बड़वानी~~देश के महात्यौहार के लिए अपने निजी दुःख को किया दरकिनार~


बड़वानी  /लोकसभा निर्वाचन के दौरान कई ऐसे हृदय स्पर्श पहलू भी देखने को मिले जिससे यह विश्वास और भी पुख्ता होता है कि कितनी भी बड़ी बाधाऐं आ जाऐ लोकतंत्र की विशालता के समक्ष बौनी ही साबित होगी। हम बात कर रहे हैं आशाग्राम कुष्ठ अंतःवासी श्रीमती गुलाबी बाई कि जिसके पति का विगत माह वृद्धावस्था के चलते देहान्त हो चुका है। घर में अकेली वृद्धा ही रहती है। पति जब जीवित थे दोनो एक-दूसरे की परछाई की तरह पूरा जीवन साथ जिये हैं। कुष्ठ रोग की बीमारी दोनो को एक समान होने से दोनो की निकटता एक-दूसरे को और भी करीब ला दी थी। ऐसे में पति का देहान्त हो जाना, गुलाबी बाई के रोगमुक्त जीवन को पुनः दूभर बना देने के समान था। किन्तु दिव्यंाग आदर्श मतदान केन्द्र आशाग्राम के स्वीप सहयोगी टीम जैसे ही निर्वाचन आमंत्रण पाती लेकर वृद्धा के पास पहुंची। वे ही गुलाबी बाई अपनी मतदाता पर्ची एवं पहचान का दस्तावेज हाथो में लेकर मतदान करने चल पड़ी ।
और मतदान करने के बाद बोली कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निजी गम मायने नहीं रखते देश सर्वापरी होता है। गुलाबी बाई के इस उद्देश्य से अभिभूत युवा उस समय और चकित रह गये जब उनकी पहनाई हुई माला को गुलाबी बाई ने युवाओं को ही पहनाते हुये उनसे प्रण करा लिया कि वे बड़े होने पर अपने मताधिकार का उपयोग अवश्य करेंगे ।


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