*इंदौर~इंदौर संभाग से लगभग 2000 चयनित सहायक प्राध्यापक करेंगे भोपाल में आज न्याय की मांग*~~

*संजय यादव बाबा इंदौर-9926010420*~~


इंदौर:-मप्र लोक सेवाआयोग द्वारा चयनित लगभग 2553 सहायक प्राद्यापक आज 9 जून को अपने परिवार सहित आज शुभह 5 बजे इंदौर से भोपाल के लिए रवाना हुए ये भोपाल शाहजनी पार्क में एकत्रित होकर संविधान पाठ एवं मोमबत्ती जलाकर कमलनाथ सरकार से न्याय की गुहार करेंगे। विदित हो की ये चयनित प्रोफेसर पिछले 9 महीनो से नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन इन्हें सरकार के अड़ियल रवय्ये की वजह और कोर्ट की तारीख पे तारीख में उलझाए रखने की वजह से आज तलक नियुक्ति आदेश नहीं मिल पा रहा हैं। जिसकी वजह से आज इनको 46 डिग्री भरी गर्मी में अपने परिवार सहित शासन से नियुक्ति मांगना पड़ रहा हैं।
अपनी मांगों को लेकर इंदौर संभाग के करीब 2000 चयनित सहायक प्राद्यपक अपने परिवार सहित भोपाल रवाना हो गए है।
*न्यायलय में लंबित हैं मामला*
उल्लेखनीय हैं कि मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा जुलाई 2018 में आयोजित परीक्षा को उत्तीर्ण करके इन युवाओं ने अपने दस्तावेज सत्यापन का कार्य भी सितम्बर 2018 में पूरा करवा लिया । तब से ये उच्च शिक्षित युवा बेरोजगार हो गए हैं क्योंकि  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेज सत्यापन के समय इनसे NOC  मांगी गयी थी जिसके कारण इनका तात्कालिक रोजगार भी छीन गया। अब ये युवा वर्ग आर्थिक और सामाजिक रूप से पीड़ित हैं ।
7 जनवरी को माननीय उच्च न्यायलय जबलपुर द्वारा विकलांग आरक्षण सम्बन्धी एक याचिका 20649 के संदर्भ में शासन द्वारा समय पर जवाब प्रस्तुत न करने के कारण स्टे दे दिया गया था। जिसके कारण यह नियुक्ति प्रकिर्या पर विराम लग गया हैं।
*चयनितों की मांग।*
चुकी उपरोक्त न्यायालीन मामले की अगली तारीख 17 जून 2019 हैं। इसलिए इन चयनितों की मांग हैं कि उच्च शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और उचित जवाब समय पर दे ताकि कोर्ट से स्टे खुल जाए और जल्द से जल्द 27 वर्षो से खाली पड़े असिस्टेन्ट प्रोफेसर के पद भरे जा सके। जिससे मप्र की उच्च शिक्षा की लचर  व्यवस्था को ताकत मिले।
*मुख्यमंत्री व मंत्री पटवारी बिना वजह शह दे रहे अतिथि विद्वानों को*
विदित हो कि मंत्री जीतू पटवारी बिना आधार बुनियाद के अतिथि विद्वानों का पक्ष ज्यादा ले रहे है। जबकि पीएससी ने सभी को खुला मौका दिया था। जिसमे अतिथि विद्वानों को लगभग 20 नम्बर अधिक भी दिए गए लेकिन आलस व कंही न कंही ज्ञान की कमी के चलते कई लोगो का पीएससी में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयन नही हो पाया बोखलाए अतिथि विद्वान अब अपनी रोटी सीधी सेकना चाह रहे है। इनकी मांग है कि हम कईं वर्षो से पड़ा रहे है तो हमे ज्ञान ज्यादा है अतः हमें बिना परीक्षा के सीधे तौर पर परमानेंट किया जाए । क्या इसे उचित माना जाए नही वजह अगर यूँ ही बिना परीक्षा के हर कोई सरकारी नोकरी मांगने लगा तो क्या ओट की राजनीति के चलते ऐसा हो सकता है कमलनाथ सरकार व इनके मंत्री तो यही चाहते है कि परीक्षा में जो उत्तीर्ण हुए उन्हें लटका दो और फेल हो कर अब अतिथि विद्वान होने का राग अलाप रहे ऐसो को परमानेंट करने का दिलासा दो आखिर इन्हें किस आधार पर परमानेंट करने का ख्वाब दिखा रही है सरकार अगर अतिथि विद्वान होते तो पीएससी में चयनित क्यो नही हो पाए वन्ही इनके भरोसे कैसे छात्रों का भविष्य कमलनाथ सरकार खराब करने पे तुली है । नया शिक्षा सत्र सुरु होने जा रहा है और अभी तक चयनित प्रोफेसरों की नियुक्ति नही हो पा रही है।
*कन्हा कराए बच्चो का एडमिशन*
ये चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर एक तरफ तो अपनी अन्य नोकरी गंवा बेटे बेरोजगार हो गए वन्ही अब इन्हें समय पर नियुक्ति नही मिलने से इनके बच्चो की पढ़ाई पर भी असर पड़ेगा क्यो की नए एडमिशन होंना स्कूलों में प्रारम्भ हो चुका है ऐसे में इनके सामने ये मुसीबत आन पड़ी है कि आखिर एडमिशन कन्हा कराए हाल फिलहाल जंहा जिस शहर में रह रहे है वँहा या फिर सरकार जंहा का नियुक्ति पत्र देगी वँहा आखिर कन्हा कराए दाखिल सरकार न तो बेरोजगार हुए उसकी न ही इनके बच्चो की यथास्थिति का सोच रही है वन्ही मंत्री जी शिक्षा के प्रति सजग रहने होने के बड़े बड़े दाओ का बखान कर रहे है। क्या यही नीति है मंत्रीजी की के इस कदर भटकाया जाए प्रोफेसरो को ये तो जन्ता का नीतियों को देखना व मंत्री जी के वादों से भटकना साफ नजर आ रहा है। आगे क्या निर्णय निकल के सामने आएगा यह तो आज शाम तलक कमलनाथ सरकार व मंत्री पटवारी ही जाने की न्याय होगा या अन्याय।


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