*अलीराजपुर~सरदार सरोवर बांध का प्राकृतिक जीवन पर सीधा असर भूकम्प का पहला झटका*~~

*अनुसूचित क्षेत्रों में शासन-प्रशासन का संवेधानिक महत्व ओर  रूढ़िगत व्यवस्थाएं*~~

*आदिवासी बचाऔ पर्यावरण बचाऔ*~~

✍🏻जुबेर निज़ामी की रिपोर्ट✍🏻
अलीराजपुर 📲9993116518~~

आदिवासीयो के  लिये पेशल जानकारी दोस्तों जहा विकास होता है पहले वहां विनाश लीला होती है,मतलब विकास की इबारत विनास पर ही लिखी जा सकती है ।
बचपन में विज्ञान के चमत्कार निबंध पड़ा था आज भी याद है उसमें फायदा ओर नुकसान भी बताया गया।
             आज भी देशभर में हम जो विकास देखते है चाहे वो छोटे-बड़े मार्ग हो या बड़ी बड़ी फेक्ट्रीया,प्लांट, खनन के लिए पहाड़ चाहिए या रेत के लिए नदी सभी प्राकृतिक संसाधनो का दोहन आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासियों की कुर्बानी की वजह से ही सम्भव हुआ।

👉 🙏इस संबंध मे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी *नितेश अलावा जी* से हमारे प्रतिनिधी ने ली है जिससे आदिवासीयो के विकास से लेकर सोषण तक कुछ मुद्दे आपको बता रहे है।🙏
             *विकास(शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार,प्रतिनिधित्व)का ऐसा लॉलीपॉप दिया की पूरे देश का आदिवासी आज हाशिये पर खड़ा है अपने ही गांव,अपने ही देश को छोड़कर जाने को मजबुर हो चला है।*
_हमारे देश मे धरती को माँ मानकर पूजा जाता है ये दुनिया को बताने वाला आदिवासी ही है जिसने देशहीत में विकास को स्वीकार किया और सरकार को हर तरह के लिए सहमति देकर खुद बर्बाद होते गया।_
          आपको ये जानकर हैरानी होगी के जिन अंग्रेजो ने इस देश मे 200 से अधिक वर्षो तक राज किया,मुगल,आर्य,सभी ने हजारों वर्षों तक राज किया लेकिन ये सभी लोग आदिवासी क्षेत्रों में नही घुस पाए न ही उन्होंने कभी ज्यादती की क्योंकि इन सबको आदिवासियों ने परास्त कर अपने क्षेत्रों से खदेड़ दिया था।
         _अंग्रेजो ने भी इस बात को माना ओर आदिवासियो के क्षेत्रों में उनके सँघर्ष को देखते हुए non ज्यूडिशियल क्षेत्र स्वशाषित घोषित किया जहां उनकी अपनी व्यवस्था-रूढ़िगत ग्रामसभा को समझकर मान्यता दी थी जिसे हम आज 244,1, 13,3(क) कहते हैं वो उस समय की ही देन है जिसे सविंधान बनने के बाद बाबा साहेब ने यथावत रखा।_
         *Crpc 1898,1973 का tribal क्षेत्रो में बिना आदिवासी के रूढ़ि परंपरा के  विस्तार  नही कर सकते,गजेटियर ऑफ इंडिया  vol-04,page384,अनुसार आदिवासी गाँव के हेडमेंन -पटेल, तड़वी,मुंडा आदि से निर्णय होंगे।* *CRPC 1898 sect 1(2) , CRPC 1973 sect 5, IPC 1860 sect 5 और CPC sect 4 भी यही कहता है*
*Crpc 1908 section -85,86,87, IPC 1860-section-05,CRPC 1973 section 5,105,105(A) भी यही कहता है के आदिवासी क्षेत्रों में उनकी रूडी प्रथा को विधि का बल है।*                   *भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के sect 41,42 के अनुसार बिना रुढिगत ग्रामसभा के अनुमति के आदिवासी की जमीन किसी विकास कार्य के लिए नही ली जाएगी, और बिना कलेक्टर की पूर्व अनुमति के आदिवासी की जमीन नही ली जाती, ऐसा m p भूमि संपादन अधिनियम में है ।*
भूमि सम्पादन अधिनियम 1898,समता,वेदांता जजमेन्ट,छोटा नागपुर टेंडेंसी एक्ट आदि ऐसे कही निर्णय है यहां तक कि देश के सरवोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने भी आदिवासी को इस देश का मालिक मूलनिवासी बताया है और उनकी जमीनें छीनने की वजह से ही नक्सली पैदा होने की बात कही।
   *सविंधान के अनुच्छेद-20,21,22 अनुसार अनुसूचित क्षेत्रो में SP. कलेक्टर विधि विरुद्ध कार्य कर रहे है।*
    _बावजूद हमारे देश मे विकास के नाम पर विनाश लीला चल रही है।_
     _सरदार सरोवर की कल्पना देश के सरवोच्च विकास गुजरात, महाराष्ट्र,राजस्थान में पानी,बिजली मध्यप्रदेश के लाखो परिवारों के घरों को उजाड़कर,उनकी संस्कृति, सभ्यता,परम्परा को खत्म करके की गई।_

*जिस मध्यप्रदेश का आदिवासी आज तक कोई  भूकम्प नही जानता था आज वहां के सबसे ज्यादा आदिवासी बाहुल्य जिला अलीराजपुर में विकास के नाम पर विनाशकारी बना सरदार सरोवर बांध के जलस्तर 139 होते ही भूकम्प के झटके महसूस होने लगे है।*
      *जो इस बात का प्रमाण है के जरूरत से ज्यादा प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने पर प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है जिसका खामियाजा निर्दोष,मासूमो को भुगतना होता है।*
                अब शहरों में जगह नही बची तो सरकारें भी उद्योगपतियों को गाँव मे ला रहे है कभी पर्यटन के नाम पर तो कभी रोड़ बनाने तो कभी किसी ओर चीज को लेकर किसी भी तरह आदिवासी क्षेत्रों में पाए जाने वाले अपार उनके जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा पर नजर गड़ाए बैठे है।
          _अभी भी वक़्त है आदिवासी क्षेत्रों को विकास के नाम पर लूटना छोड़कर उनके हाल पर छोड़ दो,प्राकृतिक जीवन जीने वाले लोगो को प्रकृति से अलग मत करो,वरना इस देश को शुद्ध हवा,ऑक्सीजन देने वाली,पर्यावरण को बचाने वाली ये अन्तिम पीढ़ी नही बची तो भविष्य में आपको ऑक्सीजन के सिलेंडर लेकर घूमना पड़ेगा।_
*मिशन आदिवासी बचाओ-पर्यावरण बचाओ*
🏹🏹🏹🏹🏹🏹🏹🏹


Post A Comment:

0 comments: