बड़वानी~मोटिवेशनल स्पीकर युवा आर्किटेक्ट हुसैन अली ने प्रेरक उद्बोधन में कहा-हर नया दिन बेशकीमती होता है, इसे व्यर्थ न गंवाएं~

बड़वानी /सीखने की कोई उम्र नहीं होती, लेकिन सीखने का सबसे सही समय बचपन और किशोरावस्था होती है। तीन वर्ष की आयु तक बालक बहुत तेज गति से सीखता है। आप विद्यार्थी हैं, इस समय आप जो भी सीखने का प्रयास करेंगे वह आप सीख सकेंगे। यदि अभी का समय भी आप खो देंगे तो फिर सीखने से वंचित हो जायेंगे। हर दिन बेशकीमती होता है। हर दिन नया होता है। इसका उपयोग करें, इसको व्यर्थ न गंवाएं। ये बातें युवा आर्किटेक्ट और मोटिवेशनल स्पीकर हुसैन अली ने शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा संचालित की गई ‘सीखने की कला और उसका महत्व’ विषय पर हुए आयोजन में दो सौ से अधिक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं। यह आयोजन प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्शन में हुआ। श्री हुसैन ने बोध कथाओं के जरिये विद्यार्थियों को समय का महत्व और सीखने की तकनीक पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि जब आप कोई बात पूर्ण मनोयोग से और एकाग्रचित्त होकर कोई बात सुनते हैं या पढ़ते हैं तो आपको अक्षरशः याद हो जाती हैं और वर्षों तक याद रहती हैं। इस अवसर पर श्रीमती शबाना अली भी उपस्थित थीं। श्री अली ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर भी दिये। संयोजन और संचालन राहुल मालवीया ने किया। आभार नंदिनी अत्रे ने व्यक्त किया। कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने कहा कि आज की कार्यशाला में उद्यमिता विकास के विद्यार्थी उपस्थित थे। उन्हें श्री अली के माध्यम से न केवल सीखने की कला का ज्ञान हुआ अपितु अपनी बात को बेहतरीन ढंग से कैसे कहा जा सकता है, यह भी सीखने को मिला। एक सफल उद्यमी में सतत् सीखने और सीखे हुए को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने का कौशल होता है। उद्यमिता विकास के विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जा रहा है ताकि वे सफल उद्यमी बन सकें। आयोजन में सहयोग प्रीति गुलवानिया, ग्यानारायण शर्मा, ज्योति जोशी उपाध्याय, कोमल सोनगड़े, वर्षा मालवीया ने किया।


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