*झाबुआ~कमलनाथ जी ...आपके राज में आदिवासियों का हो रहा है शोषण*~~

*आदिवासी की जमीन पर कोन कर रहा अवैध कब्जे, वन पट्टे होने के बावजूद भी वन क्षेत्र का अधिकार नहीं*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा की ये खास रिपोर्ट~~

इतिहास गवाह सरकारे आती है जाती है आमजनता अपनी तकलीफों से निजात पाने के लिए चुनाव में अपने प्रतिनिधि को चुनकर विधायक सांसद बनाती हैं लेकिन आदिवासियों के कानून और हक की लड़ाई की बात करने वाले कम ही राजनेता और समाजसेवी दिखाई देते हैं जिससे पीड़ित और शोषित आदिवासी आज भी रसुदखोरो का दंश झेल रहा है ताजा मामले की बात करें तो मेघनगर मैं ऐसे कई स्थान है जहां आदिवासियों की जमीन थी लेकिन भोले-भाले आदिवासियों का आर्थिक लालच देकर नगर परिषद के भ्रष्टाचार ओं से सांठगांठ कर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से लेकर तहसील कार्यालय के बीच सारी जमीनो पर नामांकन कर राजस्व संहिता धारा 170 (ख)की धज्जियां उड़ाते हुए साफ देखा जा सकता है। आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों के नाम कर दी गईं। यहां तक कि रसूखदारो ने मंदिरों को भी नहीं छोड़ा और अपना कब्जा जमा लिया ऐसे में बड़ा सवाल है कि इस जमीनो से जुड़े तहसील और एसडीम कार्यालय पास में है लेकिन शासन प्रशासन क्यों मोन है?

*वन पट्टा होने के बावजूद वन अधिकारी ने तान दी बंदूक,आदिम जाति विकास मंत्री को लगाई गुहार*

मेघनगर से महज 12 किलोमीटर दूर ग्राम राखडिया के रहने वाले फतिया पिता पुनिया भूरिया को 2010 में वन विभाग द्वारा कक्ष क्रमांक 71 मैं वन पट्टा दिया गया था ।5 सितंबर को थांदला वन विभाग के रेंजर व कोमल सिह डिंडोर एवं उनके अमले द्वारा ग्राम राखड़िया पहुच कर 9 वर्ष पूर्व लगाए गए बांस सीताफल गुलमोरा, सागवान आदि के बड़े पेड़ को तहस-नहस कर दिया गया जब इसका विरोध हथिया द्वारा किया गया तो उस पर वन विभाग के व्यक्ति द्वारा बंदूक भी तान दी गई। साथ ही वन विभाग द्वारा वन पट्टे की जमीन पर पशु भी छोड़ दिये गए। हितग्राही द्वारा पौधे के जीव चक्र के दौरान पौधे का पालन पोषण कठिन परिश्रम करके किया गया एवं उन पोधो को बच्चों के जैसे बड़ा किया गया। एक ओर तो सरकार आदिवासियों की लड़ाई लड़ने की बात करती है वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र का पट्टा होने के बाद भी आदिवासियों को उनका हक नहीं दिया जाता है एवं कुछ रसूखदार आदिवासियों की जमीन पर आर्थिक लालच देकर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं।क्या अब वन का अधिकार आदिवासियों को मिलेगा यह बड़ा सवाल है?


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