इंदौर~ फिर छिड़ी बात पुरानी यादों की ~~

इंदौर (ताहिर कमाल सिद्दीकी)

।प्रेस क्लब में बीती शाम बहुत खुशनुमा एहसास लिए हुई थी।"फिर छिडी बात पुरानी यादों की" ग्रुप द्वारा याद किया दिल ने कहां हो शीर्षक से  पुराने सदाबहार गीतों की बेला प्रेस क्लब हाॅल में दी गई।कार्यक्रम के प्रारम्भ में न केवल पुलवामा के शहीदों को श्रद्धाजंलि दी गई।रंजन सर ने देश सेवा की शपथ दिलाई।साथ ही सैनिकों के सम्मान स्वरूप भूतपूर्व वायु सैनिक सार्जेंट भारतेन्द्र लाम्भाते को सम्मान से भी नवाजा।सदाबहार नग़मों की इस महफ़िल में 60 से 80 के एक से बढ़कर नगमे सुनने को मिले। महफ़िल का आगाज़ का मोती सरगम गीत "सा रे गा मा" से कई गई ।जिसे राकेश मालवीय और अशोक जैन ने आवाज़ दी। उभरती गायिका सुरभि रावत ने "तू क्या जाने", "मोहब्बत ऐसी धडकन हैं", और शोख नजर की बिजलियाँ" से अपनी आवाज का तार्रुफ़ करवाया। सेंधवा से आये कलाकार अनिल मांडगे ने" जब दीप जले आना",  "मुहब्बत के सुहाने दिन,"  "एक हसीं शाम को" और कुशल शर्मा ने "तू ही वो हसीन है", तथा " नजर न लग जाये" जैसे सदाबहार नग़मों को खूबसूरती से पेश किया। भारती होलकर ने "लग जा गले, "तुम्हीं मेरे मंदीर " " मैं तो तुम संग", राकेश मालवीय ने  "सच्चाई छुप नहीं सकती", और "मेरे दिल ने तडप के", तथा नीलेश बुटे ने "फूलों के रंग से, और मेरा मन प्यासा" को लाजवाब अंदाज़ से पेश कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। अशोक जैन ने" बम चिक चिक बम" तथा "तिकडमबाज" जैसे गीत गाकर किशोर कुमार के पुराने समय की याद दिलाई। डॉ. गंगे ने "दोनों ने किया था प्यार" और " ओ जिन्दगी के देने वाले"  गीतों की प्रस्तुति के साथ ऋतिका जैन के साथ बेहतरीन  मंच संचालन भी  किया। युगल गीतों में "अरे यार मेरी", नीलेश - भारती,
" शोखियों मे घोला जाये"
अशोक - भारती, "गुम है किसी के प्यार में " राकेश - भारती,  "ये रातें ये मौसम" कुशल - भारती, "याद किया तुमने" डॉ. गंगे - भारती।
तथा सुरभि के साथ "मेहबूब मेरे" (अनिल),  "भली भली सी एक सुरत" (अशोक), शीर्षक गीत" परबत के उस पार" (कुशल), "तुम रुठी रहो" (डाॅ गंगे), और  "आँखों मे क्या जी" (नीलेश) ने प्रस्तुत किये। दीपेश जैन और टीम का संगीत निर्देशन रहा।सलीके के साथ सँवरी शाम में दिलकश फरेब आवाज़ से सजी महफ़िल सुनकर अच्छा लगा।


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