*मनावर~ विधायक डाँ हिरालाल अलावा ने विधानसभा में संविधान की पांचवी अनुसूचि को लागू करने की मांग जोरदार मांग उठाई*~~
                                
*प्रदेश में लागू करने के लिये कई विधायकों का मिला सर्मथन*~~


निलेश जैन मनावर ~~



आज 20 जुलाई  को मध्यप्रदेश के विधानसभा में दम के साथ संविधान की पांचवी अनुसूचि,पैसा कानून और वनाधिकार के उल्लंघन पर मनावर विधायक डाँ हिरालाल अलावा ने  अपनी बात रखते हुऐ कहा कि पांचवी अनुसूचि के रास्ते ही आदिवासियों का विकास संभव है । पांचवी अनुसूचि के बिना आदिवासियों के विकास की कल्पना भी नही कर सकते है ।1996 में पैसा कानून बनने के बाद भी आज तक उसकी नियामवली नही बनी उसके ऊपर भी सवाल उठाये साथ के आदिवासियों के लिए संविधान सभा मे दम के साथ संविधान में जनजाति शब्द की बजाय आदिवासी शब्द रखने की मांग सबसे पहले पूर्व हाँकी कप्तान जयपाल सिंह मुंडा ने रखी थी । साथ मे यह भी कहा कि हमे जनजाति नही हमे आदिवासी ही कहा जाए क्योँकि आदिवासी शब्द से हमारे इतिहास का बोध होता है आदिवासी का अर्थ आदिकाल से भारत भूमि पर रहने वाले लोग है । जिसकी पुष्टि 5 जनवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस मार्कडेय काटजू के माध्यम से आये जजमेंट में हो चुका है। यह भी कहा कि आर्टिकल 275 (1) में ट्राइबल सब प्लान में इस बार मध्यप्रदेश में 33 हजार 466 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया लेकिन यह भी वर्तमान जनसंख्या के हिसाब से कम है लेकिन जितना भी है अगर आदिवासी क्षेत्रों में ही खर्च किया जाए तो आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो सकता है । आज के भाषण में प्रदेश के आदिवासी इलाकों की स्थिती दक्षिण अफ्रीका के सियरालियोन जैसे देश से जो कि एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफेम के माध्यम से कराए गए रिसर्च में सामने आया था। आदिवासी इलाकों में बेरोजगारी और कुपोषण जैसे गंभीर हालातो का भी जिक्र किया साथ मे बेरोजगारी और प्रोन्नति में आरक्षण पर विशेष ध्यान देकर उसका समाधान करने के लिए अपनी बात रखी। विधायक ने कहा कि आज देश में जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए टायगर रिजर्व, मैना संरक्षण केंद,भेड़ और बकरी संरक्षण केंद्र बनाने के लिए विशेष कानून बनाये जा रहे है । लेकिन देश के आदिवासियों के संरक्षण के लिए बने कानूनों की अनदेखी की जा रही है ।


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