झाबुआ~बच्चों के निवालों पर पोषण आहार के नाम पर डाला जा रहा डाका-हल्दी मिले चावंल को बताया जा रहा पुलाव युक्त खिचडी-मीनू के अनुसार कडी पूरी तरह नदारद~~





झाबुआ। संजय जैन~~


प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा स्कूलों एवं छात्रावासो स्कूली बच्चों को पोषण युक्त आहार देने के लिये दंभ भरती हो किन्तु झाबुआ जिले में स्कूलों में वितरित किये जाने वाले मघ्यान्ह भोजन के नाम पर बच्चों को थाली में जो परोसा जा रहा है उसे देख कर कही न कहीं अव्यवस्थाओ एव भ्रष्टाचार की बु अवश्य ही आती दिखाई दे रही है।





-मध्यान्ह भोजन स्कीम सामाजिक विकास में मदद करती है.....





मध्यान्ह भोजन का उद्देश्य अधिक छात्रों के नामांकन और अधिक छात्रों की नियमित उपस्थिति के संबंध में स्कूल भागीदारी पर मध्याह्न भोजन का मिड डे मील महत्वपूर्ण प्रभाव पङता है। अधिकतर बच्चे खाली पेट स्कूल पहुंचते हैं। जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं उन्हें भी दोपहर तक भूख लग आती है और वे अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। मध्यान्ह भोजन बच्चों के लिए ÓÓपूरक पोषणÓÓ के स्रोत और उनके स्वस्थ विकास के रूप में भी कार्य कर सकता है। यह समतावादी मूल्यों के प्रसार में भी सहायता कर सकता है क्योंकि कक्षा में विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे साथ में बैठते हैं और साथ-साथ खाना खाते हैं। विशेष रूप से मध्यान्ह भोजन स्कूल में बच्चों के मध्य जाति व वर्ग के अवरोध को मिटाने में सहायता कर सकता है। स्कूल की भागीदारी में लैंगिक अंतराल को भी यह कार्यक्रम कम कर सकता है क्योंकि यह बालिकाओं को स्कूल जाने से रोकने वाले अवरोधों को समाप्त करने में भी सहायता करता है। मध्यान्ह भोजन स्कीम छात्रों के ज्ञानात्मक, भावात्मक और सामाजिक विकास में मदद करती है। 





-दिखाई देने लगी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढती.....





सुनियोजित मध्यान्ह भोजन को बच्चों में विभिन्न अच्छी आदते डालने के अवसर के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। यह स्कीम महिलाओं को रोजगार के उपयोगी स्रोत भी प्रदान करती है। मध्यान्ह भोजन स्कीम देश के 2408 ब्लॉकों में एक केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के रूप में 15 अगस्त, 1995 को आरंभ की गई थी। वर्ष 1997-98 तक यह कार्यक्रम देश के सभी ब्लाकों में आरंभ कर दिया गया। वर्ष 2003 में इसका विस्तार शिक्षा गारंटी केन्द्रों और वैकल्पिक व नवाचारी शिक्षा केन्द्रों में पढऩे वाले बच्चों तक कर दिया गया। किन्तु शासन की यह योजना वास्तविक तौर पर प्रदत्त गाईडलाईन के अनुसार संचालिक करने की बजाय इस योजना को कमाई का जरिया बना दिया गया है या कहें तो यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढती दिखाई देने लगी है।





-किया भ्रमण हमारी टीम ने रानापुर स्थित मिडिल स्कूल में मध्यान्ह भोजना के वक्त ....





झाबुआ जिले में मध्यान्ह भोजन योजना समूहों के माध्यम से स्कूलों में संचालित होता है। हमारी टीम ने 3 अक्तुबर बुधवार को इसी प्रकल्प  को लेकर रानापुर स्थित मिडिल स्कूल में मध्यान्ह भोजन के वक्त भ्रमण किया तो पाया कि इस स्कूल में 176 बच्चों का नाम दर्ज होकर बुधवार को  111 छात्रों की उपस्थिति दर्ज बताई गई थी। जब बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिया जारहा था तो 111 में से केवल 45 बच्चे ही भोजन करते पाये गये। पडताल करने पर पता चला कि बुधवार को निर्धारित मीनू चार्ट के अनुसार पुलाव युक्त खिंचडी और कडी बच्चों को परोसा जाना थी। किन्तु इसे संचालित करने वाले कालिका माता समुह द्वारा खिचडी के नाम पर चांवल में हल्दी नमक डाल कर पीला रंग दे दिया गया था और इसे समुह खिंचडी मान कर परोस रहा था। आधे से भी कम बच्चे जो मध्यान्ह भोजन के नाम पर हल्दी से पीले किये हुए चावल खा रहे थे वे अनमने मन से इसे गटक रहे थे। कडी नाम की कोई चीज ही नही दी गई थी। 





चल रहा भोजन के नाम पर तहसील स्तर की स्कूलो तक में घालमेल  .......





स्वाद एवं मीनू के अनुसार यह कथित खिचडी केवल गरीब वर्ग के जरूरतमंद बच्चे ही खाते हुए नजर आये। यह सही है कि हर वर्ष महंगाई बढ रही है और प्रशासन शासन स्तर से समुहों को आनुपातिक रूप से रकम में बढोत्री भी की जाती है। बाबजूद इसके इस प्रकार मध्यान्ह भोजन के नाम पर जब तहसील स्तर की स्कूलो में घालमेल चल रहा है तो गा्रमीण स्कूलों में चलने वाले मध्यान्ह भोजन के कार्यक्रम का भगवान ही मालिक है, यह कहा जावे तो अतिशयोक्ति नही होगी। जब हमारी टीम ने जिन बच्चों ने मध्यान्ह भोजन नही किया उनसे इस बारे में पुछा गया तो उनका कहना था कि दिये जाने वाला भोजन उन्हे जरा भी अच्छा नही लगता है और खाने के बाद जी मिचलाता है इसलिये हम लोग खाना नही खाते है।





-प्रधानाध्यापक बात को टालते हुए दिखाई दिये.....





इस प्रकार देखे तो मध्यान्ह भोजन के नाम पर भ्रष्टाचार, मिली भगत एवं समुहों को उपकृत करने का खेल पूरे जिले में चल रहा है इस बात से इंकार नही किया जा सकता है। जब मध्यान्ह भोजन की मानकता एवं अरूचिकर भोजन के बारे में संस्था के प्रभारी प्रधानाध्यापक श्री सोलंकी से इस प्रकार मीनू के अनुसार घटिया भोजन देने के बारे में पुछा गया तो बात को टालते हुए दिखाई दिये। उन से पुलाव युक्त खिचंडी एवं कडी देने के बारे में जानकारी चाही गई तो वे इस बारे में कुछ भी नही बताने को तैयार नही हुए। 





-तैयार नही किसी प्रकार का संज्ञान लेने को प्रशासन भी इस बारे में .....





ज्ञातव्य है कि बच्चों को पूरक पोषण आहार सही तरिके से प्राप्त हो रहा है या नही इसके लिये ब्लाक स्तर से जिला स्तर तक मानिटरिंग करने का सरकार ने प्रबंध कर रखा है किन्तु इस तरह मध्यान्ह भोजन के नाम पर पूरे अंचल में जिम्मवारों की शह पर बच्चों के निवालों के नाम पर डाका डालने का क्रम बदस्तुर जारी है। और प्रशासन भी इस बारे में किसी प्रकार का संज्ञान लेने को तैयार नही दिखाई देता है।





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