खिलेडी~~पिताजी एवं राजस्थान से बुलाए कारीगरो के साथ मिलकर हाथ से चलने वाले चाक पर दिये बनाते थे अब बेटे आधुनिकता के युग मे मशीन से चलने वाले चाक पर दिये बना रहे हैं~~

जगदीश चौधरी (खिलेडी)6261395702~~

दिपो का पर्व दिपावली आने को है जिसकी तैयारीया जोरों पर हो रही घरों पर रगाई पुताई तो साफ सफाई के काम गाँव में हर घरों पर चल रहा है वहीं दिपावली की खरीद के लिए बाजार भी सज गये वहीं दिपावली पर जिस मिट्टी के दियो का खास महत्व होता है पर आज हर वर्गों के कार्यों पर आधुनिकता का रंग चढ़ा है।

जहाँ पहले के लोगों जो काम कड़ी मेहनत खुन पसीना बहा कर करते थे वही काम आज मशीनों के द्वारा कीया जारहा है ।दिपावली नजदीक आते ही कंभकारो ने एक माहा पहले से मिट्टी से निर्मित दीपक बनाना शुरू कर दिया जाता है।इस बार लगातार बारिश कि वजह एवं अब मोसम के बदलाव के कारण काफी परेशानी का सामना करना पढ रहा है।

गाँव के प्रकाश प्रजापत व रतनलाल प्रजापत ने बताया की पहले पिता जी मिट्टी के चाक को हाथ से चला कर दीपक तैयार करते थे जिसमें मेहनत अधिक लगती हैं ओर समय भी ज्याद लगता है पिता जी हाथ के चाक पर दीपक तैयार करते थे अौर दो से तीन महीने पहले राजस्थान के कारीगरी बुलवा कर उनसे दीपक तैयार करवाते थे अब हम आधुनिक मशीन वाले चाक पर ही गाँव के प्रकाश प्रजापत स्वयंम ही दीपक बना रहे है।अब तक 10 से 20 हजार दीपक तैयार कर लिये है, जहाँ पहले हाथ से चलने वाले चाक पर एक दिन मे 100 से 300 दीपक एक दिन मे तैयार होते थे वही अब मशीन वाले चाक पर दिनभर मे 700 से अधिक दीपक बना रहे है।


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