दसाई~~खबरें बनी जन चर्चा का विषय, अस्पताल में पहुंचाए रुपैया~~

जगदीश चौधरी (खिलेडी)9617174241~~


खबर का असर बैंक ऑफ महाराष्ट्र की दसाई शाखा मैं ग्राहकों के साथ हुए विवादों को लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अखबारों में जिस तरह से समाचार सुर्खियों में रहे उसकी गांव के गली चौराहे और चाय पान की दुकान पर चर्चा सुनाई दी 

बुधवार को बसंताबाई लोढ़ा के खाते से राशि निकालने के बाद बैंक ने रुपैया जहां उनका उपचार हो रहा था उस हॉस्पिटल में जाकर  खाताधारक को पहुंचाया। मामले को जनता तक पहुंचाने पर पीड़ितों ने .
मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया है।

काफी लंबे समय से बैंक ऑफ महाराष्ट्र की स्थानीय शाखा में ग्राहकों की छोटी मोटी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खाताधारक तो अपनी समस्या को ठीक से बता भी नहीं पा रहे थे।बैंक द्वारा एक ही लाइन में जवाब दे दिए जाने से लोग उल्टे पैरों घरों को लौट जाते थे ठीक से सामने खड़े होकर उन्हें बात करना जो नहीं आता एक सप्ताह में 2 प्रकरणों पर बवाल मचने के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अखबारों में बैंक कर्मी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुई तो रही सही कसर पूरी हो गई. जो लोग सामने खड़े होकर अपनी समस्या नहीं रख सकते उनके मन की हो गई और वे लोग मीडिया की तत्परता को सराहने लगे।

बड़ी संख्या में जो लोग अन्य बैंकों से जुड़े हैं उनका कहना है कि बैक को कायदे कानून केवल ग्राहकों के लिए ही नहीं थोपना चाहिए उन्हें कर्मचारियों को अपने कर्तव्य भी याद दिलाना चाहिए जिसके लिए उन्हें नौकरियां दी गई है .खबरों की सुर्खियों पर लोगों का कहना था कि यह गतिविधियां काफी समय से चल रही थी फिर देर से सही मगर दुरुस्त कदम उठाया गया है इससे भोले भाले और अनजान लोगों को बैंक में जाकर आत्म विश्वास से खड़े होने का मौका मिलेगा।


रीजनल ऑफिस एवं 181 पर शिकायत करने के बाद जब यह मामला मीडिया में एवं अखबारों में प्रमुखता से आया तो बुधवार को बैंक शाखा द्वारा बसंताबाई के खाते से ₹10000 निकालकर जहां उनका इलाज हो रहा था उस चिकित्सालय में जाकर उन्हें राशि दी गई। बैंक द्वारा मरीज खातेदार को खुद राशि भिजवाने से एक बात स्पष्ट हो गई है की बैंक द्वारा खातेदार को बिना वजह डेढ़ महीने से परेशान किया जा रहा था और यह बात समझ से परे है कि आखिर भुगतान किस वजह से रोका गया और खातेदार को बिना वजह क्यों परेशान किया गया ? पेमेंट क्यों रोका गया था  जब यह जानने के लिए मीडिया कर्मी बैंक पहुंचे  तो ब्रांच मैनेजर  नदारद थे विभिन्न चैनलों और अखबारों में समाचारों के प्रकाशन और समस्या के समाधान पर पुत्र जितेंद्र जैन ने मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त माना ।


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