*झाबुआ~ फ़ूटतालाब में गरबो केँ माध्यम से प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश....*|~

*गाँधी जयंती पर गाँधी की भावनात्मक झाँकी का प्रदर्शन....*~~

*मोटरसाईकल पर गरबो से प्रदूषण मुक्त भारत की कल्पना....*~

*चौथें दिन पहुँचे 10 हजार से ज्यादा लोग.....*~

*नृत्य नाटिकाओं की प्रस्तुतियों में महिषासुर वध की हुई आकर्षक प्रस्तुति* ~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा ब्युरो की कलम से~~

झाबुआ - मेघनगर पिछले 10 वर्षो से स्थानीय ग्रामीण समूहों को गरबा खेलने की कला में दक्ष करते फ़ूटतालाब केँ आयोजन में गुजरात और गरबा खेलते स्थानीय समूहों में अंतर करना कठिन हो रहा है l मध्य प्रदेश केँ प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्रीवनेश्वर मारूति नँदन हनुमान मंदिर फ़ूटतालाब में चौथे दिन आस्था केँ इस महापर्व को निहारनें 10 हजार से ज्यादा लोग पहुँचे l वर्षा के बूँदों की परवाह किये बिना आस्था की ऐसी तस्वीरें आयोजन को शीर्ष पर पहुँचाने के साथ साथ अयोजकों केँ उत्साह में भी वृद्धि कर रही है l राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वी जयंती पर मेघनगर के साँई समूह ने भारत को प्लास्टिक मुक्त बनाने का आग्रह गरबो केँ माध्यम से कर गाँधी के भावनात्मक स्वरूप को झाँकी के रूप में प्रस्तुत किया l वही इंदौर के समूहों ने मोटरसाईकल के माध्यम से गरबा कर भारत के प्रदूषण मुक्त होने की कल्पना की l माँ की आराधना में चल रहे गरबो पर स्थानीय माताएँ बहने भी भारी भीड़ के साथ आस्था केँ अनुशासित दृश्यों का निर्माण रही है l नृत्य नाटिकाओं की प्रस्तुतियों में बुधवार को नटराज ग्रुप ने महिषासुर वध की हुई आकर्षक प्रस्तुति दी वही बबल्स ग्रुप ने राष्ट्रीय भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति देकर देश के प्रति उपस्थित समुदाय को जागरूक रहने का संदेश दिया l


*पारंपरिक गरबो केँ सुरों केँ बीच थिरक रही मातृशक्ति*

फुटतालाब में केसरिया रंग थने लागे रे , म्हारी अंबे माँ ना गरबा घूमती छे....हूँ तो गयी थी मेरे जैसे पारंपरिक गरबो केँ सुरों केँ बीच थिरक रही मातृशक्ति की उपस्थिति  बड़ी संख्या में गरबारास देखने आ रहे श्रद्धालुओं पर भारत के पारंपरिक गरबो की गहरी छाप छोड़ रही है l गरबा खेल रहे स्थानीय समूह भी पूरे अनुशासन के साथ अपने गरबो में सामाजिक संदेशों केँ साथ माँ की भक्ति के कभी न मिटने वाले चित्र फ़ूटतालाब की पवित्र धरा पर उकेर रही है l आयोजन समिति के सदस्य और ग्रामीण समूहों के गरबो को गुजरात जैसी दक्षता का अभ्यास करवाने वाले शिल्पकार श्रीसुरेशचंद्र पूरणमल जैन और राजेश रिंकू जैन आयोजन में आने वाले आंगतुकों की सुविधाओं को लेकर दिन रात अयोजन समिति के सदस्यों के साथ दिन रात परिश्रम कर रहे है l प्रतिदिन बढ़ती संख्या को देखते हुए महिलाओं और पुरुषों केँ बैठक की अतिरिक्त व्यवस्थाएँ की जा रही है


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