झाबुआ~कैसे होगा भारत निर्माण.... बच्चो के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, -टपकती छप ओर बिना शिक्षक के पढऩे को मजबूर बच्चे -जिले में सरकारी स्कूलों के हाल-बेहाल ~~

झाबुआ। संजय जैन~~

जिले में सरकारी स्कूलों के हाल बेहाल है। ग्रामीण क्षेत्रो में सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चे अपनी जान को हथेली पर रखकर पढ़ाई कर रहे है। बारिश के दिनों में टपकती छत के नीचे बैठकर पढऩे को मजबूर है। ग्रामीण क्षेत्रो में बच्चे भारी बारिश के बीच भी स्कूलों में पहुच रहे है किन्तु सरकारी स्कूलो में स्थिति बेहद खराब है। कही शिक्षक नही है, स्कूल भवन जर्जर है, तो मध्यान्ह भोजन की स्थिति भी खराब है।

-टपकती छत के नीचे बैठने को मजबूर

झाबुआ जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर नवीन प्राथमिक विद्यालय रिगनियापाडा देदला की स्थिति बेहद खराब है। सैकड़ो बच्चे टपकती छत के नीचे बैठने को मजबूर है। छोटे -छोटे बच्चे अपनी जान को हथेली पर रखकर पढ़ाई कर रहे है। स्कूल भवन जर्जर अवस्था मे है। स्कूल के सभी कमरों में पानी टपक रहा है, ओर बच्चे बिना टाटपट्टी के जमीन पर पानी मे बैठकर पढ़ाई कर रहे है। जर्जर भवन के साथ ही यंहा बहुत बड़ी अनियमितता देखने को मिली,स्कूल में बच्चे जर्जर भवन के नीचे बैठकर भी पडऩे को तैयार है किंतु बच्चो को पढ़ाने वाले शिक्षक स्कूल में दिखाई नही दिए। 

-खेत पर कार्य करने में व्यस्त 

टीम जब स्कूल में पहुची तो हमने देखा कि स्कूल में छोटे-छोटे बच्चे टपकती छत के नीचे पानी मे भीगते हुए भी शिक्षक का इंतजार कर रहे है,लेकिन स्कूल में पदस्थ शिक्षक अपने खेत पर कार्य करने में व्यस्त थे। बच्चो ओर मध्यान्ह भोजन समूह रसायनो से शिक्षक के बारे में जानकारी लेना चाही तो ज्ञात हुआ कि शिक्षक अपने खेत पर है, ओर बच्चो को जर्जर भवन में टपकती छत के निचे अपने हाल पर छोड़ रखा है। 

-झोंक रहे  बच्चो के भविष्य को अंधकार में 

वही मध्यान्ह भोजन की बात की जाए तो यंहा मध्यान्ह भोजन भी अनियमितता के साथ दिया जा रहा है, बच्चो को बिना मेन्यू के साथ कभी भोजन दिया जा रहा है तो कभी नही। जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति को देखते हुए यही लगता है कि देश का भविष्य खतरे में है,ओर इसका सीधा-सीधा जिम्मेदार शिक्षा विभाग है। क्योकि उच्च अधिकारी जमीनी स्तर पर अपने कार्य को पूरा नही कर रहे है। जिसका फायदा उठाकर इस तरह लापरवाह शिक्षक बच्चो के भविष्य को अंधकार में झोंक रहे है।

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