दसाई~~भाजपा के लिए आफत तो कांग्रेस की लिए मुसीबत~~

जगदीश चौधरी (खिलेडी)6261395702~~


19 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव में भले ही अभी खुलकर माहौल नहीं बन पाया हो पर राजनीतिक दलों में अंदर ही अंदर हो रही फजीहत चिंता का विषय बनती जा रही है

भाजपा कार्यकर्ता विधानसभा की हार से दिल मिलाए हुए हैं और जोश के साथ मैदान में उतरे हैं तो विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बावजूद कार्यकर्ता अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और यही वजह है कि कांग्रेसी उत्साह हीन जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आएगा राजनीतिक सरगर्मी बढ़ेगी और मतदाताओं का परंपरागत मोहन बड़ी चिंता का विषय है

इन चुनावों में स्थानीय मुद्दे भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करेंगे.
आम तौर पर देखने में आता है कि प्रदेश में जिस दल की सरकार सत्ता में होती है उस दल के कार्यकर्ता चुनाव के समय काफी उत्साह में रहते हैं लेकिन इस समय परिस्थितियां कुछ अलग है प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने और धार जिले में भाजपा का सूपड़ा साफ होने के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव में काफी संख्या में नजर आ रहे हैं 2 दिन पूर्व दसाई में संपर्क में भी कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश गिरवाल के साथ भीड़ का जमा नहीं होना चर्चा का विषय रहा कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रही कांग्रेस के लिए कम से कम ही अच्छे संकेत तो नहीं है

उधर भाजपा भी  मुसीबत से घिरी नजर आती है विधानसभा चुनाव में प्रदेश के साथ ही जिलेभर से पार्टी का सफाया होने के बाद कार्यकर्ता हताश निराश रहे हैं लोकसभा चुनाव में इसका असर नजर आ रहा है प्रत्याशी छतर सिंह दरबार के साथ भले ही गाड़ियों का काफिला चल रहा हूं पर मैदानी तौर पर यहां भी भीड़ नदारद ही है जनसंपर्क में गिने-चुने कार्यकर्ता मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं 


हालांकि पूर्व सांसद सावित्री ठाकुर की उदासीनता भी दरबार के आड़े आ रही है बावजूद इसके हार से दिल मिलाए भाजपा कार्यकर्ताओं से मैदान में उतरे हैं ताकि कम से कम जिले में तो उनका वजूद कायम रह सके.
सबसे ज्यादा चर्चित मुद्दा तो स्थानीय स्तर का ही है जगह-जगह छाया जल संकट और सांसद निधि से उसके उचित समाधान के अभाव में लोग नाराज जरूर है मगर कांग्रेस के लिए भी यही मुद्दा सिरदर्द बना हुआ है पूर्व में कांग्रेसी सांसद रहे भी कुछ विशेष पहल इस दिशा में जो नहीं कर पाए अब देखना यही है कि जनता का आक्रोश किसके खिलाफ मुख्यत होता है क्योंकि इस संकट में दोनों ही दल बराबर के हिस्सेदार हैं।


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