सरदारपुर~सुषमाजी के दुःखद निधन पर अमझेरावासीयो ने शोकसभा कर दी श्रध्दांजली~~

अमझेरा कि बहू थी सुषमाजी स्वराज - यादव~~


सरदारपुर  (शैलेन्द्र पँवार)



सुषमाजी स्वराज के दुःखद निधन खबर लगते ही देशभर मे शौक पसर चूका था तो वही धार जिले के सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र के ग्राम पंचायत अमझेरा मे मातम सा छा गया! ऐसा होना भी लाजमी था क्योंकि यहाँ के रहवासीयो ने हमेशा से ही सुषमाजी को अपनी गाँव कि बहू दर्जा जो दे रखा था! बुधवार शाम 5 बजे अमझेरावासी ने गाँव के ही बस स्टेण्ड पर शोकसभा का आयोजन किया! यहाँ ग्रामीणो के लिये सुषमाजी भाजपा नेत्री नही वरन उनकी बहू थी! कई सामाजिक संगठनों एवं ग्रामवासियों कि मौजूदगी मे शोकसभा का आयोजन किया गया! इस दौरान वरीष्ठ ग्रामीणजन मन्नालाल शर्मा, गोविन्द गुप्ता, माँगीलाल चौधरी, सत्यनारायण दिक्षीत, पुष्कर दिक्षीत आदि ने अपनी अपनी शौक संवेदनाएँ व्यक्त की!
      इसी तारतम्य मे कमल यादव ने अपनी दुःखद वैदना व्यक्त करते हुए कहा कि सुषमाजी स्वराज देश भर अपनी अमीट छाप छोड़ने वाली हमारे अमझेरा कि बहू है! यादव ने कहा कि सुषमाजी स्वराज अब भले ही हमारे बीच नही रही हो लेकिन उनकी यादें आज भी अमझेरा ग्राम के लोगों के हृदय मे जीवीत है और सदैव जीवीत रहेगी! सुषमाजी अमझेरा को अपना ससुराल मानती थी! क्योंकि उनके पति का काफी समय अमझेरा मे उस वक्त बीता था जब उनके मामा ससुर यहाँ लोकनिर्माण विभाग मे इंजीनियर हुआ करते थे! सुषमाजी को यहाँ के अभिनव कन्या विद्यालय की बालिकाओं और गौशाला कि गौमाताओ से बहुत लगाव रहा! उनका जब भी अमझेरा आगमन हुआ तब वे दोनो स्थानों पर जुरूर गई! राज्यसभा सांसद रहते हुए उन्होंने अमझेरा को रैलवे लाइन से जुड़ने के साथ शहीद गैलरी निर्माण मे 19 लाख, अमका-झमका मंदीर मे मांगलिक भवन निर्माण मे 10 लाख, गौशाला मे दो लाख तथा अभिनव कन्या विद्यालय मे कम्प्यूटर ऐज्यूकेशन हेतु एक लाख का अनूदान प्रदान किया था! अमझेरा को तहसील बनाने हेतु भी वे प्रयासरत थी किन्तु राजनीतिक उपेक्षाओ के कारण अमझेरा तहसील बनने से वंचित रह गया! जब भी अमझेरावासी उनसे मिलते तो वे सारे प्रोटोकाल तोड़कर आत्मीयता के साथ ये कहते हूए उनसे मिलती थी कि मेरे ससुराल के लोग आये है! अमझेरा के विकास मे वे हर पल तत्पर रहती थी! जब वे पहली बार विदीशा से सांसद का चुनाव लड़ी तो अमझेरा से करीब 50 लोगों ने वहाँ पहुँच कर अपनी बहूरानी का स्वागत वंदन, अभिनन्दन मालवी परम्परा के साथ औढनी औढाकर किया था! जिसके कारण वे बहुत अभिभूत हुई थी! आज उनके ना रहने से अमझेरा कि जनता बहुत दुःखी है!


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