खिलेडी/पाना~~आखिरकार एक की जान जाने के बाद भी प्रशासन नहीं जागा कुंभकरण की नींद से   अब ग्रामीणों ने धरना आंदोलन शुरू किया~~

जगदीश चौधरी (खिलेडी)6261395702~~


शहीद रविंद्र सिंह राठौड़ के गांव पाना के ग्रामीणों को आखिर धरना आंदोलन का रास्ता शुक्रवार से अपनाना ही पडा। चेतावनी सुचना दिये जाने के
बाद गुरूवार तक अधिकारियो के आने का इंतजार किया लेकिन अधिकारियो की
उदासिनता ने ग्रामीणो को पुलिया निर्माण के लिये धरने पर बैठने को मजबुर
कर दिया।

धरना स्थल पर हल्का पटवारी व दसाई पुलिस चौकी से एक जवान के
अलावा जानकारी लेने कोई अधिकारी नही पहुंचा। ग्रामीणजन भी धरने को
लेकर कमर कसकर ही बैठे है। सुनवाई नही होने की स्थिती में जल सत्याग्रह व
भुख हडताल की योजना बनाई है पाना के ग्रामीणो को धरने पर बैठने की वजह गांव से लगे हुवे
तालाब के नाले पर पुलिया थी। लगभग 10 वर्ष पुर्व तालाब बनाया गया था। उस
समय इस नाले की चौडाई नाममात्र थी।

समय के साथ पानी के बहाव व आवागमन से
मिटटी का कटाव होते नाले के एक छोर से दूसरे छोर की दुरी लगभग 70
फिट हो चुकी है। इस नाले पर ग्रामीणो ने खजुर के पेड रखकर अपने खेतो पर
पहुंचने का मार्ग बना रखा है जो जोखिम भरा है बीते दिनो पाना के एक किसान
की जुगाड वाली पुल से पांव फिसलने पर डुबने से मोत हो गई। एक ग्रामीण की
बली लेने के बाद भी प्रशासन किसी बडे हादसे का इंतजार कर रहा है।

जुगाड वाली पुलिया की जगह स्थाई समाधान किये जाने की काफी समय से मांग की जा
रही है परंतु शासन प्रशासन ने इस गंभीर समस्या की और अभी तक ध्यान नही दिया।
रविवार तक सामान्य रहेगा धरना, सुनवाई नही होने पर सोमवार से जल
सत्याग्रह व भुख हडताल
धरने पर बैठेगे।

किसान नितेन्द्रसिंह राठौर, घनश्यामसिंह राठौर, कालुराम
पाटीदार, बाबुलाल खराडी, राधेश्याम कटारा, निर्भयसिंह कटारे, नारायण
पाटीदार, पारिया कटारे, चुन्नीलाल गिरवाल, बबलु मेडा, रणजीतसिंह आदि ने
बताया की शुक्रवार से प्रारंभ हुवे धरने में शनिवार व रविवार तक सामान्य
बैठक वाला धरना आंदोलन रहेगा। सुनवाई नही होने पर पुलिया निर्माण व
दुर्घटना स्थल पर ही सोमवार से जल सत्याग्रह किया जाऐगा। इसके बाद भी
प्रशासन की उदासिनता दुर नही होती है तो भुख हडताल की जाऐगी। पुलिया
बनाने के लिये हर प्रकार के जतन किये जाऐगें अब हमारे किसी किसान भाई की
बली जुगाड वाली पुलिया पर नही देंगे।

*धरना स्थल पाना पहुंचे*

पटवारी संजय जाट ने बताया की मुझे किसी अधिकारी ने
यहां नही भेजा है अखबार में धरना आंदोलन की खबर पडकर मेरा राजस्व हल्का
गांव होने के कारण यहां पहुंचा हुं। इधर स्थानीय पंचायत का सचिव भी
उदासिन रवेया अपनाये रहा। शाम तक धरना स्थल पर नही पहुंचा। दसाई चौकी के
जवान ने भी पाना
धरने पर बैठे किसानो से चर्चा की व बैठे हुवे
किसानो के नाम दर्ज किये।


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