बैतूल~ आजीविका मिशन के समूहों की महिलाएं बनी आत्मनिर्भर~~

सचिन शुक्ला बैतूल~~


शाहपुर -महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो कार्य किया जा रहा है, उसी का परिणाम है कि आजीविका मिशन के समूहों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अपने पैरो पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बनी है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत अंतर्गत रोजगार कर महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं, अपने  परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।  स्व सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं अब पूर्णत: आत्मनिर्भर हैं।  महिलाओं ने आत्मनिर्भर होने के लिए स्व सहायता समूह का गठन कर गांव की अन्य महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। समूह से जुड़ी महिलाएं   परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
महिला संगठनों को राज्य शासन द्वारा निशुल्क शाला गणवेश बनाने का कार्य सौंपा था । गणवेश बनाने के कार्य में महिलाएं दक्ष हो चुकी हैं।
समूह में शामिल महिलाओं को पूर्व में आजीविका मिशन ने सिलाई का प्रशिक्षण दिया। ग्राम पावरझंडा समूह की संगीता कुमरे ग्राम भयावाडी  की किरण साकरे ने बताया शाला गणवेश की कमाई से हम अाधुनिक मशीनें खरीदकर खुद का आजीविका ब्रांड से कपड़े सिलाई कार्य करेंगे और निजी स्कूल की गणवेश  बनाएंगे ।
शाहपुर ब्लॉक के अधिकारियों की कोशिशें रंग लाई और घरेलू कामकाजी महिलाओं को स्व सहायता समूह के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का जो बीड़ा उन्होंने उठाया वो सफल हुआ । कभी घर की चार दीवारी में तंगहाली से गुजरने वाली महिलाएं अब खुद ही दूसरों की जरूरतों को पूरा करती हैं । आज वे इस काबिल है कि दूसरों को रोजगार दे रही हैं।
ब्लाक महिलाओं ने असंभव को संभव कर दिखाया है। जो महिलाएं कभी सिर्फ घर के काम करके पति या अन्य़ सदस्यों की कमाई पर निर्भर रहती थी।आज खुद के हुनर के दम पर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं मध्यप्रदेश आजीविका मिशन के माध्यम से संचालित होने वाली स्वसहायता समूह चला रही हैं।आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं अगरबत्ती बनाना, कपड़े सिलना और सेनेटरी नेपकिन का निर्माण कार्य बड़ी कुशलता से कर रही हैं। ये महिलाएं अपनी मेहनत से अच्छी कमाई भी कर रही हैं। स्कूली बच्चों की यूनिफॉर्म बनाने से लेकर पहुंचाने तक का काम इन समूहों को माध्यम से होता है।


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