।।  *सुप्रभातम्*  ।।
               ।।  *संस्था  जय  हो*  ।।
        ।।  *दैनिक  राशि  -  फल*  ।।
        आज दिनांक 13 जून 2019 गुरुवार संवत् 2076 मास ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सायं 04:50 बजे तक रहेगी उपरांत द्वादशी तिथि लगेगी । आज सूर्योदय प्रातः काल 05:33 बजे एवं सूर्यास्त सायं 07:21 बजे होगा । चित्रा नक्षत्र प्रातः 10:55 बजे तक रहेंगा पश्चात स्वाति नक्षत्र आरंभ होगा । आज का चंद्रमा तुला राशि में दिन रात भ्रमण करते रहेंगे । आज का राहू काल दोपहर 02:16 बजे से 03:58 बजे तक रहेंगा । दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेंगा यदि आवश्यक हो तो जीरा का सेवन कर यात्रा आरंभ करें । जय हो

                -:  *विशेष*  :-


                      *निर्जला एकादशी*                  *13 जून 2019 ( गुरूवार  )*    
             *व्रत कथा:*

◆ शौनक आदि 88 हजार ऋषि- मुनि बड़ी श्रद्धा से इन एकादशियों की कल्याणकारी व पापनाशक रोचक कथाएँ सुनकर आनन्दमग्न हो रहे थे। अब सबने ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की प्रार्थना की, तब सूतजी ने कहा- महर्षि व्यास से एक बार भीमसेन ने कहा- "हे पितामह! भ्राता युधिष्ठिर, माता कुन्ति, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि एकादशी के दिन व्रत करते हैं और मुझे भी एकादशी के दिन अन्न खाने को मना करते हैं। मैं उनसे कहता हूँ कि भाई, मैं भक्तिपूर्वक भगवान की पूजा कर सकता हूँ और दान दे सकता हूँ, किन्तु मैं भूखा नहीं रह सकता।"

इस पर महर्षि व्यास ने कहा- "हे भीमसेन! वे सही कहते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि एकादशी के दिन अन्न नहीं खाना चाहिये। यदि तुम नरक को बुरा और स्वर्ग को अच्छा समझते हो तो प्रत्येक माह की दोनों एकादशियों को अन्न नहीं खाया करो।

महर्षि व्यास की बात सुन भीमसेन ने कहा- "हे पितामह, मैं आपसे पहले ही कह चुका हूँ कि मैं एक दिन तो क्या एक समय भी भोजन किये बिना नहीं रह सकता, फिर मेरे लिये पूरे दिन का उपवास करना क्या सम्भव है? मेरे पेट में अग्नि का वास है, जो ज्यादा अन्न खाने पर ही शान्त होती है। यदि मैं प्रयत्न करूँ तो वर्ष में एक एकादशी का व्रत अवश्य कर सकता हूँ, अतः आप मुझे कोई एक ऐसा व्रत बतलाइये, जिसके करने से मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो सके।"

भीमसेन की बात सुन व्यासजी ने कहा- "हे पुत्र! बड़े-बड़े ऋषि और महर्षियों ने बहुत-से शास्त्र आदि बनाये हैं। यदि कलियुग में मनुष्य उनका आचरण करे तो अवश्य ही मुक्ति को प्राप्त होता है। उनमें धन बहुत कम खर्च होता है। उनमें से जो पुराणों का सार है, वह यह है कि मनुष्य को दोनों पक्षों की एकादशियों का व्रत करना चाहिये। इससे उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है।"

महर्षि व्यास ने कहा- "हे वायु पुत्र! वृषभ संक्रान्ति और मिथुन संक्रान्ति के बीच में ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी आती है, उसका निर्जल व्रत करना चाहिये। इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन करते समय यदि मुख में जल चला जाये तो इसका कोई दोष नहीं है, किन्तु आचमन में ६ माशे जल से अधिक जल नहीं लेना चाहिये। इस आचमन से शरीर की शुद्धि हो जाती है। आचमन में ६ माशे से अधिक जल मद्यपान के समान है। इस दिन भोजन नहीं करना चाहिये। भोजन करने से व्रत का नाश हो जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक यदि मनुष्य जलपान न करे तो उससे बारह एकादशियों के फल की प्राप्ति होती है। द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले ही उठना चाहिये। इसके पश्चात भूखे ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिये। तत्पश्चात स्वयं भोजन करना चाहिये।

हे भीमसेन! स्वयं भगवान ने मुझसे कहा था कि इस एकादशी का पुण्य सभी तीर्थों और दान के बराबर है। एक दिन निर्जला रहने से मनुष्य पापों से मुक्त हो जाता है। जो मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें मृत्यु के समय भयानक यमदूत नहीं दिखाई देते, बल्कि भगवान श्रीहरि के दूत स्वर्ग से आकर उन्हें पुष्पक विमान पर बैठाकर स्वर्ग को ले जाते हैं। संसार में सबसे उत्तम निर्जला एकादशी का व्रत है। अतः यत्नपूर्वक इस एकादशी का निर्जल व्रत करना चाहिये। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', इस मन्त्र का उच्चारण करना चाहिये। इस दिन गौदान करना चाहिये। इस एकादशी को भीमसेनी या पाण्डव एकादशी भी कहते हैं। निर्जल व्रत करने से पहले भगवान का पूजन करना चाहिये और उनसे प्रार्थना करनी चाहिये कि हे प्रभु! आज मैं निर्जल व्रत करता हूँ, इसके दूसरे दिन भोजन करूँगा। मैं इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करूँगा। मेरे सब पाप नष्ट हो जाएं। इस दिन जल से भरा हुआ घड़ा वस्त्र आदि से ढककर स्वर्ण सहित किसी सुपात्र को दान करना चाहिये। इस व्रत के अन्तराल में जो मनुष्य स्नान, तप आदि करते हैं, उन्हें करोड़ पल स्वर्णदान का फल प्राप्त होता है। जो मनुष्य इस दिन यज्ञ, होम आदि करते हैं, उसके फल का तो वर्णन भी नहीं किया जा सकता। इस निर्जला एकादशी के व्रत के पुण्य से मनुष्य विष्णुलोक को जाता है। जो मनुष्य इस दिन अन्न खाते हैं, उनको चाण्डाल समझना चाहिये। वे अन्त में नरक में जाते हैं। ब्रह्म हत्यारे, मद्यमान करने वाले, चोरी करने वाले, गुरु से ईर्ष्या करने वाले, झूठ बोलने वाले भी इस व्रत को करने से स्वर्ग के भागी बन जाते हैं।

हे अर्जुन! जो पुरुष या स्त्री इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करते हैं, उनके निम्नलिखित कर्म हैं, उन्हें सर्वप्रथम विष्णु भगवान का पूजन करना चाहिये। तदुपरान्त गौदान करना चाहिये। इस दिन ब्राह्मणों को दक्षिणा देनी चाहिये। निर्जला के दिन अन्न, वस्त्र, छत्र आदि का दान करना चाहिये। जो मनुष्य इस कथा का प्रेमपूर्वक श्रवण करते हैं तथा पठन करते हैं वे भी स्वर्ग के अधिकारी हो जाते हैं।

                   *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245,एम.जी.रोड (आनंद चौपाटी)धार, एम.पी.
               मो. नं.  9425491351

                   *आज का राशि फल*

          मेष :~ पारिवारिक जीवन सुखी रहेगा। साथ में प्रवास का और सुरुचिपूर्ण भोजन का भी योग है। कोई खोई हुई वस्तु आज मिलने की संभावना अधिक है। फिर भी अपने विचारों और आवेश को अंकुश में रखें । विदेशी व्यापार से जुडे़ हुए लोगों को सफलता और लाभ मिलेगा।

          वृषभ :~ आज दिनभर आनंद मन पर छाया रहेगा। अपने कार्य में व्यवस्थित रुप से आप आगे बढा पाएंगे और योजना के अनुसार कार्य भी कर पाएंगे। अपूर्ण कार्यो को सफलतापूर्वक पूर्ण कर पाएंगे। कार्यालय में सहकर्मियों का सहयोग अच्छा मिलेगा। 

          मिथुन :~ अजीर्णता रहने के कारण स्वास्थ्य भी कुछ नरम-गरम रहेगा। खर्च की भी मात्रा आज कुछ अधिक रहेगी। फिर भी विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है। संभव हो तो वाद-विवाद टाले, जिससे कि किसी के साथ मनमुटाव के प्रसंग उपस्थित न हो। अपमान अथवा मानभंग की स्थिति से संभले ।

          कर्क :~ आज आप संभलकर चले । शारीरिक स्फूर्ति और मानसिक प्रसन्नता बनाए रखने के लिए आज कष्ट का अनुभव होगा। छाती में पीडा अथवा अन्य विकार से भी कष्ट की अनुभूति होगी। घर में सदस्यों के साथ उग्र चर्चा या वाद-विवाद हो जाने से भी मन में दुख बना रहेगा। धन का अधिक से अधिक खर्च होगा। 

          सिंह :~ भाई-बहनों के साथ संबंधो में मीठास भी बनी रहेगी। मित्रो और स्नेहीजनो के साथ किसी रमणीय पर्यटनस्थल पर घूमने-फिरने का आनंद उठा सकेंगे। आज के दिन आप का आरोग्य भी अच्छा रहेगा। आर्थिकरुप से भी आपको लाभ होगा। मानसिक रुप से उद्वेगरहित रहेंगे। भाग्यवृद्धि होने के भी संकेत है। नए कार्य प्रारंभ करने के लिए आज का दिन शुभ है।

          कन्या :~ वाणी की मधुरता से दूसरे लोगों के मन पर अपनी सकारात्मक छाप छोड़ सकेंगे। पारिवारिक वातावरण भी अच्छा रहेगा। फिर भी वाणी पर संयम बरतने से वाद-विवाद की संभावना कम हो जाएगी। आर्थिक कार्य भी आज सुखपूर्वक संपन्न होंगे। नकारात्मक विचारो से आप दूर रहें । मित्रो और स्नेहीजनों से भेंट होगी।

          तुला :~ आपके प्रत्येक कार्य में आत्मविश्वास छलकेगा । आर्थिक योजनाएं भी सरलतापूर्वक बना सकेगें। शारीरिक तथा मानसिक रुप से प्रसन्नता का अनुभव होगा। वस्त्राभूषण और आनंद-प्रमोद के पीछे खर्च होगा। वैचारिकरुप से दृढता रहेगी। सृजनात्मक प्रवृत्तियों में मन लगा रहेगा।

          वृश्चिक :~ आज के दिन मौज-शौक और मनोरंजन के पीछे खर्च होगा। स्वास्थ्य के सम्बंध में शिकायत रहेगी। मन के अंदर चिंता की भावना रहेगी। दुर्घटना से बचे। कुटुंबीजनों और सगे- सम्बंधियों के साथ गलतफहमी या अनबन होगा। कोर्ट- कचहरी संबंधी कार्यों में सावधानी रखें। हरेक विषय में संयमित व्यवहार अनर्थ होने से बचा लेंगे।

          धनु :~ आर्थिक लाभ और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलने के साथ आप पारिवारिक जीवन में भी सुख- संतोष की भावना अनुभव करेंगे। आय में वृद्धि और व्यापार में लाभ मिलेगा। मनपसंद पात्र के साथ सुखद क्षण बितेगा। मित्रों के साथ रमणीय स्थानों में पर्यटन का आयोजन होगा। पत्नी तथा पुत्र द्वारा लाभ प्राप्ति की संभावना है।

          मकर :~ मित्रों और स्नेहीजनों के साथ हुई भेंट से मन प्रसन्न होगा । व्यापार में धन की उगाही के लिए बाहर जाना पडेगा जो कि लाभप्रद रहेगा। व्यवसायिक क्षेत्र में धन तथा मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। उच्च अधिकारियो की प्रसन्नता आप पर बनी रहेगी। व्यवसाय में भी आपको पदोन्नति मिलने की पूरी संभावना है।अकस्मात से बचकर चले  ।

          कुंभ :~ शारीरिक रुप से अस्वस्थता बनी रहेगी। शिथिलता और आलस्य बना रहेगा। फिर भी मानसिकरुप से प्रसन्नता बनी रहेगी। व्यवसाय में उच्च अधिकारी के साथ कार्य करते समय संभलकर रहें। आनंद-प्रमोद के पीछे आज धन का खर्च हो सकता है। संतानो के विषय में चिंता बनी रहेगी। विदेश से आप को समाचार मिलेंगे।

          मीन :~ क्रोध और वाणी पर संयम बरते। आरोग्य के विषय में सावधानी रखें । सरकार-विरोधी प्रवृत्तियों से दूर रहें । रोगों के इलाज के पीछे धन के खर्च होने की संभावना है। मानसिक रुप से आप अस्वस्थ रहेंगे। परिवारजनो के साथ संबंधो में नकारात्मकता का प्रवेश न हो जाए इसका ध्यान रखें । ( डाँ. अशोक शास्त्री  )

।।  शुभम्  भवतु  ।।  जय  सिया राम  ।।
।।  जय  श्री  कृष्ण  ।।  जय  हो,,,,,,,,,।।


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