*बुरहानपुर~ बुरहानपुर के निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा भैया आज (2 मई को) अपनी धर्मपत्नी नामांकन लेंगे वापस**~~                 
*कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पीए ने भी किया फोन*~~
                    
*चमचों की नींद उड़ने की चर्चा चौराहों पर*~~
          
बुरहानपुर (मेहलक़ा अंसारी)

संगठन चट्टान के समान होता है। और आखिरकार शेरा भैया को कांग्रेस हाईकमान और सत्ता के आगे झुकना ही पड़ा। वैसे प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और बुरहानपुर के निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा भैया के दरम्यान सब कुछ तय होना बताया गया है लेकिन औपचारिक रूप से शेरा भैया अपनी पत्नी का नामांकन 2 मई को वापस लेंगे। खबर है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के पीए ने भी शेरा भैया को फोन /मोबाईल पर चर्चा करके उन्हें राहुल गांधी से मुलाक़ात के लिए लोक सभा इलैक्शन के बाद दिल्ली बुलाया है ताकि दोनो के बीच सीधा संवाद हो सके। वहीं मंगलवार को सीएम कमलनाथ और शेरा भैया के दरम्यान हुई बातचीत में चुनाव के बाद मंत्री पद या संगठन में कोई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी मिलना भी तय माना जा रहा है। शेरा भैया द्वारा अपनी पत्नी का फार्म उठा लेने से कांग्रेस उम्मीदवार अरूण यादव और भाजपा उम्मीदवार नंद कुमार सिंह चौहान के दरम्यान सीधा मुक़ाबला रहेगा। शेरा भैया की पत्नी के मैदान में आने से कांग्रेस उम्मीदवार को नुक़सान होने का अंदेशा था लेकिन वह खतरा अब टल गया है। बल्कि यह कहा जाए कि अब भाजपा उम्मीदवार के सामने उनकी राजनैतिक प्रतिद्वंदी का खतरा सामने होने की चर्चा चौराहों पर है। भाजपा के एक पक्ष द्वारा विधानसभा चुनाव में निर्दलीय का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने के कारण शेरा भैया की जीत हुई है और कतिपय तत्वों द्वारा अपनी पार्टी के  उम्मीदवार को हराने वालों पर लोक सभा में अपनी हार का खौफ़ सता रहा है। आज शेरा निर्दलीय विधायक के रूप में जीत दर्ज कर नाज़ कर रहे हैं और उनकी कांग्रेस में ईज़्ज़त बढ़ गई है। अब प्रश्न यह है कि विधानसभा चुनाव में जिन तत्वों ने शेरा भैया की विजय के लिए काम किया था क्या वह जज़्बा लोकसभा में पैदा कर पाएंगे और वह लोग भी साथ देंगे जिन्हों ने विधानसभा चुनाव में दिया था । जनता में और चौराहों पर चर्चा है कि शेरा भैया के द्वारा अपनी पत्नी का नामांकन वापस लिए जाने से चमचों की नींद उड़ गई है। अब सीधा मुक़ाबला अरूण यादव और नंद कुमार सिंह चौहान के दरम्यान होगा। जनता किस के सर पर ताज रखती है यह रहस्य वाली बात आज पहेली बनी हुई है। ताजपोशी करने वाली जनता भी खामोश दिखाई दे रही है। यह खामोशी किसी इन्कलाब की आहट प्रतीत होती है।कुछ बदलाव भी होना संभव है।


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