*बड़ी खट्टाली~रोट' का होगा विशेष भोग, तो बालम ककड़ी का बटेगा प्रसाद। राजभोग में रहेगा छप्पनफलहारी प्रसाद*~~

 सोमवार को चारभुजा धाम  खट्टाली की धरा पूरे उत्साह के साथ अपने आराध्य भगवान चारभुजा नाथ के साथ जल क्रीडा करने हेतु पूरी तरह तैयार हो गई है। शनिवार व रविवार दिन भर सारी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। डोल ग्यारस पर बनने वाले रोट जिन्हें राजस्थान के कारीगर बनाते है वै भी बन कर तैयार हो चुके हैं ।जबकि हथिनी किनारे जलाभिषेक के बाद बालम ककड़ी के प्रसाद का वितरण होगा ।

ग्राम बड़ी खट्टाली के चारभुजा मंदिर प्रांगण पर सोमवार को "डोल ग्यारस' पर्व का अलग ही उत्साह झलकता है। मुख्य कार्यक्रम अल सुबह 6:00 बजे मंगला आरती के साथ प्रारंभ होगा, जबकि सुबह 8:30 बजे श्रंगार आरती व दोपहर 11:30 बजे ध्वजारोहण वैदिक मंत्रों के साथ किया जाएगा ।उसके पश्चात मुख्य आकर्षण 12:30 बजे होने वाली राजभोग आरती के दौरान भी दिखाई देगा, जब श्री कृष्ण स्वरूप भगवान चारभुजा जी को फलहारी छप्पन भोग का प्रसाद लगाया जाएगा। कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण चल समारोह रहता है ,जो दोपहर 3:30 बजे उत्थापन आरती के बाद शुरू होता है। इस चल समारोह में हाथी, घोड़ा, व, बग्गी के साथ नृत्य करता अश्वदल भी सभी श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करता है। चल समारोह चारभुजा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होगा तथा पूरे कस्बे के  साथ ही आसपास से आए ग्रामीणों के साथ दूरदराज जिलों व प्रांतों से आए श्रद्धालु भी शिरकत करते हैं। चल समारोह नगर भ्रमण करते हुए पुलिस चौकी तक पहुंचेगा। तथा वहां से पुनः पलट कर शाम 6:00 बजे हथिनी किनारे पहुंचेगा। जहां भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा को हथिनी मैया में स्नान कराकर विधि विधान से पूजा-अर्चना होगी। चल समारोह पुणे 8:30 बजे चारभुजा मंदिर प्रांगण पहुंचेगा, जहां महा आरती के पश्चात विशेष रूप से बनाई गई  फलहारी खिचड़ी प्रसाद के रूप में वितरित की जाएगी। चल समारोह का मुख्य आकर्षण पूरे रास्ते डीजे पर बज रहे मधुर भजनों पर नृत्य प्रस्तुति के अलावा ग्राम वासियों द्वारा अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाता है। साथ ही अनेक परिवार ,श्रद्धालुओं के लिए पेयजल ,ठंडाई ,व फल, की प्रसादी भी वितरित करते हैं।

*हाथी, घोडा पालकी जय कन्हैया लाल की*।

भगवान श्रीकृष्ण की जल क्रीडा के दर्शन से स्वयं को धन्य करने के लिए अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालु ग्राम बड़ी खट्टाली पहुंचते हैं पूरे रास्ते व मंदिर प्रांगण में हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की का जयघोष दिन भर गुंजायमान रहता है भगवान श्री कृष्ण के जन्माष्टमी पर जन्म के पश्चात आने वाले डोल ग्यारस पर्व पर जल स्नान की परंपरा का भी एक विशेष पौराणिक महत्व है इसी के चलते यहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु खट्टाली पहुंचते हैं ।तथा खट्टाली  का आकाश रंग बिरंगी गुलाल के साथ इस जयघोष से दिन भर गुंजायमान रहता हैरात्रि में शयन आरती के पश्च्यात केशरिया दूध की प्रसादी तथा देर रात्रि  तक भजन का आयोजन किया जाता हे ।


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