*बड़वानी~रात ही रात फिर खोले गये सरदार सरोवर के 8 गेटस~~

*नर्मदा घाटी विकास मंत्री ने फिर दिये आश्वासन! जबरन हटाये गये परिवारों ने जताया आक्रोश!*~~

*50 दिनों में 139 मीटर तक पानी भरने की अमानवीय साजिश होगी तो डूबेगी सरकारे भी!*~~

*131.5 मीटर तक पानी भरने में NCA के आदेश का उल्लंघन| फिर भी गुजरात शासन ने बतायी जीत|*~~

*बांध के नीचेवास में भी भुगत रहे गाँव-शहर, बांध से बढ़ी बाढ़ का असर!*~~



बड़वानी के कृषि उपज मंडी में कल, नर्मदा घाटी के सैकड़ों बहनों-भाइयों की खुली चर्चा हुई, नर्मदा घाटी विकास मंत्री श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल जी के साथ| पुरे तीन घंटों तक लोगों ने उन्हें हकीकत बतायी, सवाल किये और जवाब भी लिए!

कल की ही ताजा खबर, कि ‘गुजरात ने सरदार सरोवर सभी गेटस बंद कर दिये’, सुनकर उद्विग्न लोगों ने पहले बघेल जी के समक्ष भी गुजरात की इस मनमानी का विरोध दर्ज किया| गुजरात से खबर है कि 50 दिनों में भरेंगे पानी, 138.68 मीटर तक! 12 अगस्त तक 131.68 मी. के बदले 131.5 मी. तक पानी भरके पूजा और स्व-प्रशंसा करने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने लिये निर्णय का भी उल्लंघन किया है| म.प्र. ने 12 जुलाई 2019 की बैठक में पानी भरने का ही विरोध जाकर सभा त्याग किया था| तो गुजरात की यह मनमानी भी ख़त्म होनी चाहिए, यह कहना है आंदोलन का! क्या मध्य प्रदेश शासन इसे जानती है या मानती है? क्या और कैसी तैयारी है इस अमानवीय निर्णय की राजनीति से निपटने की? यह कहते हुए कि गेटस बंद करना या हजारों परिवार रहते हुए भी उनके गाँव-घर, खेत-पेड़ डुबाना भी अघोरी कृत्य होगा घाटी की ओर से देवराम कनेरा, भागीरथ धनगर, सनोबर मंसूरी तथा कैलाश यादव, पेमा भिलाला, मेधा पाटकर ने शुरू में ही अपनी आपत्तियाँ दर्ज की|


           मध्य प्रदेश की नयी सरकार ने संवाद जारी रखते हुए भी पुनर्वास का कार्य सुचारू, रुप से, गतिमानता से आगे न बढाया जाने पर आज डूब द्वार में खड़ी हो गयी, यही था आक्रोश| अपने - अपने गाँव के साथ मूल मुद्दों को रखकर बताया गया कि हजारों परिवारों का पुनर्वास बाकी है| और नर्मदा घाटी मंत्रालय ने सुचारू रूप से पुनर्वास के हर मुद्दे पर संगठन की साथ लेकर भ्रष्टाचार मुक्त प्रक्रिया अपनाना भी बाकी है| आज तक कई नीतिगत निर्णय नहीं लिये जाने से, हर मुद्दे से प्रभावित सैकड़ों की अर्जियाँ GRA के समक्ष तथा पुनर्वास के आदेशों का पालन भी प्रलंबित रहा है| प्राधिकरण में पूर्व के जो अधिकारी शासन-प्रशासन को भ्रमित कर रहे है, उन्हें पहचानना जरूरी है| झा आयोग के अहवाल से जानना चाहिए, GRA का कार्य संथ गति से नहीं, हर कार्य युध्द स्तर पर होना था, आज भी होना चाहिए| अन्यथा संघर्ष के सिवाय रास्ता क्या बचेगा? हमारी म.प्र. की संवादशील शासन से अपेक्षा है लेकिन कार्यही विश्वास देता है|

        अभी-अभी जबरन सामान, मवेशी, के साथ हटाये गये नन्हे मुन्हे, गर्भार माता, कही बीमारों के साथ हटाये गये कुछ परिवारजनों ने परिवारों ने अधिकारियों से की जा रही अवमानना पर सवाल उठाकर कहा कि “हम विस्थापित है, आतंकवादी नहीं|” हमारा हक मांगते हुए आज तक सब कुछ पाया है, भीख नहीं!

          मध्य प्रदेश शासन ने गुजरात के और केंद्र के दुराग्रह के सामने उठाए सवालों का स्वागत करते हुए राज्य शासन ने पूरे प्रदेश को जगाने की, सर्वदलीय बैठक और निर्णय की तथा पुनर्वास बाकी होते हुए डूब गैरकानूनी अत्याचार, वह भी आदिवासी क्षेत्र में हो रहा है, इसे नकारने की और कार्य सहभागिता से आगे बढ़ाने की जरूरत जोर शोर से पेश की..... उदाहरणों के साथ| बिजली न देने, डूबक्षेत्र के जंगल की भरपाई न देने तथा पुनर्वास व पर्यावरणीय कार्य की भरपाई न देने की स्थिति में मध्य प्रदेश अपने पानी का नियमन विस्थापितों के और राज्य के हित में करे| कोई समझौता न करे, यह आग्रह है रखा गया|

राहुल यादव, जगदीश पटेल, कनकसिंग भाई, सावित्री बहन, देवेन्द्र सोलंकी, सुरेश पाटीदार, विजय मरोला, हिरदाराम भाई, मुकेश भगोरिया, एवं मेधा पाटकर जी ने स्पष्ट किया कि -

·      आंदोलन ने पेश किये कुल 30 से अधिक आवेदनों पर निर्णय और लिखित जवाब जरुरी है|

·      हर गाँव में मात्र सूचियाँ चस्पा करने से अनुदान के पात्र नामों पर आपत्ति, छूटे नाम देना इत्यादि में समय खोता जाएगा| शिबिर के द्वारा, हर गाँव में ही सब निर्णय और संख्या को अंतिम रूप देना जरूरी है| उसका समयबध्द कार्यक्रम घोषित किया जाए| तत्काल अमल करें|

·      सर्वोच्च अदालत में तथा उच्च न्यायालय में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से, पूर्व के शासनकाल में पेश की याचिकाओं की वापसी करते हुए, उन मुद्दों पर सैकड़ों परिवारों के सम्बन्ध में निर्णय प्रलंबित है, उसका निराकरण किया जाए|

·      पुनर्वास स्थलों पर सुविधाओं में ठेकेदारों का भ्रष्टाचार तथा अन्य कार्यों में पुनर्वास कार्यालय से GRA तक दलालों की पहुँच ख़त्म की जाये|

·      केवट, कुम्हार, दुकानदार, पुनर्वास स्थल के लिए जमीन छीन ली है, ऐसे परिवार, कारीगर, आदि के संबंध में नीति के तहत हक दिए जाए|

·      जिन परिवारों का सालों से भू-अर्जन बाकी रहा, उनके मुआवजा के लिए 2013 के ही कानून का सख्त पालन किया जाए|

·      कई गांवों में शाला पुनर्वास स्थलों से वापस लाकर गरीब बच्चों की शिक्षा पूर्णवत हो| वह भी तत्काल!

·      ‘पेसा’ कानून का पालन ही आदिवासी स्वशासन एवं सम्मान की परीक्षा होगी|  हर गाँव सभाओं की पुनर्वास पर दी गयी राय, प्रस्तावों का सम्मान किया जाए| आदिवासी स्वशासन तभी आएगा, न केवल अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने से!

मंत्री बघेल जी ने हर मुद्दे पर जवाब दिया...... “ मैं आपके साथ हूँ| अधिकारियों को समझा दूंगा कि वे किसी को अपमानित न करें| बिना पुनर्वास डूब मुझे भी नामंजूर है| मैं गाँव-गाँव की समिति में आंदोलनकारी प्रतिनिधियों को शामिल करूँगा| गलत सदस्यों को निकाल दूंगा| उन्होंने कहा, गुजरात नहीं मानता...... पर हम भी नहीं मानते उनकी गुर्मी| पिछली सरकार ने की गलतियों के बाद हमें समय चाहिये, सब कुछ ठीक करने! उनके अनुसार आंदोलन ने उठाये मुद्दों तथा आवेदनों पर हमने कुछ जवाब दिये है.... अन्य भी देंगे|” आंदोलन का कहना है कि उन्हें कोई जवाब प्राप्त नहीं हुए है| राजघाट, पिछोड़ी व अन्य गांवों से उठाये गये मवेशी परिवारों को चारा, खाना खिलाएंगे लेकिन पुनर्वास स्थलों पर लोगों ने चिल्लाकर कहा – ‘हम टीन शेड्स में नहीं जायेंगे| वहाँ 10’×12’ की शेड्स में हम सामान, मवेशी, अनाज इत्यादि के साथ कैसे रहेंगे? हमें स्थायी पुनर्वास चाहिए| सभी मुद्दों पर निर्णय और अमल हो| अदालतों में टंगी केसों की वापसी चाहिए!’  


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