बड़वानी~अल्पावधि रोजगारोन्मुखी रंगकर्म प्रषिक्षण कार्यषाला~~

गहन अनुभूति के विषयों की प्रभावी प्रस्तुति हो सकती है एकल नाट्य विधा से ~~

बड़वानी /एकल नाट्य एक बहुत ही समर्थ विधा है। इसमें मंच पर एक ही कलाकार होता है, वह अपने संवादों, हावभाव, संगीत और प्रकाष के माध्यम से ऐसा भव्य दृष्य बना सकता है कि दर्षकों को ऐसा प्रतीत होने लगता है कि वह अनेक पात्रों को देख रहा है या अनुभव कर रहा है। सीमित साधनों और समय में प्रस्तुति तैयार की जा सकती है, लेकिन कलाकार में निपुणता होना आवष्यक है। ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा संचालित की जा रही अल्पावधि  रोजगारोन्मुखी रंगकर्म प्रषिक्षण कार्यषाला के प्रषिक्षुओं को एकल नाट्य विधा के बारे में जानकारी देते हुए कॅरियर काउंसलर और रंगकर्मी डाॅ. मधुसूदन चैबे ने कहीं। यह प्रषिक्षण कार्यक्रम प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में संचालित किया जा रहा है। भीमा नायक नाट्य दल, बड़वानी के सदस्यगण प्रीति गुलवानिया, ग्यानारायण शर्मा, किरण वर्मा, राहुल मालवीया द्वारा प्रषिक्षण दिया जा रहा है। प्रीति गुलवानिया ने बताया कि हमारा प्रयास यह है कि इस कार्यषाला में नाट्यकला से संबंधित सभी प्रमुख विधाओं से प्रषिक्षुओं को परिचित करवाया जाये और कम से कम एक प्रस्तुति भी तैयार करवाई जाये। एकल नाट्य विधा  के जरिये गहन अनुभूति वाले प्रकरणों को बहुत प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सकता है। इसमें हम वृद्धों की समस्या, एड्स, महिला सषक्तीकरण जैसे विषयों को सम्मिलित कर रहे हैं। सहयोग नंदिनी अत्रे, रवीना मालवीया, दीपिका धनगर, राहुल वर्मा, अंषुल सुलिया, सूरज सुल्या, मगाराम जाट का रहा।


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