आलीराजपुर /बरझर~आखीर कीस वजह से इन झोलाछाप बगांलीयो पर महेरबान हे जिले का स्वास्थ्य विभाग~~

करीम खान की रिपोट 9340876597~~



जिले में प्रषासन के बिना किसी खौफ से बंगाली झोलाछाप चिकित्सक अपना जाल फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। जिले के हर विकासखण्ड के कई ग्रामों में ये झोलाछाप चिकित्सक अपना अवैध चिकित्सालय संचालित करते देखे जा सकते है। आदिवासी बाहुल आलीराजपुर जिले में प्रषासन के सुस्त रवैये के कारण झोलाछाप चिकित्सकों में मस्ती छाई हुई है। उपचार के नाम पर जिले के गरीब आदिवासियों का शोषण करने वाले इन झोलाछापों पर कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ खानापूर्ति ही की गई है। जिला, तहसील व विकासखण्ड मुख्यालय पर जब नए अधिकारी पदस्थ होते है तब शुरूआती दौर में इन झोलाछापों के यहां छापे और उनके फर्जी क्लिनीक को सील करने जैसी कार्रवाई होती है, लेकिन वक्त बीतने के साथ-साथ मामला भी ठण्डे बस्ते में डाल दिया जाता है।
चिकित्सक मनमर्जी से देते है दवाईः- आलीराजपुर जिले में एक के पीछे एक करते-करते सैकड़ो झोलाछाप बंगाली बाबुओ का शहर से लगाकर ग्राम, कस्बे, फलिये तक जाल फैल चुका है। ये फर्जी लोग नई-नई फर्जी दवा कंपनियों का जहर जिले के गरीब आदिवासियों की रगों में बेखौफ उतार रहे है। एक तरह से ये आदिवासी बाहुल आलीराजपुर जिला ड्रग ट्रायल का अड्डा बन गया है। ये मरीजों को हाई डोज दे कर उन्हें तात्कालिक आराम पहुंचाकर उनके भगवान बन जाते है। इनके चक्कर में पड़ने वाले मरिज इनके मुरीद होकर रह जाते है।
इनके यहां उपचार करवाने के बाद उन्हें कहीं ओर आराम नहीं मिलता क्योंकि कोई भी एम.बी.बी.एस. या एम.डी. चिकित्सक एक अनुपात में ही मरीज को दवा की खुराक देता है न कि इन झोलाछापों की तरह अनाप-शनाप दवा की अति खुराक।  बरझर,मे अधिक इस तरह के झोलाछाप  अवैध गर्भपात जैसे कृत्यों में संलग्न है।
बन गए है यहां के मूल निवासीः- मूलतः बंगाल प्रांत के इन झोलाछाप चिकित्सकों ने इस आदिवासी जिले में पैठ बना ली है। इन लोगों ने यहां के मूल निवासी होने का प्रमाण-पत्र हासिल करने के साथ ही निर्वाचन नामावली में भी स्थान पा लिया है। इन्हीं में से कुछ तो ऐसे भी है जो आदिवासी होने का दावा करते है। यहां आकर बस गए झोलाछाप बंगाली बाबुओं ने न सिर्फ इस जिले में बल्कि रतलाम, इन्दौर और गुजरात प्रदेष तक लाखों रूपयों की संपत्ति बसा ली है।
बच्चें पढ़ते है महंगी स्कूलों में और उपचार करवाते है बड़े बड़े चिकित्सालयों मेंः- इन झोलाछाप चिकित्सकों के बच्चें महंगी-महंगी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे है और यदि इनके बच्चों को जरा सी भी छींक आ जाए तो ये उन्हें लेकर दाहोद, बड़ौदा, इन्दौर भागते है जहां पर ये कोई बड़े चिकित्सालय में इनका उपचार करा सके जबकि यहां के गरीब आदिवासियों की ये तमाम किस्म की जांच भी अपने ही क्लिनीक में कर डालते है। उपचार के पहले ये ग्रामीणों के जैब टटोल कर उन्हें बेवकुफ बनाते है कि कितने वाला उपचार करू……।
क्यों नहीं हो रही है कार्रवाईः- आखिरकार ऐसी क्या वजह है जिला मुख्यालय पर बैठे जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी इन झोलाछाप बंगाली चिकित्सकों पर कार्रवाई नहीं करना चाहते।


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