इंदौर~ नेशनल यूनानी वर्कशॉप में बोले विशेषज्ञ~~

यूनानी चिकित्सा में मर्ज़ का सटीक इलाज~

इंदौर ।यूनानी साइंस से रूबरू करवाने के मकसद से देश के बड़े जानकार इंदौर आए,उन्होंने यूनानी मेडिकल से जुड़ी जानकारी तो दी साथ ही यूनानी चिकित्सा आज के लिए कितनी अहम ज़रूरत है और वर्तमान लाइफ स्टाइल से बढ़ती बीमारियों की रोकथाम के लिए कितनी कारगर है पर चर्चा की।तैय्यबी दवाखाना  और  यूनानी मेडिकल प्रैक्टिशनर वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में बायपास स्थित अम्बर कन्वेंशन पर नेशनल यूनानी वर्कशॉप में जड़ी बूटियों के इलाज के फायदे बताये गए।तैय्यबी दवाखाना के निदेशक अशफ़ाक़ तैय्यबी,शोएब तैय्यबी,आमिर तैय्यबी और यूनानी मेडिकल प्रेक्टिशनर वेलफेयर सोसायटी  के अध्यक्ष डॉ.ए. ख़ालिद ने जानकारी देते हुए बताया इस वर्कशॉप में केरल,बैंगलोर, पुणे से यूनानी के बड़े जानकर के व्याख्यान हुए।बतौर ख़ास मेहमान मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट और तैय्यबी दवाखाना के डॉयरेक्टर इब्राहिम तैय्यबी ने शिरकत की।स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने यूनानी डॉक्टरों से कहा कि आपका ये पेशा बड़ी ख़िदमत वाला है, उन्होंने कहा मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि जिला अस्पताल,स्वास्थ्य केंद्र व सरकारी डिस्पेंसरी पर इलाज के लिए वह व्यक्ति यहां आता है जो पीड़ित होता है, गरीबी से जूझ रहा है, जब समाज का वह व्यक्ति आपके पास इलाज के लिए आये तो उनका सम्मानपूर्वक इलाज करना,उनकी सेवा करना मतलब बड़ी इबादत करना है। वर्कशाप में केरल से डॉ. के.टी.अजमल जीवन शैली से जुड़ी हुई बीमारियों के उपचार से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।उन्होंने कहा यूनानी इलाज में कोई कन्फ्यूजन नहीं है इसमें बिल्कुल परफेक्ट व सटीक इलाज है।उन्होंने कहा आज कल डाक्टर सिर्फ मरीज़ों को दवा दे रहे हैं, बीमारी पर तहक़ीक़ व रिसर्च नहीं कर रहे हैं।बगैर तहक़ीक़ व रिसर्च के मरीज को बोलते हैं लाइट भोजन करो,फ़ास्ट फ़ूड मत खाओ,लेकिन जो डॉक्टर अध्ययन कर रहे हैं, रिसर्च करते हैं तो वो मरीज़ों से कहते हैं कि ये खाया करो इसमें ओमेगा 3 है, इससे कोलेस्ट्रॉल कम होगा,इसमें आयरन है या केल्शियम है।उन्होंने बताया डॉक्टर रिसर्च से दूर जा रहे हैं, तभी मरीज़ की ठीक बीमारी पता नहीं चलती।बेंगलोर से यूनानी चिकित्सा के जानकार डॉ. अब्दुल नासिर को सुनना भी ज्ञानवर्धक रहा।उन्होंने न्यूरो पुनर्वास के बारे में विस्तार से समझाया।पुणे की डॉ. गज़ाला मुल्ला पहले भी इंदौर आ चुकी हैं, हिजामा तकनीक की बड़ी एक्सपर्ट हैं,गज़ाला मुल्ला ने हिजामा की बारीकियों और उसके कारगर नतीजों से रूबरू करवाया।गज़ाला हिजामा पर रिसर्च कर रही हैं।उन्होंने बताया हिजामा थेरेपी यूनानी साइंस की सबसे पुरानी पद्घति है। समय के साथ-साथ हम इस पद्घति को भूलते चले गए। अब पूरी दुनिया में ये लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इसके नतीजे बहुत असरदार और बेहतर आ रहे हैं।
ने कहा कि यूनानी सस्ती, सुलभ व आम जनता तक आसानी से पहुंचने वाली चिकित्सा पद्धति है।
उन्होंने ने इनक्यूरिबल डिसीज (लाईलाज बीमारियों)के कारण और उपचार पर विस्तार पूर्वक चर्चा की।तैय्यबी दवाखाना के आमिर तैय्यबी ने यूनानी के प्रचार प्रसार एवं विकास के लिए मार्ग दर्शन दिया।उन्होंने बताया कि ये गर्व की बात है कि तैय्यबी दवाखाना 204 वर्षों से यूनानी चिकित्सा में न सिर्फ योगदान दे रहा बल्कि पूरा परिवार इसके प्रति समर्पित है।डॉ. ए. ख़ालिद ने कहा कि असाध्य रोगों को यूनानी पैथी द्वारा आसानी से ठीक किया जा सकता है।उन्होंने  असाध्य रोगों के बारे में बताया।उन्होंने बताया कि हिजामा थेरेपी से सिर्फ 45 मिनट में कैसा भी और कितना पुराना दर्द हो वो कम हो जाता है और मरीज़ को राहत महसूस होती है।
इस अवसर पर यूनानी मेडिकल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को अवार्ड देकर से सम्मान से नवाज़ा गया।यूनानी प्रेक्टिशनर वेलफेयर सोसायटी द्वारा तैय्यबी दवाखाना के हकीम इब्राहिम तैय्यबी को लाइफ टाइम अचीवमेंट आवर्ड से नवाज़ा गया।इस वर्कशॉप में यूनानी पैथी से इलाज करने वाले डॉक्टर शामिल हुए।डॉ. एस.एच.ज़ैदी,डॉ. शाहनवाज़,डॉ. अयाज़ खान,डॉ. जावेद अहमद ने वर्कशॉप में विशेष व्यवस्था संभाली।वर्कशाप का बेहतरीन संचालन डॉ. ए. ख़ालिद ने किया,आभार अशफ़ाक़ तैय्यबी ने माना।


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