करने से उन्हें श्री चरणों में जगह मिले और मोक्ष प्राप्त हो सके इतना ही नहीं मरने के बाद उस मुख बधिर जानवर को दफनाती भी है।
मिसेज बियानी की 14 वर्षीय बेटी की उम्र तो अभी छोटी है लेकिन उनके भी ख्वाब उनकी मां के समान बड़े हैं वह भी उनकी मां के इस काम मे सहयोगी बनकर अपना सहयोग करती है और हाथ बटाती है खासकर उन्हें भी अपनी मां के समान पशु प्रेम है और जब उनकी मां कहीं बाहर होती है तो घर में इलाज के लिए लाए गए मुख बधिर पशु या कुत्तों का रख-रखाव और ध्यान वही रखती है उनका कहना है कि उन्हें यह करना बहुत अच्छा लगता है और उन्हें यह प्रेरणा उनकी मां से ही मिली है ।
प्रियांसा बियाणी बेटी।

समाजसेवा की एक जीती जागती मिशाल है वे कोई भी पीड़ित हो या कोई भी समाज व सांस्कृतिक आयोजन हो उसमे निःस्वार्थ भाव से सेवा करती है।इनकी सेवा भाव को देखते हुवे ऐसा लगता है कि यह हमारी मदर टेरेसा है।

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