खातेगांव ~बिश्नोई समाज ने अमृता देवी चौराहे पर, शहीद अमृता देवी की पुण्य स्मृति में श्रद्धा सुमन अर्पित किए~~

अनिल उपाध्याय खातेगांव ~~

शहीद अमृता देवी के त्याग और बलिदान को विश्नोई समाज कभी नहीं भूल पाएगा ,जिन्होंने खेजड़ी के वृक्ष काटने के बदले में अपने प्राण निछावर कर दिये, त्याग और बलिदान की देवी की पुण्य स्मृति में बिश्नोई समाज द्वारा खातेगांव तीन बत्ती मार्ग पर स्थित अमृता देवी चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनको स्मरण किया!
ज्ञातव्य है कि आज से 289 वर्ष पूर्व स्वर्गीय श्रीमती अमृता देवी बिश्नोई ने अपने परिवार के साथ खेजड़ी ग्राम में सन 1730 में भादू सुदी दशमी के दिन खेजड़ी के वृक्ष काटने के बदले अपने शीश दे दिए । और इसी प्रकार उनके साथ 363 नर नारियों ने वृक्ष  काटने के  विरोध में उनको बचाने के बदले में अपने सिर कटा दिए पर वृक्ष नहीं कटने दिए।यह घटना विश्व में एक अद्वितीय घटना है।
यह घटना इस प्रकार है कि राजा अभय सिंह ने अपने किले को चिन्नवाने के लिए चुना पकाने के लिए लकड़ी की जरूरत थी । उनके आदेश पर मंत्री गिरधर दास भंडारी ने खेजड़ी ग्राम में जाकर खेजड़ी के वृक्ष काटने के लिए आदेश दिए । वृक्षों के कटने की आवाज सुनकर वहीं पर घर में काम कर रही अमृता देवी अपनी बेटियों के साथ बाहर आई । और वृक्ष काटने का विरोध किया तो मंत्री के आदेश पर उनके सैनिकों ने उनको वहां से हटाने का प्रयास किया। पर वह ना माने और बोली--" सिर साठे रुख रहे तो भी सस्ता जान " यह कहते हुए वृक्षों से लिपट गई , और अपना सर्वस्व हरे वृक्षों को काटने के बदले में निछावर कर दिया । उनके आह्वान पर वहां उपस्थित हुए पर्यावरण प्रेमी जन समुदाय में से 363 नर नारियों ने अपने बलिदान इसी प्रकार दे दिए। आज उनकी  पुण्य स्मृति में खातेगांव विश्नोई नव युवक परिषद जिला अध्यक्ष के संयोजन में एवं खातेगांव विश्नोई मंडल के सहयोग से शहीद अमृता देवी चौराहे पर उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की । अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। शहीद अमृता देवी अमर रहे । 363 बलिदानी अमर रहे। उन्हें विनम्रता पूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


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