शरद पूर्णिमाकी चांदनी रात में खीर रखने की धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यता - ( ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री )

धार ,  सभी पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का खास महत्व होता है। शारदीय नवरात्रि के खत्म होने के बाद शरद पूर्णिमा आती है। मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि  हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि पर शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इस बार पूर्णिमा तिथि दिनांक 12 अक्टूबर को मध्य रात्रि 12:42 बजे से लगेगी वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन दिनांक 13 अक्टूबर  को मध्य रात्रि पश्चात 02:41  बजे होगा ।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के चार माह के शयनकाल का अंतिम चरण होता है। माना जाता है कि इस दिन चांद अपनी 16 कलाओं से पूरा होकर रातभर अपनी किरणों से अमृत की वर्षा करता है।
              *धार्मिक मान्यता*
ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि  पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की मध्यरात्रि में चंद्रमा की सोलह कलाओं से अमृत वर्षा होने पर ओस के कण के रूप में अमृत बूंदें खीर के पात्र में भी गिरेंगी जिसके फलस्वरूप यही खीर अमृत तुल्य हो जायेगी, जिसको प्रसाद रूप में ग्रहण करने से प्राणी आरोग्य एवं कांतिवान रहेंगे।
               *वैज्ञानिक मान्यता*
डाँ अशोक शास्त्री के मुताबिक  शरद पूर्णिमा की रात को छत पर खीर को रखने के पीछे वैज्ञानिक तथ्य भी छिपा है। खीर दूध और चावल से बनकर तैयार होता है। दरअसल दूध में लैक्टिक नाम का एक अम्ल होता है। यह एक ऐसा तत्व होता है जो चंद्रमा की किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। वहीं चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया आसान हो जाती है। इसी के चलते सदियों से ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। एक अन्य वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। 

           *शरद पूर्णिमा पर उपाय*
डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि खीर में मिश्रित दूध, चीनी और चावल के कारक भी चंद्रमा ही हैं अतः इनमें चंद्रमा का प्रभाव सर्वाधिक रहता है जिसके परिणाम स्वरूप किसी भी जातक की जन्म कुंडली में चंद्रमा क्षीण हों, महादशा-अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा चल रही हो या चंद्रमा छठवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो चन्द्रमा की पूजा करते हुए स्फटिक माला से ॐ सों सोमाय मंत्र का जाप करें ऐसा करने से चंद्रजन्य दोष से शान्ति मिलेगी।
         *शरद पूर्णिमा का महत्व*
डाँ शास्त्री के मुताबिक आश्विन  शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के मध्य जब भगवान विष्णु शयन मुद्रा में होते हैं तो पृथ्वी पर भुखमरी, दरिद्रता व सूखे की देवी 'अलक्ष्मी' का साम्राज्य रहता है इन्हीं के साथ प्रलय के अन्य तीन देवता, ज्वर-बुखार जन्य रोंगों के स्वामी रूद्र, भूस्खलन बाढ़ और सूखे के स्वामी वरुण तथा अनेक रोंगों, दुर्घटनाओं एवं अकाल मृत्यु के स्वामी यम का पृथ्वी पर तांडव रहता है। इस अवधि में देवप्राण कमजोर पड़ जाते हैं और आसुरी शक्तियों का वर्चश्व बढ़ जाता है परिणाम स्वरुप पृथ्वी पर अधिक पाप बढ़ जाते हैं।
शक्ति आराधना का पर्व नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्द्धिदात्री की आराधना करके जब दशमी तिथि को व्रत पारण होती है,तो अगले ही दिन विष्णुप्रिया 'पापांकुशा' एकादशी के दिन मां लक्ष्मी पापों पर अंकुश लगाना आरम्भ देती हैं। 
ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि पूर्णिमा के ही दिन जब भगवान कृष्ण अपनी नौ लाख गोपिकाओं के साथ स्वयं के ही नौलाख अलग-अलग गोपों के रूप में महारास कर रहे होते हैं तो मां महालक्ष्मी पृथ्वी पर घर-घर जाकर सबको दुःख दारिद्रय से मुक्ति का वरदान देती हैं किन्तु जिस घर के सभी प्राणी सो रहे होते हैं वहां से 'लक्ष्मी' दरवाजे से ही वापस चली जाती है। तभी शास्त्रों में इस पूर्णिमा को 'कोजागर व्रत' यानी कौन जाग रहा है व्रत भी कहते हैं। इसदिन रात्रि में की गई लक्ष्मी पूजा सभी कर्जों से मुक्ति दिलाती हैं। अतः शास्त्र इस शरदपूर्णिमा को 'कर्जमुक्ति' पूर्णिमा भी कहते हैं। 
ज्योतिषाचार्य डाँ. पं. अशोक शास्त्री के मुताबिक रात्रि में मां लक्ष्मी की षोडशोपचार विधि से पूजा करके 'श्रीसूक्त' का पाठ, 'कनकधारा स्तोत्र', विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ अथवा भगवान् कृष्ण का 'मधुराष्टकं' का पाठ ईष्टकार्यों की सिद्धि दिलाता है पूजा में मिष्ठान, मेवे और खीर के साथ दिव्य औषधि का भोग लगाएं, रात्रि में ही बड़े पात्र में खीर बनाकर खुले आसमान में अथवा छत पर रखें। ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहते हैं कि दशहरे से शरद पूनम तक चन्द्रमा की चाँदनी में विशेष हितकारी रस, हितकारी किरणें होती हैं । इन दिनों चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ उठाना, जिससे वर्षभर आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें । नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए दशहरे से शरद पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चन्द्रमा के ऊपर त्राटक करें।
अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं। जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर को ग्रहण करें ।
इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है ।
शरद पूनम दमे की बीमारी वालों के लिए वरदान का दिन है।
चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है। शरद पूनम की चाँदनी का अपना महत्त्व है लेकिन बारहों महीने चन्द्रमा की चाँदनी गर्भ को और औषधियों को पुष्ट करती है। डाँ. शास्त्री ने बताया कि अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है । इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि में बुद्धिदाता का प्रकाश आता है ।

*सुख समृद्धि के लिए राशि अनुसार करे ये उपाय*

          मेष :~ शरद पूर्णिमा पर मेष राशि के लोग कन्याओं को खीर खिलाएं और चावल को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएं। ऐसा करने से आपके सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।

          वृषभ :~ इस राशि में चंद्रमा उच्च का होता है। वृष राशि शुक्र की राशि है और राशि स्वामी शुक्र प्रसन्न होने पर भौतिक सुख-सुविधाएं प्रदान करते हैं। शुक्र देवता को प्रसन्न करने के लिए इस राशि के लोग दही और गाय का घी मंदिर में दान करें।

          मिथुन :~ इस राशि का स्वामी बुध, चंद्र के साथ मिल कर आपकी व्यापारिक एवं कार्य क्षेत्र के निर्णयों को प्रभावित करता है। उन्नति के लिए आप दूध और चावल का दान करें तो उत्तम रहेगा।

          कर्क :~ आपके मन का स्वामी चंद्रमा है, जो कि आपका राशि स्वामी भी है। इसलिए आपको तनाव मुक्त और प्रसन्न रहने के लिए मिश्री मिला हुआ दूध मंदिर में दान देना चाहिए।

          सिंह :~ आपका राशि का स्वामी सूर्य है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर धन प्राप्ति के लिए मंदिर में गुड़ का दान करें तो आपकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन हो सकता है।

          कन्या :~ इस पवित्र पर्व पर आपको अपनी राशि के अनुसार 3 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन में खीर खिलाना विशेष लाभदाई रहेगा।

          तुला :~ इस राशि पर शुक्र का विशेष प्रभाव होता है। इस राशि के लोग धन और ऐश्वर्य के लिए धर्म स्थानों यानी मंदिरों पर दूध, चावल व शुद्ध घी का दान दें।

          वृश्चिक :~ इस राशि में चंद्रमा नीच का होता है। सुख-शांति और संपन्नता के लिए इस राशि के लोग अपने राशि स्वामी मंगल देव से संबंधित वस्तुओं, कन्याओं को दूध व चांदी का दान दें।

          धनु :~ इस राशि का स्वामी गुरु है। इस समय गुरु उच्च राशि में है और गुरु की नौवीं दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी। इसलिए इस राशि वालों को शरद पूर्णिमा के अवसर पर किए गए दान का पूरा फल मिलेगा। चने की दाल पीले कपड़े में रख कर मंदिर में दान दें।

          मकर :~ इस राशि का स्वामी शनि है। गुरु की सातवी दृष्टि आपकी राशि पर है जो कि शुभ है। आप बहते पानी में चावल बहाएं। इस उपाय से आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

          कुंभ :~ इस राशि के लोगों का राशि स्वामी शनि है। इसलिए इस पर्व पर शनि के उपाय करें तो विशेष लाभ मिलेगा। आप दृष्टिहीनों को भोजन करवाएं।

          मीन :~ शरद पूर्णिमा के अवसर पर आपकी राशि में पूर्ण चंद्रोदय होगा। इसलिए आप सुख, ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।
                    डाँ. पं. अशोक शास्त्री


Post A Comment:

0 comments: