बड़वानी~विधिक सेवा प्राधिकरण ने बुजुर्ग को दिलाया ‘अपना घर’~


बड़वानी /मनुष्य तिनका-तिनका इकट्ठा कर बच्चों के लालन-पालन का दायित्व निभाते हुए अपना आशियाना बनाता है, वह भविष्य के प्रति इतना आश्वस्त रहता है कि गलती से भी यह नहीं सोचता की उसके अपने बच्चे उसे ही एक दिन वृद्धावस्था में बेघर कर देगें। ऐसा ही वाकिया पलसुद निवासी वृद्ध मुकुन्द राठौड़ के साथ घटित हुआ जब उसे छोड़ उसके एकमात्र बेटे ने अपना मुकाम कहीं ओर कर लिया, ऐसी स्थिति में बुजुर्ग श्री राठौर निराश्रित हो गए तथा गलियों में बैठकर अपना जीवन पराश्रित हो गए तथा गलियों में बैठकर अपना जीवन पराश्रित होकर जी रहे थे। इसे देखकर राठौड़ समाज के लोगों ने उन्हें सहायता पहुंचाकर प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी किन्तु आश्रय का अभाव और बरसात के दिनों में बाहर जीवन यापन कहीं न कहीं समाज के लोगों एवं स्थानीय पेरालिगल वाॅलेन्टियर्स को ठीक नहीं लग रहा था। आखिरकार पेरालिगल वाॅलेन्टियर द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में उक्त बुजुर्ग को वस्तुस्थिति से संबंधित जानकारी देकर आश्रय की गुहार लगाई जिसपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रामेश्वर कोठे के निर्देशन में तथा प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश श्री हेमन्त जोशी के संयोजन में बुजुर्ग को आशाग्राम ट्रस्ट द्वारा संचालित ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम पहुंचाया गया।
इस दौरान आशाग्राम ट्रस्ट के पी.आर.ओ. सचिन दुबे, पेरालिगल वाॅलेन्टियर सचिन पाटीदार, मनीष गुप्ता, राठौड़ समाज के श्री ताराचन्द राठौड़, मिश्रीलाल राठौड़, कालू चिमा नायक, निलेश, लालचन्द, जगदीश राठौड़, हिमांशु वाबले आदि उपस्थित थे।


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