देवास~1603 दिन( 4 साल 4 महीने 22 दिन) बाद सिध्दोद़य  की पावन धरा पर मंगल प्रवेश किया आचार्य श्री ने~~

30 मुनियों के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का नेमावर में ऐतिहासिक स्वागत वंदन अभिनंदन,~~

अनिल उपाध्याय
खातेगांव /देवास~~



जैनाचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने अपने संघ के साथ मंगलवार सुबह नेमावर में मंगल प्रवेश किया! जैनाचार्य संत शिरोमणि श्री विद्यासागर महाराज 1603 दिन (4 वर्ष 4 माह 22 दिन) बाद पुन:नेमावर की धरती पर सध्दोदय सिद्धक्षेत्र  में पधारे उनके आगमन को लेकर सकल दिगंबर जैन समाज ने पलक पावडे बिछा दिए, और उनकी आगमन की तैयारी में जुटा रहा सोमवार को मुनिसंघ ने रिजगांव में आहार चर्या के बाद बिहार कर संदलपुर के संत सिंगाजी कॉलेज में रात्रि विश्राम किया इसके पूर्व सोमवार सुवह विधायक आशीष शर्मा ने विधानसभा क्षेत्र की सीमा में प्रवेश करते ही आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित कर उनके चरण पखारे और नेमावर में ही चतुर्मास करने का निवेदन किया!---

नेमावर में चातुर्मास की आस, उत्साहित है जैन समाज:
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चातुर्मास हेतु आचार्यश्री 17 जून को जबलपुर से निकले थे। पद विहार करते हुए 21 दिनों में लगभग 400 किमी की यात्रा कर नेमावर पहुंचे हैं। 15 फरवरी 2015 को नेमावर से आचार्यश्री का विहार हुआ था। 4 साल 4 माह बाद गुरूजी के आगमन को लेकर खातेगांव, अजनास, संदलपुर, हरदा और आसपास का जैन समाज खासा उत्साहित है और सभी की यही अभिलाषा है कि मुनिसंघ का चातुर्मास नेमावर में हो। चूँकि आचार्यश्री अनियत विहारी है, इसलिए चातुर्मास कहाँ होगा, इसके लिए सिर्फ कयास लगाए जा सकते हैं, निश्चित कुछ नही कहा जा सकता। उनके नेमावर के साथ ही इंदौर में भी चातुर्मास करने की संभावना प्रबल है।
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30 दिसंबर 1995 को पहली बार नेमावर आए थे आचार्य विद्यासागर:

आचार्यश्री से सम्बंधित हर छोटी-बड़ी जानकारी संग्रहित करने वाले खातेगांव के श्रवण पाटनी ने बताया कि गुरुदेव का सर्वप्रथम 30 दिसंबर 1995 को नेमावर आगमन हुआ था। उसके बाद 1997 और 2002 में चातुर्मास हुआ। 2004 में विदिशा चातुर्मास के पूर्व 85 दिनों का प्रवास रहा। फिर 27 नवंबर को पुनः आगमन हुआ और 38 दिन गुरूजी यहाँ रहे। खातेगांव पंचकल्याणक कराने के 24 जनवरी 2015 को पुनः यहाँ आए और 15 फरवरी को यहाँ से आचार्यश्री का विहार हुआ और अब 9 जुलाई को पावन चरण पुनः सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र की धारा पर पड़ें


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