इंदौर~ ग्रीन पार्क में बरकाते सादात कॉन्फ्रेंस 14 अप्रैल को~~

इंदौर।बरकाते सादात एजूकेशनल सोसायटी द्वारा बरकाते सादात कॉन्फ्रेंस 14 अप्रैल रात 9 बजे धार रोड स्थित ग्रीनपार्क कॉलोनी पर आयोजित की जाएगी। सोसायटी के अध्यक्ष क़ारी सैयद इख्तियार अली ने बताया कि कांफ्रेंस में बच्चों की तालीम और परवरिश पर बात होगी।क़ुरआन हिफ़्ज़ (कंठस्थ) करने वाले 19 बच्चों की दस्तारबंदी कर उन्हें इनाम दिए जाएंगे और सम्मान से भी नवाजा जाएगा।इन बच्चों में 11 साल के मोहम्मद अली नवाज़ द्वारा क़ुरआन हिफ़्ज़ (कंठस्थ)करने पर दस्तारबंदी की जाएगी। बरेली से मौलाना जमाल रज़ा क़ादरी,सूरत से मौलाना गुलज़ार अहमद,नागपुर से मुफ़्ती मुज्तबा शरीफ खान, साउथ अफ्रीका से मौलाना फैज़ अहमद रजा साहब,झारखंड से मौलाना तबीब आलम,मुफ्ती-ए-शहर सैयद साबिर अली मिस्बाही साहब की तकरीर होगी। तकरीर में कुरआन का पैगाम सुनाया जाएगा और बताया जाएगा कि क़ुरआन में इल्म हासिल करने पर कितना ज़ोर दिया गया है।मुस्लिम समाज में शिक्षा जैसे मुद्दों पर मंथन भी किया जाएगा।इस मौके पर दारुल उलूम बरकाते सादात ग्रीन पार्क शाखा का उद्घाटन मौलाना जमाल रज़ा साहब के हाथों किया जाएगा।सागौर के मुफ़्ती क़ाज़ी नजमुद्दीन अमजदी को मुफ़्ती बनने पर उनकी दस्तारबन्दी कर इस्तक़बाल भी किया जाएगा।शहर के उलेमा और हाफ़िज़ साहेबान इस जलसे में शिरकत करेंगे।

दोपहर में होगा महिलाओं का जलसा

बरकाते सादात एजूकेशनल सोसायटी द्वारा संचालित लड़कियों का मदरसा जामियातुस सुगरा कुललियतुल बनात द्वारा ग्रीन पार्क कॉलोनी पर 14 अप्रैल को दोपहर 2 से शाम 7 बजे तक महिलाओं का जलसा होगा।जिसमें जश्ने रिदा पोशी व खत्मे बुखारी का भी आयोजन होगा।औरतों के जलसे में राजस्थान की आलिमा शाहीना फातिमा और आलिमा रिज़वाना आरिफा की तक़रीर होगी।महिलाओं के जलसे के तमाम इंतेज़ाम महिलाएं ही संभालेंगी।

11 साल के इस होनहार को मुंहज़बानी याद है पूरी क़ुरआन

बच्चों की जो उम्र खेल कूद की होती है उस उम्र में इंदौर के बम्बई बाज़ार इलाके के एक बच्चे ने पूरा क़ुरआन हिफ़्ज़ (कंठस्थ) कर मिसाल कायम की हो।इस तरह मोहम्मद अली नवाज़ ने अपने ख़ानदान और बम्बई बाजार इलाके का भी नाम रोशन किया है।महज़ 11 साल के मोहम्मद अली नवाज़  को हाफिज की सनद दी जाएगी।मोहम्मद अली नवाज़ के वालिद फेब्रिकेशन का काम करते हैं और आज अपने आपका बड़ा खुशनसीब और दौलतमंद महसूस कर रहे हैं कि उनके बच्चे ने सर फ़ख्र से ऊंचा कर दिया है।दारुल उलूम बरकाते सादात के इस तालिबे इल्म ने बता दिया कि इंसान कोशिश करे तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। मदरसा बरकाते सादात शहर का बड़ा इल्मी गहवारा है,सैकड़ों बच्चों को यहाँ इल्म की रोशनी मिल रही है। दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम भी दी जा रही है।ज्यादातर बच्चे हाफिज की सनद हासिल करने की पढ़ाई कर रहे हैं।इन ही बच्चों में से मोहम्मद अली नवाज़ के क़ुरआन हिफ़्ज़ होने की सबसे ज़्यादा खुशी मुफ़्ती सैयद साबिर अली मिस्बाही साहब और हाफिज सैयद इख्तियार अली को भी है,जिनकी मेहनत से ही ये मरकज़ आज मालवा में अपनी पहचान बना चुका है। मदरसे में पढ़ाने वाले उस्ताद हाफ़िज़ सिद्दीक़ ख़ान साहब के मुताबिक ऐसे बहुत कम बच्चे है जिन्हें इतनी कम उम्र में कुरान हिफ़्ज़ हो पाता है,मोहम्मद अली ने 2 साल पहले हिफ़्ज़ करना शुरू किया था,दो साल के अरसे में बच्चे ने पूरा क़ुरआन याद कर लिया है और आज बगैर देखे पूरा क़ुरआन सुना देता है।अमूमन कई बच्चों को इसमें 4 से 5 साल तक लग जाते हैं।


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