भारतीय जोतिष विज्ञान खोगोलिय घटना मनुष्य जीवन~~

सनातन सँस्कृति में का आधार चार वेद अठारह पुराण है~~

जिस तरह अंतरिक्ष मे साथ ग्रह पिंड है ~~

सूर्य चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि दो छाय ग्रह राहु केतु है~~

इन का कोई पिंड नही है पर प्रभाव पूरा है~~


पं कपिल शर्मा काशी महू
9630 101010~~



भारतीय जोतिष विज्ञान खोगोलिय घटना मनुष्य जीवन
सनातन सँस्कृति में का आधार चार वेद अठारह पुराण है
जिस तरह अंतरिक्ष मे साथ ग्रह पिंड है
सूर्य चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि
दो छाय ग्रह राहु केतु है
इन का कोई पिंड नही है
पर प्रभाव पूरा है
उपरोक्त नव ग्रहों का प्रभाव पृथ्वी पर समस्त जीवों पर होता है
जोतिष विज्ञान के आधार पर समस्त जीव ग्रहों के अधीन है
जोतिष एक बहुत ही गूढ़ रचनात्मक विज्ञान है अंधविश्वास नही है
ग्रह नक्षत्रों की गणना है
ग्रह नक्षत्रों का मनुष्य के जीवन पर सीधा प्रभाव होता है
ग्रहों के राशि परिवर्तन युक्ति योग आदि पर शोध कर  सभी सांसारिक घटनाओं के बारे में जाना जाता है बताया जाता है
आज के भौतिक वादी जो ना पूरे भौतिक वादी है ना ही पूरे धार्मिक वो अल्प ज्ञान के चलते जोतिष पर व्यंग कर के अपने आप को ज्ञानी बताते है ये उन की अज्ञानता एवं जानकारी का अभाव मात्र है
गुजरात भूकम्प  हो या सुनामी  केदार नाथ की घटना हो इन घटनाओं के घटने से पहले देश के कई प्रतिष्ठित पंचांगों ने पंचांगों के निर्माण करता जोतिष के विद्वानों ने  पहले इस कि घोषणा कर दी थी ये कोई चमत्कार नही था मात्र जोतिष विज्ञान एवं ग्रह स्थिति की गणना  के आधार पर की गई भविष्य वाणिया थी
मजे की बात तो ये है कि जोतिष विज्ञान पर टिपण्णी वो लोग करते है जिन को ये भी पता नही की उन का जन्म दिन हिन्दू पञ्चाङ्ग की कौनसी तिथि को आता है हिन्दू पञ्चाङ्ग के हिसाब से किस महीने में आता है
जिन को अपनी जन्म तिथि पता नही
अंग्रेजी तारीख से जन्म दिन मनाते है वो जोतिष पर व्यंग करते है बड़ा हास्यपद है ये
विषय का विस्तार नही करते हुवे
मूल विषय पर ध्यान आकर्षण
सूर्य ग्रहण चन्द्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिस का सीधा सम्बन्ध मनुष्य जीवन पर होता है
सूर्य ग्रहण अमावस्या को चन्द्र ग्रहण पूर्णिमा को होते है
ग्रहण अलग अलग राशियों पर एवं अलग अलग नक्षत्रों पर होते है
बारह राशि सत्ताईस नक्षत्र  अभिजीत की गणना के साथ अठाइस नक्षत्र होते  है हर वर्ष एक या दो ग्रहण जरूर होते है
इस वर्ष भी सोलह /सतरा जुलाई की मध्य रात्रि में गुरु पूर्णिमा की रात में मंगल वार को  चन्द्र ग्रहण हो रहा है
ग्रहण का वेध  शाम को 4,,30 पर लगेगा
ग्रहण का प्रारम्भ स्पर्श  1,35 मध्य रात्रि को होगा ग्रहण का मध्य रात्रि ,2,,58 पर होगा,,,एवं ग्रहण का मोक्ष 4,,30 पर समाप्ति है
ये ग्रहण खग्रास चन्द्र ग्रहण है
यह ग्रहण  उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पर धुन मकर राशि मंडल पर मान्य है
अतः इन राशि नक्षत्र के लोगो को ग्रहण दर्शन नही करना चाहिए
यह ग्रहण तुला ,कर्क ,मीन ,कुम्भ, राशियों को लिए शुभ है
धनु मकर कन्या वर्षभ राशि के लिए अशुभ है
मेष सिंह मिथुन वृश्चिक के लिए सामान्य है
ग्रहण काल मे क्या करे क्या ना करे
ग्रहण शुरू होने से पहले स्न्नान कर के स्वछ वस्त्र धारण कर के अपने गुरु मंत्र इष्ट मन्त्र का जाप करे जाप के बाद हवन करें सप्त धन्य का दान करे जाप पूरे ग्रहण के पर्व काल मे करे
स्पष्ट है 1,35, रात से 4,,30 तक करे
उस के बाद दान करे इश्नां कर के हवन करें गाय को चारा गुड़ खिलाये
अगर आप के कोई गुरु नही है या आप को मन्त्रो की जानकारी नही है
तो आप रामरक्षा स्त्रोत विष्णु सहस्रनाम  का पाठ कर सकते है
शिव पंचाक्षर स्तोत्र मन्त्र हनुमान चालीसा कर सकते है
ये भी ना कर सके तो
श्री राम जय राम जय जय राम इस तेरह अक्षर के मन्त्र का जाप कर सकते है
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे है
इस सोलह अक्षर के मन्त्र का भी जाप कर सकते है
हनुमान जी के भक्तों के लिए ये ग्रहण हनुमान जी को प्रसन्न करने का विशेष योग है
विचार कीजिये सभी हनुमान भक्त हनुमान चालीसा तो रोज पड़ते है
हनुमानचालीसा में स्पष्ट लिखा है
जै जै हनुमान गोसाई कृपा करो गुरु देव की नाई
ग्रहण गुरु पूर्णिमा की रात में है
तो गुरु रूप हनुमान जी को हनुमान चालीसा से प्रसन्न करें  गुरु पूर्णिमा है हनुमान जी राम नाम के जाप से भी प्रसन्न होते है राम नाम का जाप करे
विशेष योग ये है कि ग्रहण मंगल वार को है
ग्रहण में क्या ना करे ग्रहण काल मे सोये नही कुछ भी खाये नही मैथुन ना करें व्यर्थ बाते ना करे मोबाइल ना चलाये 
वृद्ध बीमार बच्चों के लिये कोई नियम नही होता वो अपनी अनुकूलता से कार्य करे ग्रहण वाले दिन मासा हार शराब का सेवन नही करे ग्रहण काल मे पानी चाय नही पिये
भगवत भजन करे दान करे
ग्रहण के अगले दिन से पवित्र श्रवण मास है शिव मंदिर जाये
विशेष ग्रहण के दिन यात्रा ना करे  घर के खाद्य अन्न में जल में घी तेल में कुशा डाले  तुलसी की पत्ती डाले
ग्रहण काल का अन्न जल दूसरे दिन ना खाये नव निर्माण करें
मन्त्र स्त्रोत्र की पुस्तकें गीता प्रेस गोरख पुर की ले  गीता प्रेस की पुस्तकों में शुद्ध  मन्त्र स्त्रोत लिखे होते है
जगदम्बा माँ कल्याण करे
पं कपिल शर्मा काशी 9630101010


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