।।  *सुप्रभातम्*  ।।
               ।।  *संस्था  जय  हो*  ।।
        ।।  *दैनिक  राशि  -  फल*  ।।
        आज दिनांक 23 अगस्त 2019  शुक्रवार संवत् 2076 मास भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि प्रातः 08:09 बजे तक रहेगी उपरांत अष्टमी तिथि लगेगी । आज सूर्योदय प्रातः काल 06:01 बजे एवं सूर्यास्त सायं 06:56 बजे होगा । कृतिका नक्षत्र रात्रि 03:46 बजे तक रहेंगा पश्चात रोहिणी नक्षत्र आरंभ होगा । आज का चंद्रमा प्रातः 08:58 बजे तक मेष राशि में भ्रमण करते हुए वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे । आज का राहू काल प्रातः काल 10:47 से 12:22 बजे तक रहेंगा पश्चात । दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेंगा यदि आवश्यक हो जौ का सेवन कर यात्रा आरंभ करें । जय हो ।

                -:  *विशेष*  :-

*शरद् ऋतु प्रारंभ, श्री कृष्ण जयंती, जन्माष्टमी ( स्मार्त ) , थदडी पर्व ( सिंधी ) , मंवादि, कालाष्टमी, दूर्वाष्टमी व्रत, जीवंतिका पूजन*,
           🌷 *जन्माष्टमी* 🌷
🙏🏻 *ज्योतिष के अनुसार, अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। ये उपाय करने से मनोकामना पूर्ति व धन प्राप्ति के योग भी बन सकते हैं।*
➡ *ये हैं जन्माष्टमी के अचूक 12 उपाय, 1 भी करेंगे तो होगा फायदा*
1⃣ *आमदनी नहीं बढ़ रही है या नौकरी में प्रमोशन नहीं हो रहा है तो जन्माष्टमी पर 7 कन्याओं को घर बुलाकर खीर या सफेद मिठाई खिलाएं। इसके बाद लगातार पांच शुक्रवार तक सात कन्याओं को खीर या सफेद मिठाई बांटें।*
2⃣ *जन्माष्टमी से शुरु कर 27 दिन लगातार नारियल व बादाम किसी कृष्ण मंदिर में चढ़ाने से सभी इच्छाएं पूरी हो सकती है।*
3⃣ *यदि पैसे की समस्या चल रही हो तो जन्माष्टमी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद राधाकृष्ण मंदिर जाकर दर्शन करें व पीले फूलों की माला अर्पित  करें। इससे आपकी परेशानी कम हो सकती है।*
4⃣ *सुख-समृद्धि पाने के लिए जन्माष्टमी पर पीले चंदन या केसर से गुलाब जल मिलाकर माथे पर टीका अथवा बिंदी लगाएं। ऐसा रोज करें। इस उपाय से मन को शांति प्राप्त होगी और जीवन में सुख-समृद्धि आने के योग बनेंगे।*
5⃣ *लक्ष्मी कृपा पाने के लिए जन्माष्टमी पर कहीं केले के पौधे लगा दें। बाद में उनकी नियमित देखभाल करते रहे। जब पौधे फल देने लगे तो  इसका दान करें, स्वयं न खाएं।*
6⃣ *जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता भेंट करें और उसके बाद इस पत्ते पर रोली (कुमकुम) से श्री यंत्र लिखकर तिजोरी में रख लें। इस उपाय से धन वृद्धि के योग बन सकते हैं।*
7⃣ *जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं।इसमें तुलसी के पत्ते अवश्य डालें। इससे भगवान श्रीकृष्ण जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं।*
8⃣ *जन्माष्टमी पर दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें। इस उपाय से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। ये उपाय करने वाले की हर इच्छा पूरी हो सकती है।*
9⃣ *कृष्ण मंदिर जाकर तुलसी की माला से नीचे लिखे मंत्र की 11 माला जप करें। इस उपाय से आपकी हर समस्या का समाधान हो सकताहै।*
*मंत्र- क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरि:परमात्मने* *प्रणत:क्लेशनाशाय गोविंदय नमो नम:*
🔟 *भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबर धारी भी कहते हैं, जिसका अर्थ है पीले रंग के कपड़े पहनने वाला। जन्माष्टमी पर पीले रंग के कपड़े, पीले फल व पीला अनाज दान करने से भगवान श्रीकृष्ण व माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं।*
1⃣1⃣ *जन्माष्टमी की रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें तो जीवन में सुख-समृद्धि आने के योग बनाते हैं।*
1⃣2⃣ *जन्माष्टमी को शाम के समय तुलसी को गाय के घी का दीपक लगाएं और ॐ वासुदेवाय नम: मंत्र बोलते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें।*

🌷 *जन्माष्टमी व्रत-उपवास की महिमा* 🌷
🙏🏻 *जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए, बड़ा लाभ होता है ।इससे सात जन्मों के पाप-ताप मिटते हैं ।*
🙏🏻  *जन्माष्टमी एक तो उत्सव है, दूसरा महान पर्व है, तीसरा महान व्रत-उपवास और पावन दिन भी है।*
🙏🏻 *‘वायु पुराण’ में और कई ग्रंथों में जन्माष्टमी के दिन की महिमा लिखी है। ‘जो जन्माष्टमी की रात्रि को उत्सव के पहले अन्न खाता है, भोजन कर लेता है वह नराधम है’ - ऐसा भी लिखा है, और जो उपवास करता है, जप-ध्यान करके उत्सव मना के फिर खाता है, वह अपने कुल की 21 पीढ़ियाँ तार लेता है और वह मनुष्य परमात्मा को साकार रूप में अथवा निराकार तत्त्व में पाने में सक्षमता की तरफ बहुत आगे बढ़ जाता है । इसका मतलब यह नहीं कि व्रत की महिमा सुनकर मधुमेह वाले या कमजोर लोग भी पूरा व्रत रखें ।*
💥 *बालक, अति कमजोर तथा बूढ़े लोग अनुकूलता के अनुसार थोड़ा फल आदि खायें ।*
🙏🏻 *जन्माष्टमी के दिन किया हुआ जप अनंत गुना फल देता है ।*
🙏🏻 *उसमें भी जन्माष्टमी की पूरी रात जागरण करके जप-ध्यान का विशेष महत्त्व है। जिसको क्लीं कृष्णाय नमः मंत्र का और अपने गुरु मंत्र का थोड़ा जप करने को भी मिल जाय, उसके त्रिताप नष्ट होने में देर नहीं लगती ।*
🙏🏻 *‘भविष्य पुराण’ के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत संसार में सुख-शांति और प्राणीवर्ग को रोगरहित जीवन देनेवाला, अकाल मृत्यु को टालनेवाला, गर्भपात के कष्टों से बचानेवाला तथा दुर्भाग्य और कलह को दूर भगानेवाला होता है।*

🌷 *कृष्ण नाम के उच्चारण का फल* 🌷
🙏🏻 *ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार*
*नाम्नां सहस्रं दिव्यानां त्रिरावृत्त्या चयत्फलम् ।।*
*एकावृत्त्या तु कृष्णस्य तत्फलं लभते नरः । कृष्णनाम्नः परं नाम न भूतं न भविष्यति ।।*
*सर्वेभ्यश्च परं नाम कृष्णेति वैदिका विदुः । कृष्ण कृष्णोति हे गोपि यस्तं स्मरति नित्यशः ।।*
*जलं भित्त्वा यथा पद्मं नरकादुद्धरेच्च सः । कृष्णेति मङ्गलं नाम यस्य वाचि प्रवर्तते ।।*
*भस्मीभवन्ति सद्यस्तु महापातककोटयः ।* *अश्वमेधसहस्रेभ्यः फलं कृष्णजपस्य च ।।*
*वरं तेभ्यः पुनर्जन्म नातो भक्तपुनर्भवः । सर्वेषामपि यज्ञानां लक्षाणि च व्रतानि च ।।*
*तीर्थस्नानानि सर्वाणि तपांस्यनशनानि च ।* *वेदपाठसहस्राणि प्रादक्षिण्यं भुवः शतम् ।।*
*कृष्णनामजपस्यास्य कलां नार्हन्ति षोडशीम् । (ब्रह्मवैवर्तपुराणम्, अध्यायः-१११)*
🙏🏻 *विष्णुजी के सहस्र दिव्य नामों की तीन आवृत्ति करने से जो फल प्राप्त होता है; वह फल ‘कृष्ण’ नाम की एक आवृत्ति से ही मनुष्य को सुलभ हो जाता है। वैदिकों का कथन है कि ‘कृष्ण’ नाम से बढ़कर दूसरा नाम न हुआ है, न होगा। ‘कृष्ण’ नाम सभी नामों से परे है। हे गोपी! जो मनुष्य ‘कृष्ण-कृष्ण’ यों कहते हुए नित्य उनका स्मरण करता है; उसका उसी प्रकार नरक से उद्धार हो जाता है, जैसे कमल जल का भेदन करके ऊपर निकल आता है। ‘कृष्ण’ ऐसा मंगल नाम जिसकी वाणी में वर्तमान रहता है, उसके करोड़ों महापातक तुरंत ही भस्म हो जाते हैं। ‘कृष्ण’ नाम-जप का फल सहस्रों अश्वमेघ-यज्ञों के फल से भी श्रेष्ठ है; क्योंकि उनसे पुनर्जन्म की प्राप्ति होती है; परंतु नाम-जप से भक्त आवागमन से मुक्त हो जाता है। समस्त यज्ञ, लाखों व्रत तीर्थस्नान, सभी प्रकार के तप, उपवास, सहस्रों वेदपाठ, सैकड़ों बार पृथ्वी की प्रदक्षिणा- ये सभी इस ‘कृष्णनाम’- जप की सोलहवीं कला की समानता नहीं कर सकते*
🌷 *ब्रह्माण्डपुराण, मध्यम भाग, अध्याय 36 में कहा गया है :*
*महस्रनाम्नां पुण्यानां त्रिरावृत्त्या तु यत्फलम् ।*
*एकावृत्त्या तु कृष्णस्य नामैकं तत्प्रयच्छति ॥१९॥*
🙏🏻 *विष्णु के तीन हजार पवित्र नाम (विष्णुसहस्त्रनाम) जप के द्वारा प्राप्त परिणाम ( पुण्य ), केवलएक बार कृष्ण के पवित्र नाम जप के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है ।* जय हो

                  *ज्योतिषाचार्य*   
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245,एम.जी.रोड (आनंद चौपाटी)धार, एम.पी,
                   मो.नं.  9425491351

                   *आज का राशि फल*          

          मेष :~ शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। पारिवारिक वातावरण आनंदप्रद रहेगा। मित्रों, स्नेहीजनों के साथ मेल-मिलाप होगा, परंतु मध्याहन के बाद आरोग्य में परिवर्तन हो सकता है। परिवारजनों के साथ मनदुःख के प्रसंग भी बन सकते है। खान-पान में संयम रखें । बातचीत करते समय किसी के साथ उग्रता पूर्ण भाषा का प्रयोग न हो जाए ध्यान  रखें । 

          वृषभ :~ आपके मन की द्विधापूर्ण स्थिति से आप असंतुष्ट रहेंगे। सर्दी-खांसी, कफ या बुखार का उपद्रव हो सकता है। धार्मिक कार्यो के पीछे खर्च हो सकता है। स्वजनों से वियोग होगा। परंतु मध्याहन के बाद कुछ अनुकूलता रह सकती है। कार्य करने से उत्साह में वृद्धि हो सकती है। आर्थिक लाभ होगा। मित्रों तथा संबंधीजनों से मिलना होगा। शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। परिवार में वातावरण आनंदित रहेगा।

          मिथुन :~ नए मित्र बन सकते हैं, जो कि भविष्य में आपको लाभदायी सिद्ध हो सकते हैं। अपेक्षा से अधिक धन लाभ होगा। प्रवास या पर्यटन का आयोजन हो सकता है। सरकारी कार्यों में लाभ होगा। परंतु मध्याहन के बाद कुछ सावधानी पूर्वक बरते। धर्म, कर्म करने से अधिक हानि न हो ऐसी परिस्थिति का निर्माण हो सकता है। 

          कर्क :~ आप आज दिन के प्रारंभ में शारीरिक तथा मानसिकरुप से व्याकुलता और अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। क्रोध की मात्रा अधिक रहने से किसी के साथ मनदुःख भी हो सकता है, परंतु मध्याहन के बाद आप की शारीरिक स्थिति में सुधार होगा। परिवार में भी आनंद का वातावरण बना रहेगा। व्यावसायिक स्थल पर उच्च अधिकारीयों के साथ आवश्यक चर्चाएँ भी होंगी।

          सिंह :~ परिवार तथा व्यावसायिक क्षेत्र में आज का दिन अच्छी तरह से बीतेगा । क्योंकि दोनो स्थलों पर आवश्यक विषयों पर चर्चाएँ होंगी। कार्य का बोझ बढ़ने से स्वास्थ्य में कुछ शिथिलता रहेगी। तथा मध्याहन के बाद स्वास्थ्य में सुधार होगा। सामाजिक कार्यो में भाग लेने की इच्छा परिपूर्ण हो सकती है।

          कन्या :~ आज आपका मन गहन चिंतन शक्ति तथा रहस्यमय विद्याओं के प्रति आकर्षित होगा । आज सोचसमझकर बोले , जिससे किसी के साथ विवाद या मन दुःख न हो। स्वास्थ्य में कुछ अस्वस्थता बनी रहेगी। मध्याहन के बाद प्रवास का आयोजन कर सकते हैं। धार्मिक तथा मांगलिक कार्यों में जाने का प्रसंग उपस्थित होगा।

          तुला :~ आज आप सामाजिक तथा बाह्य क्षेत्रों में प्रशंसा प्राप्त कर सकेंगे। प्रिय पात्र मिलने से आपका मन पुलकित होगा। मध्याहन और संध्याकाल के बाद आप अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखें । संभवतः प्रवास टाले। आध्यात्मिक सिद्धि मिलने के योग हैं।

          वृश्चिक :~ आज आपका दिन बहुत प्रवृत्तिमय और आनंदमय बीतेगा । आप व्यवसाय या व्यापार के कार्य में व्यस्त रहेंगे। तथा उससे लाभ भी होगा। अधिक लोगों के साथ आज मिलने के कारण विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। घर में आनंद छाया रहेगा। सामाजिक क्षेत्र में आप के कार्य की प्रशंसा होगी।

          धनु :~ आज प्रातःकाल में आप शारीरिक तथा मानसिकरुप से शिथिलता का अनुभव करेंगे। कार्य के लिए कुछ अधिक ही भागदौड मची रहेगी तथा परिश्रम की तुलना में प्राप्ति अल्प होगी। परंतु मध्याहन और संध्याकाल के बाद आप शारीरिक तथा मानसिक स्वस्थता का अनुभव करेंगे। आर्थिक लाभ होने की संभावना है। आर्थिक आयोजन भी कर सकेंगे।

          मकर :~ आज अधिक भावनाशील, संवेदनशील न बने। जलाशय, जमीन-जायदाद के दस्तावेज आदि से आज दूर रहें । कुछ मानसिक अस्वस्थता रहेगी, इसलिए स्वास्थ्य संभाले और साथ में जिद्दी व्यवहार टाले। सरकार तथा उपरी अधिकारी के विषय में कार्य सफलता मिलेगी।

          कुंभ :~ आज आपको नए कार्य करने की प्रेरणा अवश्य मिलेगी, परंतु विचारों में शीघ्र परिवर्तन आने के कारण महत्वपूर्ण कार्यों में अंतिम निर्णय न ले । लेखन कार्य के लिए दिन अच्छा है।  किसी के वाणी और व्यवहार से आपको ठेस लग सकती है। मकान अथवा भूमि से सम्बंधित दस्तावेजों की कार्यवाही आज न करें। मानसिक व्यग्रता दूर करने के लिए आप आध्यात्मिकता की शरण ले सकते हैं।

          मीन :~ आज धन का खर्च अधिक हो जाने से आपका मन व्यग्र रहेगा । मनमुटाव व तनाव के प्रसंग न बने इसका ध्यान रखते हुए आप अपनी वाणी पर संयम रखें। आर्थिक विषयों में भी संभलकर चले। व्यावसायिक क्षेत्र में स्पर्धा के सामने आपको टिकना पडे़गा। परिवर्तित हो रहे विचारों के बीच में द्विधायुक्त स्थिति का निर्माण होगा।  ( डाँ. अशोक शास्त्री  )

।।  शुभम्  भवतु  ।।  जय  सियाराम   ।।
।।  जय  श्री  कृष्ण  ।।  जय  हो,,,,,,,,,।।


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