*खेतिया~कपास व्यपारियों ने दी हड़ताल पर जाने की सूचना*~~

प्रमोद पंड्या खेतिया~~

खेतिया।मंडी टैक्स कम करने की मांग को लेकर कृषि उपज मंडी व्यापारी संघ खेतिया द्वारा मध्यांचल कॉटन जीनस एंड ट्रेड एसोसिएशन की बैठक के निर्णय अनुसार यदि मध्य प्रदेश सरकार दिनांक 17 तक मंडी टैक्स कम नहीं करती है तो समस्त कपास मंडियों में व्यापारी दिनांक 18 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे खेतिया कृषि उपज मंडी व्यापारी संघ के अध्यक्ष महिपाल नाहर के नेतृत्व में कृषि उपज मंडी व्यापारी संघ के सदस्यों ने बाहर साधक अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस बाबत सूचना दी कृषि उपज मंडी व्यापारी संघ के सचिव प्रशांत मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्यांचल कॉटन जींस एंड ट्रेड एसोसिएशन की बैठक हुई जिसमें मध्य प्रदेश सरकार से मंडी टैक्स कम करने के बारे में मांग किए जाने का निर्णय किया गया एक राष्ट्र एक समान करके अवधारणा को समक्ष ना रखते हुए मध्य प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में मंडी टैक्स को लेकर बहुत बड़ा फर्क है मंडी टैक्स मध्य प्रदेश में 1.70% है जबकि अन्य राज्यों में दशमलव 5 0% है जिससे कपास उत्पादक किसान और उससे संबंधित सभी व्यापारियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है अधिक मंडी टैक्स होने से यहां का कपास गुजरात में महाराज जा रहा है जिससे यहां के जिनिंग प्रेसिंग उद्योग बंद होने की कगार पर है मध्य प्रदेश सरकार में अपने घोषणा पत्र में वचन दिया था की मंडी टैक्स 1% किया जाएगा साथी निराश शुल्क को भी समाप्त किए जाने की मांग की गई कृषि उपज व्यापारी संघ खेतिया ने आज कृषि उपज मंडी खेतिया पहुंचकर वारसदार अधिकारी श्री मुजाल्दे एसडीएम पानसेमल तथा श्री ओपी खेड़े मंडी सचिव खेतिया को एक सूचना पत्र सौंपा उपस्थित व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार कोई निर्णय नहीं ले पाई तो दिनांक 18 तारीख से हम मध्य प्रदेश के संघ के साथ होंगे और मध्य प्रदेश के समस्त कपास मंडियों में दिनांक 18 अक्टूबर से व्यापारियों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी इस दौरान सर्व श्री कमल किशोर अग्रवाल ,प्रवीण  शाह, दीपेश हरसोला, भिकम जोशी, सुनील सुवासरा ,कांतिलाल सोनिस, श्री चांडक , सहित अनेक व्यापारी उपस्थित थे ज्ञात रहे कि कृषि उपज मंडी समिति खेतिया बड़वानी जिले की श्रेष्ठ मंडियों में से एक है।जो खेतिया की आर्थिक रीढ़ कही जा सकती है,मध्य प्रदेश सरकार द्वारा टैक्स कम न किए जाने पर निश्चित ही व्यापार प्रभावित होगा जिसका नुकसान कपास उत्पादक किसानों व यहां के जिनिंग प्रेसिंग व्यवसाय पर भी पड़ेगा।।


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