*सेगांव~ शरीर के अन्दर प्राण चेतना का महत्व है ,शरीर का नही- डॉ चिन्मयजी पण्डियाजी*~~

✍सेगाव से संतोष गोयल की रिपोर्ट✍


*सेगांव*-जब तक शरीर रहता है,तब तक संबंध रहते है।आत्मा का संबंध जन्म से पहले से चला रहा है।शरीर के पीछे जो चीज काम करती है वह श्रद्धा होती है।शरीर का अस्तित्व कुछ नही नही है।शरीर के अन्दर प्राण  चेतना का महत्व है,शरीर का नही।
यह उद्गगार जिले के सेगांव  विकास खण्ड के ग्राम केली में 3 दिवसीय गायत्री महायज्ञ के प्रथम दिन शनिवार को रात्रि के प्रवचनों में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे डॉ चिन्मयजी पण्डियाजी ने कही ।उन्होंने आगे बताया कि मनुष्य अपने शरीर को सुख देने के लिये दर दर भटकता है लेकिन शरीर एक दिन समाप्त हो जाता है।इस लिये शरीर की कीमत नही है उसके प्राण कि कीमत है।व्यक्ति में श्रद्धा यदि होती है तो पत्थर भी भगवान बन जाते है।श्रद्धा की पहली परीक्षा विश्वास है।श्रद्धा का दूसरा चरण विश्वास है।हमे प्रत्येक का जीवन राष्ट्र की उन्नति में लगाना चाहिए। व्यक्ति की असली परीक्षा संकट के समय होती है। व्यसन में शराब, बीड़ी सिगरेट राहु केतू जैसे ग्रहण लगे हुए है। सभी व्यसन को त्याग दे। डाँ चिन्मयजी ने 14 अप्रेल रविवार को भी सुबह 9 बजे अपने उद्बोधन में 108 कुंडीय गायत्री महायग के बारे मे जानकारी देते हुए कहा की यज्ञ से परियावरण में संतुलन होता है ।मन से किये हुये यज्ञ सफल होते है ,मन को काबू में रखने से भगवान भी प्रसन्न होते है।

*शैफाली दीदी*ने अपने उद्बोधन में नारी शक्ति किस प्रकार आगे बढे पर अपने विचार रखते हुए कहा कि जन्म देने वाली तो जननी होती है लेकिन बच्चों को अच्छे  सँस्कार देंने वाली माँ होती है।इस पर वन्दनीय मातजी एवं परम् पूज्य गुरुदेव के बारे मे विस्तार से बताया हमे गुरु व माता दोनो का अच्छा साथ मिला जिस से हम धन्य है। गुरुजी सभी जगह विद्यमान है इस लिये हमें गुरुजी का काम करना है,उनका कर्ज हम कभी भी नही चुका सकते। दीदी ने आगे कहा नारी शक्ति को सँस्कारी बनाना है और युवाओं में सुधार लाने की आवश्कता है।नारी शक्ति के अनेक रूप हमने देखे है।इक्सवी सदी में हमे बुराइयों को मिटाना है।बिना नारी के इंसान कुछ नही कर सकता ,नारी से ही भगवान ब्रह्मा, विष्णु ,महेश की उतपत्ति हुए है।बिना नारी का घर भूतो का डेरा है।सती प्रथा राजाराम मोहन रॉय ने बन्द करवाई थी। दुनिया चाँद पर पहुंच गई है लेकिन अभी भी कुछ देशों में नारी को गुलाब बना कर रखा जा रहा है। विचारों को बदलने से समाज का विकास होता है।शक्ति संवर्धन का यह वर्ष नारी सम्मान से होगा।आज भी लड़कियों व लड़को में भेद नजर आता है।दहेज प्रथा बन्द होनी चाहिए।आज भी बूढ़े मा बाप वर्द्ध आश्रम में छोड़े जा रहे है।।
सलिकला से आये गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन व कार्यक्रम के मुख्य मार्ग दर्शक* टेमनिया बाबा *ने भी अपनी आदिवासी बारेला बोली में आदिवासी गायत्री परिजनों को वयसन छोड़ने की सलाह दी और कहा कि गूदेव का काम हमे आखरी दम तक करना है।गुरु पर भरोसा करो आप के सभी कार्य सफल होंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ चिन्मयजी एवं शेफाली दीदी के स्वागत से हुई जिसमें विधायक केदार डावर ,जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती कमला डावर,बोन्दर सिंह मण्डलोई, श्याम अग्रवाल, नर्मदाप्रसाद दसौंधी,कालू टेलर आदि ने तिलक कर  किया।
*संगीत टोली ने दी मधुर प्रस्तुति*
शान्तिकुञ्ज हरिद्वार से आई संगीत टोली ने मधुर भजनो ने सेकड़ो परिजनों का दिल मोह लिया ।
सदा जीवन उच्च विचार की महिमा को जानो.......।
देवियों देश की जाग गई तो युग सोयम बदल जायेगा..... ।
सादक को सरिता का अर्पण,शिष्यो का गुरु को समर्पण....।आदि की प्रस्तुति टोली नायक अरुण खण्डगले,बसंतीलाल सोलंकी, हेमलाल तत्वदर्शी,मायचन्द भारद्वाज व रुद्रगिरी गोस्वामी आदि ने पूरा वातावरण गायत्री मय बना दिया
*तीन एकड़ भूमि पर बनाया यज्ञ शाला*
*हजारों की संख्या में पहुंचें श्रद्धालुजन*
शक्ति सनवर्धन वर्ष अंतर्गत शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में डॉ. चिन्मयजी पण्ड्याजी की उपस्थिति में  ग्राम केली में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ ही संस्कार महोत्सव  में पहली बार इतने बड़े आयोजनों को लेकर सैकड़ों की संख्या में गायत्री परिजनों ने शिरकत की।रात्रि में करीबन 7 :45पर शांतिकुज से पधारे डॉ चिन्मयजी पण्डियाजी के द्वारा प्रवचन हुए। चिन्मयजी 14 अप्रेल को सुबह 9बजे 108 कुंडीय यज्ञ में भाग लिया।
14अप्रैल की प्रातः5 बजे ध्यान, साधना एवं योग प्राणायाम हुआ।
सुबह 7 बजे से गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार के कार्यक्रमो में गुरुदीक्षा, विद्यारम्भ के कार्यक्रम हुए।इसी दिन समग्र ग्रामीण विकास गोष्ठी ,श्रम दान एवं शाम को संगीत प्रवचन व दीप महायज्ञ का आयोजन हुआ।इसी तरह 15अप्रैल को गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति संकल्प समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।


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