* मनावर ~ धार जिले के मनावर में भगोरिया पर्व लोक गीत,संगीत,नृत्य और प्रकृति की सौंदर्यता के सात हुई शुरुआत* ~~                             

*विधायक डाँ हीरालाल अलावा एवं काग्रेस नेता शिवराम पाटीदार मादल की थाप पर थरकते नजर आये* ~~ 

*जनपद अध्यक्ष योगेन्द्रसिंह मुवेल ने मंच लगाकर किया स्वागत*~~       

निलेश जैन मनावर ~~


धार, झाबुआ, आलीराजपूर, के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में नृत्य ,संगीत ,लोक गायन ,एक जैसे ड्रेस कोड वाले सुन्दर परिधान,चांदी के सुन्दर पहनावे के साथ धूमधाम से भगोरिया पर्व मनाया जाता है। भगोरिया पर लगने वाले हाट -बाजार मेले का रूप ले लेते है । मेले में अपनी जरुरत की वस्तुएं खरीदते है । आप 15 मार्च शुक्रवार को भगोरिया पर्व नगर के थाने परिषर में मनाया गया । सभी राजनीति पार्टी काग्रेस, भाजपा, जयस द्वारा स्वागत मंच लगाया गया था। मनावर विधायक डाँ हीरालाल अलावा, काग्रेस नेता शिवराम पाटीदार, केदार पाटीदार के साथ मादल की थाप पर थरकते नजर आये । साथ ही भाजपा की ओर से जनपद अध्यक्ष योगेन्द्रसिंह मुवेल एवं  काग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता निरंजन डावर, ओम सोंलकि, महेन्दसिंह पिपरीमान , रवीन्द्र पाटीदार, तथा राजूखेड़ी मंच पर नारायण जौहरी, अखिलेश कुशवाह सहीत कई नेता मोजूद थे । आज बाजार में शंकर से बने कागन , हार की ब्रिकी भी जोरों पर रही । भगोरिया पर्व होली जलने के लगभग एक सप्ताह पूर्व से मनाया जाता है। भगोरिया के पश्चात लगने वाले हाट-बाजार को उजाड़िया बाजार भी कहा जाता है ।बांसुरी , घुंघरू , मांदल ,बहुत बड़े आकर का मादल ,थाली ,छतरी , रुमाल आदि को लेकर नृत्य किया जाता है । फागुन मौसम छटा बिखेरकर पर्व को दर्शनीयता प्रदान करता है। भगोरिया पर्व आते ही वासन्तिक छटा मन को मोह लेती है वही इस पर्व की पूर्व तैयारी करने से ढोल ,बांसुरी की धुनों की मिठास पूर्व से ही कानों मे मिश्री घोल देती है व उमंगो में एक नई ऊर्जा भरती है । दूरस्थ गाँव के रहने वाले समीप भरे जाने वाले हाट (विशेष कर पूर्व से निर्धारित लगने वाले भगोरिया) मे सज-धज के जाते है। युवक-युवतिया झुंड बनाकर पैदल भी जाते है। ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले मार्गो पर भगोरिया मे जाने वालो का अभिवादन कर रहे हो ,फागुन माह में आम के वृक्षों पर नए मोर और पहाड़ो पर खिले टेसू का ऐसा सुन्दर नजारा होता है मानों प्रकृति ने अपना अनमोल खजाना खोल दिया हो ।

 इस त्यौहार को देखने देश ही नहीं विदेशों से भी इस पर्व को देखने विदेशी लोग कई क्षेत्रों में आते है । लोक संस्कृति के पारम्परिक लोक गीतों को गाया जाकर माहौल मे एक लोक संस्कृति का बेहतर वातावरण देखने को मिलता है। भगोरिया उत्सव के दौरान लोक संगीत हेतु बड़े आकार का विशेष प्रकार का मादल नृत्य घेरे के मध्य खड़े होकर लोक संगीत बजाया जाता है। लोक संगीत से जुड़े बड़े आकार के वाद्य यंत्रों का महत्व आज तक बरक़रार है । लोक संगीत , लोक गीतों लोक नृत्य, लोक गायन ,लोक कला कृति आदि के उपासकों द्धारा इन्हें संजोए रखने का कार्य प्रशंसनीय तो है ही साथी भावी पीढ़ी को इनकी विशेषता से परिचित भी करवाता है। भगोरिया नृत्य टीम को सम्मानित किया जाता है ।


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