खंडवा~माध्यमिक शाला शिवर मैं हुई घटना का जिम्मेदार कौन ~~

जांच को दस्तक दे रहा है पूरा मामला क्या शिक्षिका पर होगी कार्रवाई ~~

आयरन की गोली खाने से जो 40 बच्चे हुए थे बीमार . ~~

मुंदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराना पड़ा जहां डाक्टरों की तत्परता से बच्चे गंभीर हादसे का शिकार नहीं हो पाए~~

वही पूरा प्रशासनिक अमला भी लगातार इस मामले में गुरुवार शाम से स्वास्थ्य केंद्र पर बच्चों पर निगाह जमाए हुए था~~

खंडवा रवि कुमार ~~




कौन है जिम्मेदार इस घटना का..?………. बच्चों के साथ घटी इस घटना का आखिर कौन है जिम्मेदार लोगों के मन में यही सवाल बार-बार उठ रहा है कि यह मासूम किसकी गलती का शिकार हो गए और उन्हें इतने दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ा।

जहां इस मामले में गुरुवार रात को ही मुंदी स्वास्थ्य केंद्र के डॉ के सामने बच्चों ने कहा था कि हम लोगों को शिक्षिका द्वारा प्रार्थना के बाद ही 11:00 बजे गोली खिला दी गई थी और हम लोग घर से खाना खाकर नहीं आए थे तभी से इस घटना में प्रथम दृष्टया तो स्कूल की शिक्षिका की ही गलती सामने आ रही है। मुंदी स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार रात को इस मामले में जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर श्रीमती शांता तिर्की से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि जिस तरीके से बच्चों का कहना है कि उन्हें खाली पेट की दवाई खिलाई गई है वह गलत है और इसमें कहीं ना कहीं लापरवाही सामने आ रही है जबकि स्वास्थ्य केंद्र की एन एम के द्वारा जब शिक्षिका को दवाई वितरण किया गया था तब साफ लफ्जो में बता दिया गया था कि यह दवाई बच्चों को मध्यान्ह भोजन के बाद ही देना है और उसका भी दिन निर्धारण था मंगलवार या फिर शुक्रवार परंतु शिक्षिका की लापरवाही से बच्चों को यह दवाई गुरुवार को खिलाई गई वह भी खाली पेट इसका मतलब तो साफ है कि डॉक्टरों की समझाइश के बाद भी शिक्षिका के द्वारा बच्चों को लापरवाही पूर्वक आयरन की गोली खिलाई गई जिससे बच्चों को उल्टी दस्त घबराहट पेट दर्द आदि के गंभीर बीमारी से गुजरना पड़ा बच्चों के साथ घटी इस हादसे मैं असली वजह तो यही नजर आती है लेकिन कई और परते भी खुल सकती हैं।

परिजनों ने शिक्षिका पर लगाया आरोप………. बच्चों के परिजन शुक्रवार को स्कूल पहुंचे और वहां बच्चों के साथ घटी इस घटना का मुख्य दोषी शिक्षिका को ही बताया गया और पत्रकारों के सामने शासन से निवेदन कर उन्होंने शिक्षिका को ही इस स्कूल से हटाने का आग्रह किया गांव में शिक्षिका के खिलाफ बड़ा आक्रोश का माहौल है बीमार बच्चों के परिजनों ने शिक्षिका पर काफी गंभीर आरोप लगाए जिससे तो यही लगता है अब इस मामले में गलती शिक्षिका की ही पाई जा रही है।

शुक्रवार को शिवरिया टांडा स्थित इस स्कूल में बहुत कम मात्रा में बच्चे आए थे लेकिन ज्यादातर बच्चों के परिजन ही स्कूल के चक्कर काट रहे थे।

पुलिस ने इस मामले में की शिक्षिका से पूछताछ……. शुक्रवार को बीमार बच्चों के मामले में बीड चौकी एस आई शिवराम पाटीदार ने स्कूल पहुंचकर शिक्षिका से इस मामले में पूछताछ की और बयान दर्ज किए है वहीं बीमार बच्चों के पालकों से भी पूछताछ की और बयान दर्ज किए गए इस मामले में गुरुवार रात ही नायब तहसीलदार वीरेंद्र पुराणिक मुंदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिक्षिका के विषय में पूछताछ कर बच्चों के परिजन को कार्यवाही का भरोसा दिलाया था।

ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक शिक्षिका कर देते हैं जल्दी बंद स्कूल……. जिले के ग्रामीण क्षेत्र की अधिकतर स्कूलों में दोपहर के वक्त 3:00 बजे तक ही ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक बच्चों की छुट्टी कर अपने गंतव्य की ओर निकल जाते हैं और इस मामले में भी शायद यही कहानी सामने आ सकती है क्योंकि 3:15 पर बीड से शटल ट्रेन चलती है जिससे समय मिलाने के लिए शिक्षक और शिक्षिका  जल्दी छुट्टी देकर स्टेशन पर पहुंच जाती है पिछले कई शिक्षा सत्रों से देखने में आ रहा है कि 3:00 वाली शटल में ही क्षेत्र के शिक्षक शिक्षिकाएं अपने निवास की ओर कूच कर जाते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अंधकार में हो रहा है लेकिन जल्दबाजी की इस घटना में 40 बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ होने की भी गुंजाइश बन गई थी शुक्र है समय पर बच्चों को उचित उपचार मिल गया वरना कोई गंभीर हादसा घट सकता था अब शिक्षा विभाग व स्थानीय प्रशासन को शिक्षक और शिक्षिका के जल्दी जाने के मामले में भी कार्यवाही करना चाहिए पिछले वर्ष भी अधिकतर स्कूलों के मामले सामने आए जिसमें शिक्षक शिक्षिकाओं द्वारा 3:00 बजे ही स्कूल को बंद कर बच्चों को छुट्टी दे दी जाती है और बस मिलाने के लिए ही शिक्षक जल्दबाजी करते हैं और ऐसी घटनाएं अंजाम दे देते हैं लेकिन जब प्रशासन के द्वारा शिक्षक शिक्षिकाओं को उचित वेतन दिया जाता है और सारे भत्ते भी देता है लेकिन उसका नतीजा यह निकलता है कि शिक्षक शिक्षिकाएं बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे अब प्रशासन को ऐसे लापरवाह शिक्षक शिक्षिकाओं के ऊपर उचित कार्यवाही करनी चाहिए और बीड से चलने वाली शटल के 3:15 वाले फेरे पर निगाह रखनी चाहिए जिससे ऐसे लापरवाह शिक्षक शिक्षिकाओं को अच्छा सबक मिल सके।

बच्चों और परिजन भटकते रहे….. गुरुवार को अस्पताल में गंभीर रूप से भर्ती बच्चों को रात भर रख कर उनका इलाज किया गया वहीं शुक्रवार सुबह बच्चे व उनके परिजन छुट्टी मिलने पर भटकते नजर आए . .


Post A Comment:

0 comments: