शाजापुर ~बोलियों एवं भाषाओं का संरक्षण जरूरी है - गिरीश उपाध्याय~~

हिन्दी गौरव सम्मान एवं व्याख्यानमाला आयोजित~~

अनिल शर्मा शाजापुर

कालापीपल। अपनी भाषा और बोली के प्रति सम्मान और ललक अपने अंदर होना चाहिए। बोलियां ही जनस्रोत बनकर सहायक नदियों की भांति हिन्दी की गंगा को समृद्ध करती है। बोलियों एवं भाषा का संरक्षण जरूरी है क्योंकि इन्हीं से संस्कृतियों और परंपरा का विकास होता है। इन्हीं से भाव, संवेदना और अभिव्यक्ति की ताकत हमें मिलती है। उक्त बातें वरिष्ठ संपादक गिरीश उपाध्याय ने हिन्दी जागृति मंच द्वारा आयोजित ‘हिन्दी गौरव सम्मान एवं व्याख्यानमाला’ में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने समाज में घटते हुए संवाद को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया के कारण संवाद घट रहा है। हिन्दी का अशुद्ध होने का कारण भी सोशल मीडिया है। हमें सोशल मीडिया में शुद्ध लेखन करना चाहिए। पत्रकारिता में संचार माध्यमों के माध्यम से भाषा का खतरा चिंता का विषय है। समारोह में हिन्दी पखवाड़े के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को मंचस्थ अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मालवी लोकगीत प्यारो लागो रे म्हारो मालवो देश का गायन एस.डी.स्कालर्स के ऋषि शर्मा ने व मातृभाषा गान सरस्वती विद्या मन्दिर के मोहित जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया। वही विजन कांवेंट कही नन्हीं कवयित्री खुशबू सक्सेना ने अपनी स्वरचित कविता की प्रस्तुति देकर तालियाँ बटोरी। साथ ही नगर के साहित्यकारों द्वारा अपनी प्रतिनिधि रचनाओं के माध्यम से हिन्दी की दशा एवं दिशा का चिन्तन किया गया। साहित्यकार हुकुम सिंह देशप्रेमी ने भी अपनी प्रतिनिधि रचनाएँ आयोजन में सुनाई। उन्होंने कहा कि हमें एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। सम्मान करने से अधिक मिलता है। आयोजन में अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर बंधु ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की भूमिका मंच के सचिव अनिल शर्मा ने बताई। अतिथि परिचय सोहन दीक्षित ने कराया एवं  प्रशस्ति पत्र का वाचन सोनू सोनी ने किया। मंच संचालन डॉ हरीश सोनी ने किया। आभार मंच के सदस्य महेंद्र तोमर ने माना। इस अवसर पर सीएमओ पवन मिश्रा, नीरज द्विवेदी, विष्णु नारोलिया, संदीप गेहलोत, पवन दीक्षित, ममता मनावत, दीपिका दुबे, प्रिया नेमा, रेखा सांखला, भगवत राजपूत, वैभव शर्मा, नाथूसिंह परमार, हरिचरण परमार, कृपालसिंह मेवाडा, मनोज दुबे, गौरेलाल परमार, नचिकेता पुरोहित, अविनाश सुथार, रमेशचन्द्र राठौर विभिन्न स्कूलों के बच्चे, संचालकगण, एवं बडी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।


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