बड़वानी~जिंदगी के आठवें दशक में भी उन्हें इंतजार है अपने परिजनों से आने वाले संदेश का~~

बड़वानी /जिंदगी के आठवें दशक में अपने परिजनों की उपेक्षा से आहत होकर बड़वानी के अपना घर वृद्धाआश्रम में रह रहे श्री कृष्णकांत शर्मा अपनी सूनी आंखों में सपने सजाए हुए अभी भी अपने परिजनों के संदेश के इंतजार में है। अपनी इस आशा को वे आज भी अपने माउथ ऑर्गन पर ‘‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं‘‘ कि मार्मिक धुन निकालकर उपस्थितो के मन को भी उद्वेलित कर देते हैं।
      आशा ग्राम में संचालित अपना घर वृद्धा आश्रम में रह रहे खरगोन निवासी श्री कृष्ण कांत शर्मा बताते हैं कि वे और उनकी पत्नी दोनों सर्विस में थे। जब तक पत्नी जीवित रही उन्हें कोई चिंता नहीं थी। किंतु पत्नी के मरने के बाद उनकी परवरिश कर रहा पुत्र, पक्का मकान उसके नाम होते ही उनसे दूर हो गया। वहीं दो पुत्री एवं दामाद भी धीरे-धीरे उनकी जिम्मेदारी उठाने से कतराने लगे। ऐसे में वे आहत मन के साथ अपनी ससुराल बड़वानी आकर पत्नी के पैतृक मकान में रहने लगे और होटल में खाना खाने लगे।
     एक दिन उन्हें पता चला कि आशा ग्राम में चल रहे अपना घर वृद्धाश्रम में, आदर के साथ रहना, खाना-पीना सभी कुछ निशुल्क मिलता है तो वह इसे देखने हेतु आ गए और यहीं के होकर रह गए। श्री शर्मा बताते हैं कि अपना घर वृद्धाश्रम में आशा ग्राम के पदाधिकारियों के मिले आदर और स्नेह के कारण उन्हें अपने परिजनों की याद और सताने लगी वे आज भी इंतजार में है कि उनका पुत्र आकर उन्हें अपने साथ ले जाएगा। जहां वे अपने एवं पत्नी के खून-पसीने से बनाए गए मकान में अपना शेष जीवन पोते-पोतियो के साथ गुजार सकेंगे ।


Post A Comment:

0 comments: