झाबुआ~भाजपा का बिखराव क्या उप चुनाव की सेहत के लिये अच्छा होगा~~

9 दिन में भाजपा को मेैदान फतह करने में आ सकता हेै पसीना~~

जितेगा भूरिया तो हारेगा भी भूरिया ही ~~

झाबुआ। संजय जैन~~

विधानसभा उपचुनाव के प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क में अब बमुश्किल 9 दिनों का समय शेष रह गया है। इस बीच चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशी प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क में पूरी एड़ी-चोटी का बल लगा रहे है। मतदाताओं को लुभाने हेतु तमाम प्रयास किए जा रहे है। इस बीच अंदर से जो छनकर खबरे आ रहीं हे,उसमें कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया का धुआंधार प्रचार-प्रसार जारी है, तो भाजपा में अंदरूनी तौर पर अंतरकलह भी देखने को मिल रहा है। उधर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ रहे कल्याणसिंह डामोर भी तेजी से जनसंर्पक में लगे हुए है। 
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-नजर आ रहे हैं भाजपा कार्यकर्ता बिखरे बिखरे से..... 
दूसरी ओर भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे भानू भूरिया,जो भाजयुमो के जिलाध्यक्ष होकर एक नया युवा चेहरे होने के साथ साथ ,नगरीय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के फलिये-फलिये, घर-घर तक प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क में जुटे हुए है। भाजपा की ओर से सांसद गुमानसिंह डामोर, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा नेतृत्व प्रदान कर रहे हेै। लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं संगठन की कमजोरी या रणनीति में असफलता तथा कार्यकर्ताओं में एकजुटता की कमी भाजपा में साफ तौर पर नजर आ रही है। भाजपा महिला मोर्चा का भी अब तक चुनावी मैदान में प्रचार-प्रसार में नहीं उतरना,समझ से परे है।
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संगठन में तालमेल की कमी है या और कोई कारण है ....?
प्रश्न यह उठता है कि क्या कारण है कि जिले में भाजपा के कार्यकर्ताओं भाजपा से कन्नी काट रहे हैं ....? और भाजपा इस विधानसभा चुनाव में कमजोर होती हुई नजर आ रही है। कहीं ना कहीं बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की अनदेखी और उपेक्षा भाजपा के लिए कमजोर कड़ी साबित ना हो। क्या कारण है जिन कार्यकर्ताओं ने पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए घर-घर प्रचार किया था,आज वही कार्यकर्ता नदारद क्यों है .....? क्या कोई संगठन में तालमेल की कमी है या और कोई कारण है ....?
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जितेगा तो भूरिया व हारेगा तो भी भूरिया......
सोशल मीडिया व चौराहो पर चर्चा यह भी है कि जितेगा तो भूरिया व हारेगा तो भी भूरिया। एक भूरिया के जीतने से सरकार में मंत्री पद मिलना तय बता रहे, तो दूसरा भूरिया जितता है तो सरकार में विपक्ष में विधायक बनकर बैठेगा,अब फैसला जनता को करना है। 21 अक्टूबर को मतदान के बाद 24 अक्टूबर को परिणाम आएगा। कांग्रेस की ओर से प्रचार के अंतिम दिन 19 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कमलनाथ का रानापुर में पहली बार आना लगभग तय माना जा रहा है।





         ००००० बॉक्स खबर ०००००

जब लोकस्वामी टीम ने बाजार में लोगो से चर्चा कि तो अधिकतर लोगों का कहना था कि टिकट वितरण के बाद तो हमे उन भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की स्थिति पर बहुत तरस आ रहा है जो कि बागी के काफी करीबी थ और बागी भी उनका काफी करीबी ही था। अब इन लोगो के लिये तो एक तरफ खाई और एक तरफ कुँए जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है। लोगो का यह कहना भी था कि शायद उपरोक्त कारण की वजह से भाजपाइयों में पिछले दोनो चुनावो वाला उत्साह साफ तौर से नदारत नजर आ रहा है। ये अभी काफी कंफ्यूज चल रहे है। कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली ऐसा कांग्रेस ने दावा किया है वहीं दूसरी और ग्राम पंचायत उमरिया व जंत्री के सरपंच सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली। जिससे ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं भाजपा रणनीति बनाने में कमजोर पड़ रही है,कहीं ना कहीं भाजपा के कार्यकर्ता मतदाता तक जाने में असफल हो रहे हैं और नीतियों को बताने में भी सफल नहीं हो पा रहे हैं । अगर इसी तरह हालात रहे तो झाबुआ विधानसभा से कांग्रेस मजबूत होती दिखाई दे रही है । 




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