बड़वानी~नन्हे बच्चों का आरंभिक विकास परखने में बच्चे बने रोल माॅडल~~

बड़वानी /बच्चों की गृह आधारित देखभाल भी अब माता-पिता के साथ-साथ आशा कार्यकर्ता के अवलोकन में सुदृढ़ बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आशा बच्चे के जन्म से 42 दिनों तक की स्वास्थ्य देखभाल के साथ-साथ 15 माह की आयु तक 5 अतिरिक्त गृह भ्रमण कर बच्चों की बालमृत्यु रोकने, कुपोषण को मिटाने एवं जन्मजात विकृति परखने में कारगर सहयोगी बन सकेगी।
आशाग्राम में चल रहे प्रशिक्षण में विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों द्वारा रोल माॅडल की भूमिका का निर्वाह करते हुए प्रशिक्षण को रोचकता प्रदान की, वहीं बालक राजवंश आयु एक वर्ष और बालिका निशा आयु सात माह एवं बच्चों के वजन को ग्राफ के माध्यम से कलर अनुसार स्वास्थ्य पोषण की श्रेणी बताई गई। इस दौरान आरंभिक बाल विकास के विभिन्न स्तरों को रोल प्ले के माध्यम से समझाया गया। कार्यकर्ताओं ने भी ट्रेन के स्वरूप में आशा की भूमिका एवं गृह भ्रमण योजना के आठ मार्ग बताए।
जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के प्रशासकीय अधिकारी श्रीमती नीता दुबे ने बताया कि निःशक्तजन अधिकार अधिनियम 2016 के अनुसार दिव्यांगता के 21 प्रकारों को भी बच्चों के आरंभिक बाल विकास के दौरान परखने में कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण में जानकारी देकर पिक्टोरियल पोस्टर प्रदान किये जा रहे हैं। इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर संध्या सेन, प्रेम मोर्य आदि उपस्थित थे।


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