*अलीराजपुर~सरदार सरोवर बांध ओर आदिवासियों का विनाश*~~

✍🏻जुबेर निज़ामी की रिपोर्ट अलीराजपुर ~~

_प्रकृति,पर्यावरण संरक्षक बना गलत नीतियों/उद्योगपतियों का निवाला।_
स्कूल चले अभियान की बजाय-बोट चलाओ अभियान चलता है नर्मदा किनारे,
*बिजली विहीन ऐसे गाँव जहा के प्रत्येक घर मे मोटरसायकिल/साईकल की जगह होती है नावें(बोट)*
_स्कूल चलो अभियान की जगह बोट चलाओ जिंदा रहो अभियान_

✍🏻नितेश अलावा
दोस्तों दुनियाभर में कही प्रकार के आदिवासी रहते ओर विभिन्न समस्याओं,शोषण,से ग्रस्त है।
           देशभर में भारी बारिश चलते कही जिले के कही शहर और गांव जलमग्न हो रहे तो कही लोगो के बह जाने,लापता होने की खबरे आरही है।
प्रकृति का प्रकोप कहे या मानव विकास की लोलपता ओर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की वजह से ही ये आपदा सामने आरही है।
          आज में बात करना चाहता हु नर्मदा किनारे बसे उन हजारो गाँव लाखो परिवारों की जो गुजरात मे निर्मित सरदार सरोवर बांध की चपेट में आकर अपने जल-जंगल-जमीन-संस्कृति,सभ्यता,परम्परा से
दूर होकर या तो विस्थापित हुए है या फिर दर दर की ठोकर खाने को मजबुर है।
वही अलीराजपूर जिला गुजरात-महाराष्ट्र की सीमा पर बसा है जिसमे 26 से अधिक गांव नर्मदा किनारे बसे होकर डूब प्रभावित हुए है जिसमे सेकड़ो परिवार आज भी ऐसे है जिनका विस्थापन,या समुचित मुआवजा नही मिल पाया है और आज वो अपना सबकुछ खोकर बस ऊपर वाले से दुवा कर रहे है के अब तो बारिश रुक जाए और उनका बचा घर,खेत बच जाए।
    लेकिन परिस्थितियों को देखो जिस तरह के हालात है मध्यप्रदेश में नर्मदा पर बने सभी बांध के गेट खोलने पड़ रहे है जिससे लगातार जलस्तर बढ़ता जा रहा है और एक आंकड़े अनुसार आज भी 30 हजार से अधिक परिवार प्रभावित होकर विस्थापन को लेकर प्रदर्शन कर रहे है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नही हो रही है।
         दिनांक 10 सितंबर को हम झमाझम बारिश में ही निकल पड़े डूब प्रभावित गांव के हालचाल जानने तो पता चला के *ग्राम-ककराना में पहले जहा तक रास्ता जाता था वो पानी मे डूबकर कही दिनों से बन्द हो गया अब गांव वालों को रोज नई पगडंडी बनाकर आना जाना होता है,जो ककराना पहले बस्ता था वो पानी मे जलमग्न हो गया उसके बाद नई जगह स्थापित लोगो के घर भी डूब रहे है जब हमने स्थानीय लोगो को बुलाकर बात की तो बातें दिल दहला देने वाली सामने आई-मौके पर जो सर्वे हुआ है 138 के लेवल के टावर/पिल्लर वो अभी 135 में ही डूब रहे है और लगभग 25% पोल डूब चुके है और कही पोल के बिल्कुल नजदीक पानी आचुका है जिससे पोल 138 के बाहर बने मकान भी डूब रहे है जबकि सरदार सरोवर बांध में 135 तक ही पानी भरा है,इससे साफ होता है के बांध में जब जलस्तर 138 के लगभग भी होगा तब अलीराजपुर जिले के ये प्रभावित गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे।*
_जबकि सर्वे में ये डूब से बाहर बताये गए है।_
*ऐसे में सवाल उठता है के ये सर्वे गलत ही नही पूरा फैल है* और बेकवाटर पोल से अधिक होने का नतीजा हजारो आदिवासी भुगत रहे है।
गांव वालों का कहना है के सकेडो ऐसे परिवार है जिनका सर्वे के दौरान नाम नही आने से न मुआवजा मिला है न कोई रहने का प्लाट,खेती के लिए जमीन मिली,ककराना निवासी दिनेश मांझी का कहना है के उनके छोटे भाई को समुचित मुआवजा दिया और उनका विस्थापन हुआ लेकिन उसे छोड़ दिया गया जबकी हाई कोर्ट ने भी उसके पक्ष में निर्णय देकर राज्य सरकार को निर्देशित किया जा चुका है।
      ये तो सिर्फ एक नाम है वही की एक बूढ़ी विधवा महिला से बात की तो नम आंखों से उसने अपनी कहानी सुनाई के किस तरह उसका घर परिवार सब कुछ डूब गया,पति भी मर गया सब कुछ खो गया लेकिन न्याय नही मिला आज ये स्थिति है के भूखे प्यासे दर दर की ठोकर खाने को मजबुर है।
          ककराना से एक नाव पर सवार होकर हम लगभग 40 लोग   डूबप्रभावित गाँव को देखने निकल गए ककराना में नर्मदा-हथनी नदी के संगम स्थल पर प्राचीन शिव,हनुमान,ओर विष्णु बेघनाथ का मंदिर है जो हजारो साल पुराना है वहां जाकर देखकर आश्चर्य हुआ के जिस मन्दिर में कही बड़े आयोजन होते है भंडारा,चुनरी यात्रा,जैसे कही आयोजन होते है गाँव वाले पूजते है उसे भी शासन प्रशासन की अनदेखी से डूबा दिया गया जबकी सर्वे में ये बताया गया था के मंदिर नही डूबेगा।
                  थोड़ी दूर स्थित सुगट पूरा गांव पहाड़ी पर शिफ्ट हो गया लेकिन उनके भी सेकड़ो परिवार को नदी में डूबने के लिए छोड़ दिया गया छप्पर की छत बनाकर कच्ची झोपड़ियों में रहने को मजबूर लोगो ने कही बार अपने मकान डूबने के बाद ठिकाने बदले।
ककराना तट से लगभग 15 KM दूर भिताड़ा नाव से जाने में लगभग डेढ़ घण्टा लगा इस बीच पूरे नर्मदा तट पर स्थित गाँव-सुगट,चमेली,झंडाना,के लोग बड़ी बड़ी पहाड़ियों पर छप्पर वाली झोपड़ियों में जो आधे पानी मे दिख रहे थे वहा निवासरत लोगो को देखकर दिल भर आया छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें स्कूल में होना चाहिए वो अपने हाथों से नाव चलाते हुए देखे जा सकते है।
           _भीताडा पंहुचे तो गाँव वालों ने बताया के उनका तो सब कुछ लूट गया गांव काफी बडा था लेकिन सब डूब गया अब बस 15-20, मकान ओर परिवार ही निवास कर पा रहे है कुछ विस्थापित हुए तो कुछ का सबकुछ डूब गया इसलिए वो ऊपर पहाड़ियों पर जाकर रह रहे है और बहुत से लोग बेघर होकर भीख मांगने को मजबूर हो गए।_
                   ऐसी भीषण त्रासदी आदिवासी समाज की कभी देखी नही होगी।
इस दौरान *सभी गांव वालों का कहना था के पहले तो राजस्व विभाग के अधिकारी आते थे लेकिन इस बार तो कोई देखने तक नही आया और इस हद तक पानी भरेगा कोई सूचना नही की जिसकी वजह से नर्मदा किनारे लगभग 26 गाँवो की लगभग 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि फसल सहित बर्बाद हो गयी।*
          जिसके बाद इन लोगो के पास न रहने को घर,न खाने को अन्न बाकी रह गया।
        *कल तक जो नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कही जाती थी आज वो लोगों के जीवन,उनकी संस्कृति,परम्परा,जीवन जीने का साधन छीनने वाली बन जाएगी ऐसा किसी ने सोचा नही था वो भी उद्योगपतियो को फायदा पहुचाने के लिए ऐसा विनाश करेंगे सोचा नही।*
      वही *गुजरात के केवडिया में सरदार पटेल की मूर्ति स्थापित कर लगभग 70 गाँव के लोगो को विस्थापित कर दिया,उसी गाँव के लोग आज उस रास्ते के फुटपाथ पर अपनी भुट्टे बेचने, चाई की दुकान नही लगा पा रहे है।*
    अब सभी गाँव के लोग बड़े आंदोलन का रुख करने का संकेत दे रहे।
               ये पूरा सरदार सरोवर बांध आदिवासियों के विनाश का कारण बना है।
          *देश मे विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश किया जा रहा है और जिम्मेदार सब चुप है।*
            शायद इसीलिए कुदरत अपना कहर बरसा रही है क्योंकि उसको पूजने वाले सब बर्बाद,खत्म हो रहे है।
              जिन लोगो के हाथों में धान का कटोरा होता था आज उनके हाथ मे भीख मांगने का कटोरा आगया है।
            *न बचेगा आदिवासी,न बचेगी प्रकृति, न बचेगा पर्यावरण और जब ये सब नही रहेगा तो मानव जीवन सम्भव नही होगा।*
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हो सके तो इन लोगो को सहयोग करे,इनके आंदोलन में भाग ले और इन्हें मजबूती दे।
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