*झाबुआ/मेघनगर एम.पी.बी. ऑफिस के सामने आदिवासियों की जमीन कैसे हो गई गैर आदिवासियों के नाम*~~

*जमीन घपला,कमलनाथ के सामने जयस संगठन उठाएगा ये मुद्दा*~~

*अनुवीभागीय अधिकारी पराग जैन ने कहा की निश्चित रूप से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा की ये खास रिपोर्ट~~

झाबुआ - मेघनगर भू-राजस्व विवाद व आदिवासियों का हक जल, जंगल,जमीन की लड़ाई को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है। क्योकि यहां के शासन प्रशासन के नुमाईंदे को शायद भोले-भाले आदिवासियों की तकलीफ व दर्द की चिंता नहीं। यही कारण है कि कभी बेगुनाह आदिवासियो को जेल में डाल दिया जाता है तो कभी आर्थिक आधार पर हथकंडे अपनाकर आदिवासियों की जमीन हड़प ली जाती है। कुछ ऐसा ही खेल मेघनगर झाबुआ रोड पर एम.पी. बी. विद्युत मंडल कार्यालय के सामने देखा जा सकता है यहां पर तहसील कार्यालय से लेकर बालक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से स्टेट हाइवे रोड से लगी  जमीन राजा महाराजा के जमाने से आदिवासी किसानी खेती करते आ रहे हैं। उक्त जमीन पर आदिवासियों के पूजनीय स्थान विजासन माता मंदिर, कालका माता मंदिर, एवं तेजा बाबजी का मंदिर भी वर्षों से स्थापित है। लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि आदिवासियों की जमीन बचाने वाला कानून भू राजस्व संहिता धारा 170 (ख )होने के बावजूद भी गैर आदिवासियों के नाम पर नगर परिषद मेघनगर द्वारा रसूखदारओ से सांठगांठ कर नामांतरण कर दी गई। जब इस मामले में नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह को शिकायत की गई तो उन्होंने जमीन हड़पने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही तो अगले ही दिन इंदौर संभाग राजस्व अपर आयुक्त का मेघनगर में अचानक आना कहीं ना कहीं बड़े घोटाले को उजागर करने के संकेत दे रहा है। राजस्व विभाग के अपर आयुक्त वंदना वेद का कहना है कि यदि किसी आदिवासी की जमीन कलेक्टर के निर्देशानुसार किसी विशेष  समय सीमा के निर्धारण या तय समय 10 वर्षों के साथ राजस्व अनुच्छेद धारा के नियम एवं शर्तों के साथ गैर आदिवासियों को दी जा सकती है लेकिन उसमें भी कई अनुबंध होते हैं। वह नामांकन की गई जगह  किस अधिकारी ने किस नियम पर  दी है।यह जांच की जाना जरूरी है। इन सब जल जंगल जमीन व आदिवासियों के हित की लड़ाई लड़ने वाला जयस संगठन भी मेघनगर में आदिवासियों की जमीन पर गैर आदिवासियों के कब्जे को लेकर मैदान में उतरने का मन बना चुका है। आखिर कब तक आदिवासियों का शोषण होता रहेगा.. यह बड़ा सवाल है।

*वर्जन....अनुवीभागीय अधिकारी पराग जैन*

यदि कोई आदिवासी व्यक्ति या संस्थान उक्त बताई गई जमीन पर नामांतरण या नामांकन को लेकर हमें शिकायत आवेदन देता है तो निश्चित रूप से इसकी जांच की जाएगी और यदि गलत तरीके से जमीन किसी व्यक्ति द्वारा हतिया ली गई है या नियम के विरुद है जमीन नामांतरण की गई है तो कायवाही की जाएगी।

*वर्जन--जयस कोर कमिटी  मेघनगर ब्लॉक संरक्षक मानसिंह भूरिया*

आदिवासियों का लंबे समय से शोषण होता आया है लेकिन अब यह सहा नहीं जाएगा जयस संगठन के माध्यम से हम नगर परिषद तहसील और एसडीएम झाबुआ कलेक्टर को आवेदन के साथ मिलेंगे व मुख्यमंत्री,कमलनाथ के झाबुआ आने पर उक्त मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने भी रखा जाएगा।


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